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जब तक सूरज चंदा चमके तब तक ये हिंदुस्तान रहे
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जब तक सूरज चंदा चमके तब तक ये हिंदुस्तान रहे
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। एटा महोत्सव में मंगलवार रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाईं और श्रोताओं गुदगुदाया। हास्य व्यंग्य के साथ वीर रस की कविताओं खूब तालियां बटोरीं।
कवि सम्मेलन का उद्घाटन आगरा सांसद प्रो. रामशंकर कठेरिया, सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड, जलेसर विधायक संजीव दिवाकर, डीएम आईपी पांडेय, भूपेंद्र सिंह ने किया। लखनऊ से आईं कविता तिवारी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। गोरखपुर के कवि कलीम कैसर ने पढ़ा कि इस मकां में इक मकीं था, इश्क था, जब यहां कोई नहीं था। तू कहीं था मैं कहीं था। हास्य कवि प्रताप फौजदार ने पढ़ा कि सैनिकों को खुली छूट दे दो, आतंकी मार गिराने की, आतंकवाद न मिट जाएं तो मेरी मूंछ मुड़ा लेना, दूरबीन मैं हाथ में दे दूंगा तुम पाकिस्तान ढूंढ लेना।
लखनऊ की कविता तिवारी ने पढ़ा कि कविता चाहेगी धरती पर संस्कृतियों का सम्मान रहे, जब तक सूरज चंदा चमके, तब तक ये हिंदुस्तान रहे। के आए विनीत चौहान ने अपनी कविता से अटल बिहारी वाजपेयी को नमन किया। उन्होंने पढ़ा, तुम राजनीति में राजऋषि थे, राष्ट्रवाद के उन्नायक, तुम तानसेन की नगरी में भारत माता के सुर गायक।
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मधुवनी के हास्य कवि शंभू शिखर ने पढ़ा कि कुछ चोर कइयों की चोटी चुरा ले गए, बाबा थे न जाने कितनों की लंगोटी चुरा ले गए, जनता ने जब चुराने का मौका नहीं दिया, तो छोटे नेताजी बंगलों की टोंटी चुरा ले गए। इटावा के वीर रस के कवि गौरव चौहान ने पढ़ा, हिंदुस्तान जिंदा खड़ा है वीरों की कुर्बानी से। अतिथि कवि के रूप में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और एसडीएम महेंद्र सिंह तंवर ने भी काव्य पाठ किया। कवि सुरेश अवस्थी कानपुर, कमलेश शर्मा इटावा, डॉ. पूनम वर्मा मथुरा, गजेंद्र प्रियांशु बाराबंकी, शबाना शबनम उज्जैन, डॉ. शुभम त्यागी मेरठ ने भी रचनाएं सुनाईं। संयोजक राष्ट्रीय कवि पीके धुत्त ने भी काव्य पाठ किया। संरक्षक पंकज गुप्ता, सह संयोजक राघवेंद्र गुप्ता, सह संयोजक प्रशांत गुप्ता, विश्वनाथ गुप्ता, दिनेश चंद्र गुप्ता, बृजेश गुप्ता, विपिन शर्मा, गौरव दीक्षित, प्रदीप महाजन, रवेंद्र सोलंकी, युवराज सिंह, रजत गुप्ता, राहुल गुप्ता, राजीव गुप्ता, सुधा गुप्ता, सौरभ शर्मा समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
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कवि सम्मेलन का उद्घाटन आगरा सांसद प्रो. रामशंकर कठेरिया, सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड, जलेसर विधायक संजीव दिवाकर, डीएम आईपी पांडेय, भूपेंद्र सिंह ने किया। लखनऊ से आईं कविता तिवारी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। गोरखपुर के कवि कलीम कैसर ने पढ़ा कि इस मकां में इक मकीं था, इश्क था, जब यहां कोई नहीं था। तू कहीं था मैं कहीं था। हास्य कवि प्रताप फौजदार ने पढ़ा कि सैनिकों को खुली छूट दे दो, आतंकी मार गिराने की, आतंकवाद न मिट जाएं तो मेरी मूंछ मुड़ा लेना, दूरबीन मैं हाथ में दे दूंगा तुम पाकिस्तान ढूंढ लेना।
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लखनऊ की कविता तिवारी ने पढ़ा कि कविता चाहेगी धरती पर संस्कृतियों का सम्मान रहे, जब तक सूरज चंदा चमके, तब तक ये हिंदुस्तान रहे। के आए विनीत चौहान ने अपनी कविता से अटल बिहारी वाजपेयी को नमन किया। उन्होंने पढ़ा, तुम राजनीति में राजऋषि थे, राष्ट्रवाद के उन्नायक, तुम तानसेन की नगरी में भारत माता के सुर गायक।
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मधुवनी के हास्य कवि शंभू शिखर ने पढ़ा कि कुछ चोर कइयों की चोटी चुरा ले गए, बाबा थे न जाने कितनों की लंगोटी चुरा ले गए, जनता ने जब चुराने का मौका नहीं दिया, तो छोटे नेताजी बंगलों की टोंटी चुरा ले गए। इटावा के वीर रस के कवि गौरव चौहान ने पढ़ा, हिंदुस्तान जिंदा खड़ा है वीरों की कुर्बानी से। अतिथि कवि के रूप में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और एसडीएम महेंद्र सिंह तंवर ने भी काव्य पाठ किया। कवि सुरेश अवस्थी कानपुर, कमलेश शर्मा इटावा, डॉ. पूनम वर्मा मथुरा, गजेंद्र प्रियांशु बाराबंकी, शबाना शबनम उज्जैन, डॉ. शुभम त्यागी मेरठ ने भी रचनाएं सुनाईं। संयोजक राष्ट्रीय कवि पीके धुत्त ने भी काव्य पाठ किया। संरक्षक पंकज गुप्ता, सह संयोजक राघवेंद्र गुप्ता, सह संयोजक प्रशांत गुप्ता, विश्वनाथ गुप्ता, दिनेश चंद्र गुप्ता, बृजेश गुप्ता, विपिन शर्मा, गौरव दीक्षित, प्रदीप महाजन, रवेंद्र सोलंकी, युवराज सिंह, रजत गुप्ता, राहुल गुप्ता, राजीव गुप्ता, सुधा गुप्ता, सौरभ शर्मा समेत तमाम लोग मौजूद रहे।