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एटा डिपो की रोडवेज में बांटी जा रही फर्जी टिकट
Updated Wed, 18 Jul 2018 11:54 PM IST
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रोडवेज बस
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एटा। यात्रियों को सुरक्षित सफर कराने वाला उत्तर प्रदेश परिवहन निगम यात्रियों को ही चूना लगा रहा है। आलम यह है कि एटा डिपो में 168 बसें हैं, जिनमें हर रोज करीब बीस हजार यात्री सफर करते हैं। जिनमें परिचालक यात्रियों को फर्जी टिकट देकर निगम को प्रतिदिन हजारों रुपये का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। परिचालक अपनी जेबें भरने में लगे हुए हैं। वहीं चेकिंग टीमें महज खानापूर्ति कर रही हैं। साथ ही निगम के अधिकारी जानकारी होने के बाद भी शिकंजा नहीं कस पा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के एटा डिपो में परिचालकों की कारगुजारियों पर रोक लगाने की कवायद ठंडी पड़ी हुई है। परिचालक यात्रियों को फर्जी टिकट देकर लूट रहे हैं। एटा से फर्रुखाबाद रूट पर चलने वाली रोडवेज बसों में फर्जी टिकटों का खेल खूब चलता है। पहले तो यात्रियों को टिकट नहीं देकर किराए को परिचालक अपनी जेब में रख लेते हैं। जब विरोध करने पर यात्री टिकट लेने पर अड़ जाते हैं, तो उनको डुप्लीकेट टिकट पकड़ा दी जाती है। इस टिकट पर न तो डिपो का नाम होता है और न ही यात्रा करने वाले स्थान की दूरी का जिक्र होता है। इसके साथ ही टिकट पर किराए की रकम भी हाथ से अंकित की जाती है। ताकि यात्री को कोई शक नहीं हो।
पड़ताल में सामने आया कि 12 जुलाई को एक रोडवेज बस संख्या यूपी 76 के 8639 में यात्रियों को डुप्लीकेट टिकट दी गई। दरअसल, यह बस एटा डिपो से अनुबंधित है। यात्रा के दौरान बस में सारी सीटें भरी हुई थीं। साथ ही 10 सवारियों ने खड़े होकर यात्रा की। इन सवारियों में से अधिकांश को परिचालक ने डुप्लीकेट टिकट दी गई। जबकि कई सवारियों को टिकट नहीं दीछ और किराया वसूल कर अपनी जेब भर ली।
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पुराने मामलों पर भी डाला पर्दा
परिवहन निगम में आए दिन नए-नए मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन अफसर कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं। पिछले दिनों पीएल शीट पर बसों को दौड़ाया जाता रहा, जबकि बसें वर्कशॉप में ही खड़ी रहीं। मामला खुलने के बाद भी निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे पहले रोडवेज परिचालकों के व्हाट्स एप ग्रुप पर चेकिंग टीमों की सूचनाओं के आदान-प्रदान करने के मामले में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई।
पांच मशीनें खराब हो गई हैं। जिनको रिपेयरिंग के लिए भेजा गया है। इसके चलते यात्रियों को वे-बिल टिकट मुहैया कराई जा रही है। अगर किसी बस में यात्रियों को टिकट नहीं मिल रही है, तो यात्री शिकायत करें। तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
मदनलाल, एआरएम, एटा डिपो
कहते हैं आंकड़े
168 रोडवेज बसें हैं एटा डिपो में
125 बसें हैं परिवहन निगम की
43 बसें हैं अनुबंधित
20 हजार से ज्यादा यात्री करते हैं रोज यात्रा
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उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के एटा डिपो में परिचालकों की कारगुजारियों पर रोक लगाने की कवायद ठंडी पड़ी हुई है। परिचालक यात्रियों को फर्जी टिकट देकर लूट रहे हैं। एटा से फर्रुखाबाद रूट पर चलने वाली रोडवेज बसों में फर्जी टिकटों का खेल खूब चलता है। पहले तो यात्रियों को टिकट नहीं देकर किराए को परिचालक अपनी जेब में रख लेते हैं। जब विरोध करने पर यात्री टिकट लेने पर अड़ जाते हैं, तो उनको डुप्लीकेट टिकट पकड़ा दी जाती है। इस टिकट पर न तो डिपो का नाम होता है और न ही यात्रा करने वाले स्थान की दूरी का जिक्र होता है। इसके साथ ही टिकट पर किराए की रकम भी हाथ से अंकित की जाती है। ताकि यात्री को कोई शक नहीं हो।
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पड़ताल में सामने आया कि 12 जुलाई को एक रोडवेज बस संख्या यूपी 76 के 8639 में यात्रियों को डुप्लीकेट टिकट दी गई। दरअसल, यह बस एटा डिपो से अनुबंधित है। यात्रा के दौरान बस में सारी सीटें भरी हुई थीं। साथ ही 10 सवारियों ने खड़े होकर यात्रा की। इन सवारियों में से अधिकांश को परिचालक ने डुप्लीकेट टिकट दी गई। जबकि कई सवारियों को टिकट नहीं दीछ और किराया वसूल कर अपनी जेब भर ली।
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पुराने मामलों पर भी डाला पर्दा
परिवहन निगम में आए दिन नए-नए मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन अफसर कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं। पिछले दिनों पीएल शीट पर बसों को दौड़ाया जाता रहा, जबकि बसें वर्कशॉप में ही खड़ी रहीं। मामला खुलने के बाद भी निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे पहले रोडवेज परिचालकों के व्हाट्स एप ग्रुप पर चेकिंग टीमों की सूचनाओं के आदान-प्रदान करने के मामले में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई।
पांच मशीनें खराब हो गई हैं। जिनको रिपेयरिंग के लिए भेजा गया है। इसके चलते यात्रियों को वे-बिल टिकट मुहैया कराई जा रही है। अगर किसी बस में यात्रियों को टिकट नहीं मिल रही है, तो यात्री शिकायत करें। तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
मदनलाल, एआरएम, एटा डिपो
कहते हैं आंकड़े
168 रोडवेज बसें हैं एटा डिपो में
125 बसें हैं परिवहन निगम की
43 बसें हैं अनुबंधित
20 हजार से ज्यादा यात्री करते हैं रोज यात्रा