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न्यायालय नहीं पहुंची केस डायरी, जमानत पर नहीं हुई बहस
Updated Sat, 17 Feb 2018 11:22 PM IST
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पुलिस की दबिश से दहशत
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज।
जिला जज न्यायालय में शनिवार को हिंसा के आरोपियों के जमानत प्रार्थना पत्रों पर शनिवार को बहस नहीं हो पाई। अब सुनवाई की अग्रिम तिथि 21 फरवरी की नियत की गई है। न्यायालय ने पुलिस को संबंधित मामलों की केस डायरी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जमानत पर सुनवाई टल जाने के कारण पैरोकारों में मायूसी देखी गई।
गौरतलब है कि न्यायालय में हिंसा के मामलों से जुड़े जेल में बंद आरोपी राज निवासी पैसोई, अनुज निवासी लवकुश नगर, विनीत सक्सेना, अनिल निवासी नगला वाले, सचिन निवासी ततारपुर के जमानत प्रार्थना पत्रों पर शनिवार की तिथि नियत थी। लेकिन जिला न्यायालय में पुलिस की केस डायरी नहीं पहुंची। पुलिस पैरोकार ने शासकीय अधिवक्ता को लिखित रूप से यह जानकारी दी कि मामले की केस डायरी पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय में है। यह केस डायरी अभी उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में अग्रिम तिथि निर्धारित की जाए। शासकीय अधिवक्ता रमेश चंद्र गोला ने न्यायालय को केस डायरी उपलब्ध न होने के कारण अग्रिम तिथि निर्धारित करने की मांग की। न्यायालय ने पुलिस को निर्धारित तिथि तक केस डायरी उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई के लिए 21 फरवरी की तिथि नियत कर दी है। जमानत के लिए पैरोकारी में जुटे आरोपियों के परिवारीजन जमानत प्रार्थना पत्रों पर बहस न होने के कारण मायूस नजर आए। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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जिला जज न्यायालय में शनिवार को हिंसा के आरोपियों के जमानत प्रार्थना पत्रों पर शनिवार को बहस नहीं हो पाई। अब सुनवाई की अग्रिम तिथि 21 फरवरी की नियत की गई है। न्यायालय ने पुलिस को संबंधित मामलों की केस डायरी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जमानत पर सुनवाई टल जाने के कारण पैरोकारों में मायूसी देखी गई।
गौरतलब है कि न्यायालय में हिंसा के मामलों से जुड़े जेल में बंद आरोपी राज निवासी पैसोई, अनुज निवासी लवकुश नगर, विनीत सक्सेना, अनिल निवासी नगला वाले, सचिन निवासी ततारपुर के जमानत प्रार्थना पत्रों पर शनिवार की तिथि नियत थी। लेकिन जिला न्यायालय में पुलिस की केस डायरी नहीं पहुंची। पुलिस पैरोकार ने शासकीय अधिवक्ता को लिखित रूप से यह जानकारी दी कि मामले की केस डायरी पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय में है। यह केस डायरी अभी उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में अग्रिम तिथि निर्धारित की जाए। शासकीय अधिवक्ता रमेश चंद्र गोला ने न्यायालय को केस डायरी उपलब्ध न होने के कारण अग्रिम तिथि निर्धारित करने की मांग की। न्यायालय ने पुलिस को निर्धारित तिथि तक केस डायरी उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई के लिए 21 फरवरी की तिथि नियत कर दी है। जमानत के लिए पैरोकारी में जुटे आरोपियों के परिवारीजन जमानत प्रार्थना पत्रों पर बहस न होने के कारण मायूस नजर आए। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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