{"_id":"3-49228","slug":"Agra-49228-3","type":"story","status":"publish","title_hn":"तुलसी-सालिग्राम विवाह के साथ सहालग शुरू ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तुलसी-सालिग्राम विवाह के साथ सहालग शुरू
Agra
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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बाह। लाल चुनरी, सिंदूर, मेहंदी और चूड़ी से सजी संवरी तुलसी और सालिग्राम के विवाह का मंडप बटेश्वर के गोकुलनाथ मंदिर में सजा। मंगल गीतों के बीच तुलसी और सालिग्राम के साथ फेरों की रस्म की निर्वहन किया गया। कार्तिक स्नान करने वाली महिलाओं ने तुलसी के समक्ष दीपक जलाकर विशेष अनुष्ठान किया।
ऐसी मान्यता है कि तुलसी-सालिग्राम विवाह के संकल्प और उसे पूरा करने से व्यक्ति सुखी और समृद्धि होती है। संकल्प पूर्ण होने में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं। देवोत्थान एकादशी का सालिग्राम रूप में विष्णु और वृंदा के रूप में तुलसी के विवाह के लिए गोकुलनाथ मंदिर के कार्तिक स्नान करने वाली महिलाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस मौके पर तुलसी जी का शृंगार किया गया। म्हावर लगाकर पूजन किया। दीप जलाया, फिर सात परिक्रमा कर जल चढ़ाया। इस मौके पर मंगत गीत गाये गए। इसी के साथ सहालग शुरू हो गया। चौतरफा शहनाई की गूंज सुनाई दी। शादी समारोहों के चलते जरार, बाह, जैतपुर, बटेश्वर, भदरौली, पिनाहट जैसे कसबों में जाम की स्थिति पैदा हो गई।
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ऐसी मान्यता है कि तुलसी-सालिग्राम विवाह के संकल्प और उसे पूरा करने से व्यक्ति सुखी और समृद्धि होती है। संकल्प पूर्ण होने में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं। देवोत्थान एकादशी का सालिग्राम रूप में विष्णु और वृंदा के रूप में तुलसी के विवाह के लिए गोकुलनाथ मंदिर के कार्तिक स्नान करने वाली महिलाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस मौके पर तुलसी जी का शृंगार किया गया। म्हावर लगाकर पूजन किया। दीप जलाया, फिर सात परिक्रमा कर जल चढ़ाया। इस मौके पर मंगत गीत गाये गए। इसी के साथ सहालग शुरू हो गया। चौतरफा शहनाई की गूंज सुनाई दी। शादी समारोहों के चलते जरार, बाह, जैतपुर, बटेश्वर, भदरौली, पिनाहट जैसे कसबों में जाम की स्थिति पैदा हो गई।
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