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कीठम में प्रवासी पक्षियों ने जमाया डेरा
Agra
Updated Tue, 13 Nov 2012 12:00 PM IST
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आगरा। सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम) में प्रवासी पक्षियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। कई प्रवासी पक्षियों ने अपने प्रजनन के लिए आईलैंड्स पर डेरा जमा लिया है। नेस्टिंग भी शुरू हो गई है।
बता दें कि सूर सरोवर पक्षी विहार में कीठम झील में जलस्तर 20 फीट से ज्यादा होने के कारण इस दफा कई प्रवासी पक्षी रास्ता भटक गए थे। इस कारण अक्टूबर तक आने वाले कई प्रवासी पक्षी नवंबर के पहले सप्ताह तक यहां नहीं पहुंचे। वाइल्ड लाइफ विभाग के प्रयासों के बाद झील का जलस्तर कम होने से झील के आईलैंड्स फिर से चमकने लगे हैं। इन पर अधिकांश प्रवासी पक्षी नेस्टिंग करते हैं। डीएफओ चंबल सेंचुरी सुजॉय बनर्जी ने बताया कि अब प्रवासी पक्षियों की आमद बढ़ने लगी है। नेस्टिंग एरिया में कई प्रवासी पक्षी देखे जा रहे हैं। अभी तक स्नैक बर्ड या डार्टर बर्ड, कोरमोरेंट, फिलमिंगोज, पौंडएरन, पर्पल मूर हेन, ब्रह्मनी डक, चाइना मूर जैसे पक्षी देखे गए हैं। कई प्रवासी पक्षियों ने नेस्टिंग भी शुरू कर दी है। झील में अभी पानी और कम होगा। इसके बाद प्रवासी पक्षियों की आमद और बढ़ जाएगी। वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर के अंत तक काफी संख्या में प्रवासी पक्षी यहां देखने को मिल जाएंगे। अभी साइबेरियन क्रेन समेत अन्य प्रवासी पक्षियों की कमी खल रही है।
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बता दें कि सूर सरोवर पक्षी विहार में कीठम झील में जलस्तर 20 फीट से ज्यादा होने के कारण इस दफा कई प्रवासी पक्षी रास्ता भटक गए थे। इस कारण अक्टूबर तक आने वाले कई प्रवासी पक्षी नवंबर के पहले सप्ताह तक यहां नहीं पहुंचे। वाइल्ड लाइफ विभाग के प्रयासों के बाद झील का जलस्तर कम होने से झील के आईलैंड्स फिर से चमकने लगे हैं। इन पर अधिकांश प्रवासी पक्षी नेस्टिंग करते हैं। डीएफओ चंबल सेंचुरी सुजॉय बनर्जी ने बताया कि अब प्रवासी पक्षियों की आमद बढ़ने लगी है। नेस्टिंग एरिया में कई प्रवासी पक्षी देखे जा रहे हैं। अभी तक स्नैक बर्ड या डार्टर बर्ड, कोरमोरेंट, फिलमिंगोज, पौंडएरन, पर्पल मूर हेन, ब्रह्मनी डक, चाइना मूर जैसे पक्षी देखे गए हैं। कई प्रवासी पक्षियों ने नेस्टिंग भी शुरू कर दी है। झील में अभी पानी और कम होगा। इसके बाद प्रवासी पक्षियों की आमद और बढ़ जाएगी। वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर के अंत तक काफी संख्या में प्रवासी पक्षी यहां देखने को मिल जाएंगे। अभी साइबेरियन क्रेन समेत अन्य प्रवासी पक्षियों की कमी खल रही है।
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