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जिला अस्पताल आएं पर दवाओं की आस न लगाएं
Updated Sat, 01 Sep 2018 11:34 PM IST
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दवाएं
- फोटो : डेमाे
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मैनपुरी। जिला अस्पताल में प्रमुख दवाएं खत्म हो चुकी हैं। बुखार, डायरिया, दर्द और अन्य सामान्य रोगों के लिए भी अस्पताल में दवाइयां मौजूद नहीं हैं। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को बाहर से दवा लानी पड़ती हैं।
जिला अस्पताल में पिछले मार्च से ही दवाइयों का टोटा चल रहा है। विभाग का ऑनलाइन खरीद आदेश अधिकारियों के लिए मुसीबत बन गया है। पांच महीने में केवल एक महीने ही दवाइयां अस्पताल में मरीजों को अच्छे ढंग से मिलीं, जबकि चार महीने परेशानी से ही जूझना पड़ा। अब फिर से हालात बिगड़ गए हैं। जिला अस्पताल में बुखार,डायरिया, पेटदर्द, सिरदर्द, अन्य एंटीबायोटिक दवाइयां नहीं हैं। इससे यहां आने वाले मरीजों के लिए बाहर से दवाइयां लिखनी पड़ती हैं।
एक तरफ जिला अस्पताल में दवाइयां नहीं हैं। दूसरी तरफ बाहर से दवाइयां मंगाने पर रोक है। डॉक्टर और फार्मासिस्ट यदि अधिकारियों से दवा मांगते हैं तो उपलब्ध नहीं होती हैं। यदि बाहर से लिखते हैं तो कार्रवाई होती है। यदि मरीज को उपचार न दें तो तीमारदार उनके साथ अभद्रता करते हैं।
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ये दवा नहीं हैं उपलब्ध
पैरासिटामोल
सिप्लोफ्लोक्सासिन
डोमपेरीडॉन
एंटीबायोटिक
इज्जत बचाने के लिए किया जा रहा चंदा
अस्पताल के सूत्रों की मानें तो सपा ने चार अगस्त को अस्पताल में दवाइयों को लेकर धरने की चेतावनी दी है। सांसद भी इस धरने में मौजूद रहेंगे, जिसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों और फार्मासिस्टों से चंदा करना शुरू कर दिया है। चंदे से गोपनीय तरीके से कुछ दवाइयां लोकल स्तर से ही खरीदी जा रही हैं। ऑनलाइन दवाइयां आने में देरी हो रही है।
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जिला अस्पताल में पिछले मार्च से ही दवाइयों का टोटा चल रहा है। विभाग का ऑनलाइन खरीद आदेश अधिकारियों के लिए मुसीबत बन गया है। पांच महीने में केवल एक महीने ही दवाइयां अस्पताल में मरीजों को अच्छे ढंग से मिलीं, जबकि चार महीने परेशानी से ही जूझना पड़ा। अब फिर से हालात बिगड़ गए हैं। जिला अस्पताल में बुखार,डायरिया, पेटदर्द, सिरदर्द, अन्य एंटीबायोटिक दवाइयां नहीं हैं। इससे यहां आने वाले मरीजों के लिए बाहर से दवाइयां लिखनी पड़ती हैं।
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एक तरफ जिला अस्पताल में दवाइयां नहीं हैं। दूसरी तरफ बाहर से दवाइयां मंगाने पर रोक है। डॉक्टर और फार्मासिस्ट यदि अधिकारियों से दवा मांगते हैं तो उपलब्ध नहीं होती हैं। यदि बाहर से लिखते हैं तो कार्रवाई होती है। यदि मरीज को उपचार न दें तो तीमारदार उनके साथ अभद्रता करते हैं।
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ये दवा नहीं हैं उपलब्ध
पैरासिटामोल
सिप्लोफ्लोक्सासिन
डोमपेरीडॉन
एंटीबायोटिक
इज्जत बचाने के लिए किया जा रहा चंदा
अस्पताल के सूत्रों की मानें तो सपा ने चार अगस्त को अस्पताल में दवाइयों को लेकर धरने की चेतावनी दी है। सांसद भी इस धरने में मौजूद रहेंगे, जिसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों और फार्मासिस्टों से चंदा करना शुरू कर दिया है। चंदे से गोपनीय तरीके से कुछ दवाइयां लोकल स्तर से ही खरीदी जा रही हैं। ऑनलाइन दवाइयां आने में देरी हो रही है।