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कांवड़ लेकर निकली भक्तों की टोलियां
Updated Sat, 15 Jul 2017 11:01 PM IST
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कांवड़ यात्रा
- फोटो : PTI
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कासगंज/सोरों।
सोरों के लहरा घाट से शनिवार को कांवडिय़ों की कई टोलियों ने कांवड़े भरीं। दिनभर कांवडिय़ों के निकलने का सिलसिला बना रहा। शिवभक्तों की टोली बम बम भोले के जयकारेां के साथ रंग बिरंगी कावड़े लेकर जा रहीं थीं।
श्रावण मास के दूसरे सेामवार को शनिवार को कांवड़ ले जाने वाले कांवडिय़े शिवालयों में गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करेंगे। हालांकि कांवडिय़ों की ज्यादा भीड़ नहीं थी,लेकिन छोटी छोटी टोलियां दिनभर निकलती रहीं। लहरा गंगाघाट पर कांवड़िए पूजा अर्चना के बाद कांवड़े सजाकर गंतव्य की ओर रवाना हो रहे थे।
ज्यादातर कांवडिय़ा मुरैना क्षेत्र के थे। वहीं कछला गंगाघाट से बदायूं, बरेली की ओर जाने वाले कांवडियों ने कांवड़े भरीं। यहां डाक कांवड़ लेकर तमाम कांवड़िये रवाना हुए। गंगाघाट पर बम बम भोले के जयकारे व गंगा मईया के जयकारे सुनाई दे रहे थे। मुरैना के कांवड़िए राम चंद्र ने बताया कि वह सातवीं बार कांवड़ भरने आए हैं। भगवान भोले की कृपा से वह गंगा की धार तक खिचे चले आते हैं। कांवड़ उठाकर इतनी लंबी दूरी भोले की कृपा से ही तय हो पाती है। कांवड़ की टोलियों में महिलाओं की संख्या भी देखी गई। महिलाएं भी उत्साह के साथ भोले के जयकारे लगाते हुए कांवड़ लेकर आगे बड़ रहीं थीं।
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सोरों के लहरा घाट से शनिवार को कांवडिय़ों की कई टोलियों ने कांवड़े भरीं। दिनभर कांवडिय़ों के निकलने का सिलसिला बना रहा। शिवभक्तों की टोली बम बम भोले के जयकारेां के साथ रंग बिरंगी कावड़े लेकर जा रहीं थीं।
श्रावण मास के दूसरे सेामवार को शनिवार को कांवड़ ले जाने वाले कांवडिय़े शिवालयों में गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करेंगे। हालांकि कांवडिय़ों की ज्यादा भीड़ नहीं थी,लेकिन छोटी छोटी टोलियां दिनभर निकलती रहीं। लहरा गंगाघाट पर कांवड़िए पूजा अर्चना के बाद कांवड़े सजाकर गंतव्य की ओर रवाना हो रहे थे।
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ज्यादातर कांवडिय़ा मुरैना क्षेत्र के थे। वहीं कछला गंगाघाट से बदायूं, बरेली की ओर जाने वाले कांवडियों ने कांवड़े भरीं। यहां डाक कांवड़ लेकर तमाम कांवड़िये रवाना हुए। गंगाघाट पर बम बम भोले के जयकारे व गंगा मईया के जयकारे सुनाई दे रहे थे। मुरैना के कांवड़िए राम चंद्र ने बताया कि वह सातवीं बार कांवड़ भरने आए हैं। भगवान भोले की कृपा से वह गंगा की धार तक खिचे चले आते हैं। कांवड़ उठाकर इतनी लंबी दूरी भोले की कृपा से ही तय हो पाती है। कांवड़ की टोलियों में महिलाओं की संख्या भी देखी गई। महिलाएं भी उत्साह के साथ भोले के जयकारे लगाते हुए कांवड़ लेकर आगे बड़ रहीं थीं।
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