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मंडी में कब्जे का खेल जारी, बनने लगीं पक्की दुकानें
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मैनपुरी। शहर की नवीन मंडी की सरकारी भूमि पर कब्जा करने का सिलसिला जारी है। जानकारी के बाद भी जिम्मेदारों की अनदेखी से दबंगों के हौसले बुलंद हो गए हैं। अभी तक टीन और टट्टर की दुकानें बना रहे दबंग अब पक्की दुकानें बनाने पर उतर आए हैं। इसके लिए नींव खोदी जा चुकी है, कुछ की तो दुकानें भी बनने लगीं हैं। अब तक जिला प्रशासन इस पूरे खेल से अनजान था, लेकिन अब जानकारी उपजिलाधिकारी सदर को हो गई है। वह जल्द ही अवैध कब्जा हटाने की बात कह रहे हैं।
खाली पड़ी है कई एकड़ भूमि
नवीन मंडी में स्थाई चबूतरे और पक्की दुकानों के अलावा भी कई एकड़ भूमि खाली पड़ी हुई है। मंडी प्रशासन की ओर से इस भूमि का अब तक कोई इस्तेमाल नहीं किया गया तो मंडी के कुछ व्यापारियों व दबंगों की इस पर नजर पड़ गई। कुछ लोगों ने धीरे धीरे टीनशेड व टट्टर लगा कर दुकानें बना लीं। कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उनकी उम्मीदें और बढ़ गईं। अब वह लोग और उनकी दबंग साथी कब्जा और बढ़ाने लगे हैं। मंडी की खाली पड़ी कई एकड़ भूमि पर दबंगों ने पक्की दुकानें बनाना शुरू कर दीं हैं।
अवैध हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं
मंडी प्रशासन इन दुकानों को अवैध बताता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साध ली जाती है। ऐसा लगता है जैसे उन्हें इस बारे में जानकारी ही नहीं है। यही कारण है कि मंडी में धड़ल्ले से दुकानों का निर्माण चल रहा है। दुकानें बन जाने के बाद उन्हें हटाना आसान नहीं होगा। अब सवाल यही उठता है कि अगर इन दुकानों का निर्माण है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
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अफसरों को नहीं दिख रही चलती जेसीबी
मंडी में प्लॉटिंग करने वाले दबंगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिन रात कब्जा की गई जमीन पर निर्माण कार्य कराने में जुटे हुए हैं। वर्तमान में ट्रैक्टरों से भराव डालने का काम चल रहा है। कुछ व्यापारियों ने तो जेसीबी लगाकर नींव खुदवा दी है तो वहीं कुछ की दुकानें बनकर तैयार हैं। बड़ी बात यह है मंडी में किसी जिम्मेदार को जेसीबी चलती भी नहीं दिख रही, तभी तो कार्रवाई नहीं हुई।
सरकारी खजाने को होगा करोड़ों का नुकसान
मंडी समिति द्वारा दुकानों का निर्माण कर उनकी खुली बैठक में नीलामी की जाती है। जो भी सबसे अधिक बोली लगाता है उसे ही दुकान दी जाती है। अमूमन एक दुकान की बोल लाखों में लगती है। ऐसे में दबंगों द्वारा जमीन पर कब्जा कर सरकारी खजाने को लाखों का नहीं बल्कि करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है।
मंडी में अवैध कब्जों की जानकारी मिली है। सोमवार को मंडी में अवैध कब्जों को चिह्नित करने का काम किया जाएगा। इसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी। - अशोक कुमार, एसडीएम सदर।
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खाली पड़ी है कई एकड़ भूमि
नवीन मंडी में स्थाई चबूतरे और पक्की दुकानों के अलावा भी कई एकड़ भूमि खाली पड़ी हुई है। मंडी प्रशासन की ओर से इस भूमि का अब तक कोई इस्तेमाल नहीं किया गया तो मंडी के कुछ व्यापारियों व दबंगों की इस पर नजर पड़ गई। कुछ लोगों ने धीरे धीरे टीनशेड व टट्टर लगा कर दुकानें बना लीं। कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उनकी उम्मीदें और बढ़ गईं। अब वह लोग और उनकी दबंग साथी कब्जा और बढ़ाने लगे हैं। मंडी की खाली पड़ी कई एकड़ भूमि पर दबंगों ने पक्की दुकानें बनाना शुरू कर दीं हैं।
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अवैध हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं
मंडी प्रशासन इन दुकानों को अवैध बताता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साध ली जाती है। ऐसा लगता है जैसे उन्हें इस बारे में जानकारी ही नहीं है। यही कारण है कि मंडी में धड़ल्ले से दुकानों का निर्माण चल रहा है। दुकानें बन जाने के बाद उन्हें हटाना आसान नहीं होगा। अब सवाल यही उठता है कि अगर इन दुकानों का निर्माण है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
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अफसरों को नहीं दिख रही चलती जेसीबी
मंडी में प्लॉटिंग करने वाले दबंगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिन रात कब्जा की गई जमीन पर निर्माण कार्य कराने में जुटे हुए हैं। वर्तमान में ट्रैक्टरों से भराव डालने का काम चल रहा है। कुछ व्यापारियों ने तो जेसीबी लगाकर नींव खुदवा दी है तो वहीं कुछ की दुकानें बनकर तैयार हैं। बड़ी बात यह है मंडी में किसी जिम्मेदार को जेसीबी चलती भी नहीं दिख रही, तभी तो कार्रवाई नहीं हुई।
सरकारी खजाने को होगा करोड़ों का नुकसान
मंडी समिति द्वारा दुकानों का निर्माण कर उनकी खुली बैठक में नीलामी की जाती है। जो भी सबसे अधिक बोली लगाता है उसे ही दुकान दी जाती है। अमूमन एक दुकान की बोल लाखों में लगती है। ऐसे में दबंगों द्वारा जमीन पर कब्जा कर सरकारी खजाने को लाखों का नहीं बल्कि करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है।
मंडी में अवैध कब्जों की जानकारी मिली है। सोमवार को मंडी में अवैध कब्जों को चिह्नित करने का काम किया जाएगा। इसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी। - अशोक कुमार, एसडीएम सदर।