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वादों के बादल छाए तो, बरसे नहीं
Agra
Updated Fri, 30 May 2014 05:30 AM IST
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छावनी बोर्ड
हाल वार्ड एक का
इसे कैंट बोर्ड भी कहते हैं। आठ वार्ड हैं यहां। इनमें करीब 52 हजार लोग रहते हैं। इन्हें नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना बोर्ड की जिम्मेदारी है। हर वार्ड एक सदस्य चुनकर बोर्ड में भेजता है ताकि वे उनके हितों की वकालत कर सकें। वार्डों सदस्यों के नए चुनाव आसन्न हैं। इससे पहले कि मतदाताओं के घरों पर फिर से वादों के बादल छाएं, आइए देखते हैं पिछली बार घिरे ये बादल कितना बरसे, कितना तरसाया। इन वार्डों की परिक्रमा पर निकले शिव नरायन साहू बता रहे हैं वार्ड एक का हाल
आगरा। 15 हजार से अधिक की आबादी, लगभग 20 साल से वार्ड का एक ही पार्षद, लेकिन प्यास बुझाने के लिए वाशिंदों को भटकना पड़ता है। इंटरलॉकिंग सड़कें तो बनी है, लेकिन बनने के साथ ही टूटने भी लगी हैं। सड़कें क्या डलावघर, नजारे एक जैसे ही हैं।
यह दास्तां है छावनी बोर्ड के वार्ड नंबर एक की। 2008 में चुनी गई छावनी बोर्ड का कार्यकाल 5 जून को समाप्त हो रहा है। वार्ड क्षेत्र देखकर लगता मानो किसी गांव में आ गए हैं। यहां की पार्षद राजकुमारी 1992 से लगातार पार्षद हैं, लेकिन अव्यवस्थाओं को ठीक करने के लिए एक मौका और चाहती हैं।
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बोरिंग का पानी एकदम खारा जबकि जलसंस्थान के पानी बदबूदार है जिससे मुंह भी नहीं धोया जा सकता। हैंडपंप भी खराब पड़ा है।
राजू, दुकानदार
सफाई कर्मचारी इस वार्ड में कभी-कभार ही आते हैं। आए भी तो सड़कों के किनारे ही जगह-जगह कूड़े का ढेर लगाकर चले जाते हैं।
सौरभ, छात्र
यहां पानी की बहुत दिक्कत है। कोई सुनवाई भी नहीं। पीने के लिए बाहर से पानी लाना पड़ता है या फिर खरीद कर पीना पड़ता है।
विद्या, गृहणी
वार्ड के लोगों के लिए पूरी ईमानदारी के साथ काम किया गया है। पानी की समस्या को दूर करने के लिए एक करोड़ रुपये से पाइप लाइन छीपी टोला ओवर हेड लाइन से डलवाई जा रही है। वार्ड की साफ सफाई का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।
राजकुमारी, पार्षद वार्ड नंबर एक
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हाल वार्ड एक का
इसे कैंट बोर्ड भी कहते हैं। आठ वार्ड हैं यहां। इनमें करीब 52 हजार लोग रहते हैं। इन्हें नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना बोर्ड की जिम्मेदारी है। हर वार्ड एक सदस्य चुनकर बोर्ड में भेजता है ताकि वे उनके हितों की वकालत कर सकें। वार्डों सदस्यों के नए चुनाव आसन्न हैं। इससे पहले कि मतदाताओं के घरों पर फिर से वादों के बादल छाएं, आइए देखते हैं पिछली बार घिरे ये बादल कितना बरसे, कितना तरसाया। इन वार्डों की परिक्रमा पर निकले शिव नरायन साहू बता रहे हैं वार्ड एक का हाल
आगरा। 15 हजार से अधिक की आबादी, लगभग 20 साल से वार्ड का एक ही पार्षद, लेकिन प्यास बुझाने के लिए वाशिंदों को भटकना पड़ता है। इंटरलॉकिंग सड़कें तो बनी है, लेकिन बनने के साथ ही टूटने भी लगी हैं। सड़कें क्या डलावघर, नजारे एक जैसे ही हैं।
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यह दास्तां है छावनी बोर्ड के वार्ड नंबर एक की। 2008 में चुनी गई छावनी बोर्ड का कार्यकाल 5 जून को समाप्त हो रहा है। वार्ड क्षेत्र देखकर लगता मानो किसी गांव में आ गए हैं। यहां की पार्षद राजकुमारी 1992 से लगातार पार्षद हैं, लेकिन अव्यवस्थाओं को ठीक करने के लिए एक मौका और चाहती हैं।
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बोरिंग का पानी एकदम खारा जबकि जलसंस्थान के पानी बदबूदार है जिससे मुंह भी नहीं धोया जा सकता। हैंडपंप भी खराब पड़ा है।
राजू, दुकानदार
सफाई कर्मचारी इस वार्ड में कभी-कभार ही आते हैं। आए भी तो सड़कों के किनारे ही जगह-जगह कूड़े का ढेर लगाकर चले जाते हैं।
सौरभ, छात्र
यहां पानी की बहुत दिक्कत है। कोई सुनवाई भी नहीं। पीने के लिए बाहर से पानी लाना पड़ता है या फिर खरीद कर पीना पड़ता है।
विद्या, गृहणी
वार्ड के लोगों के लिए पूरी ईमानदारी के साथ काम किया गया है। पानी की समस्या को दूर करने के लिए एक करोड़ रुपये से पाइप लाइन छीपी टोला ओवर हेड लाइन से डलवाई जा रही है। वार्ड की साफ सफाई का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।
राजकुमारी, पार्षद वार्ड नंबर एक