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हादसे में दवा व्यवसायी समेत परिवार के चार लोगों की मौत
Updated Tue, 12 Jun 2018 10:27 PM IST
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हादसे में दवा व्यवसायी समेत परिवार के चार लोगों की मौत
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। शिरडी में साईं बाबा के दर्शन कर लौट रहे शहर के पटियाली गेट निवासी दवा व्यापारी उनकी पत्नी, बेटा और बेटी की हादसे में सोमवार रात मौत हो गई। एक ही परिवार के चार लोगों की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचे एक साथ चार शव देखकर लोगों के दिल दहल गए।
शहर के मोहल्ला पटियाली गेट निवासी दवा व्यवसायी नवीन वार्ष्णेय पुत्र इंद्रपाल अपनी पत्नी प्रियंका वार्ष्णेय, बेटे संकल्प वार्ष्णेय एवं बेटी वंशिका वार्ष्णेय के साथ शिरडी स्थित साईं बाबा के दर्शन करने विगत सात जून को गए थे। 11 जून को आगरा से टैक्सी में सवार होकर वह घर लौट रहे थे।
फिरोजाबाद जिले के रजावली के समीप सामने से आ रहे ट्रक ने कार को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में नवीन, प्रियंका और उनकी बेटी वंशिका और चालक चंदा पुत्र पेंटर निवासी सिकंदराराऊ हाथरस की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उनके बेटे संकल्प की आगरा स्थित अस्पताल में उपचार के दौरान मंगलवार तड़के मौत हो गई। हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत की सूचना के बाद शहर और परिचितों में हड़कंप मच गया। हादसे में मरने वालों की याद करके परिजन बिलख रहे है। इधर, पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार शाम चारों शव पटियाली गेट स्थित आवास पर पहुंच गए। एक साथ चार शवों को देखकर लोगों के दिल दहल गए। हर आंख नम नजर आ रही थी।
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अंत्येष्टि में उमड़ा जनसैलाब
एटा। दवा के थोक व्यापारी नवीन वार्ष्णेय, उनकी पत्नी एवं बेटा, बेटी की हादसे में मौत के बाद मिली जानकारी पर अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसी मौके पर सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड, मारहरा विधायक वीरेंद्र सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष डा. दिनेश वशिष्ठ के साथ व्यापारी, मेडिकल विभाग के लोग भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
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सबसे अच्छा था मेरा भाइया
एटा। भाई, भाभी एवं भतीजे, भतीजी को अर्थी उठती देखकर बच्चो की बुआ का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था। वह बार-बार भाई को याद करती कह रही थी कि नवीन उनका सबसे अच्छा भाई था। भतीजे और भतीजी की याद कर बुआ काफी व्याकुल हो रही थी।
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भाई पर नहीं छोड़ूूगा बोझ
एटा। साईं शिरडी जाने से पहले नवीन वार्ष्णेय की कई व्यापारियों के साथ व्यापार को लेकर लेनदेन की बात हुई थी। इसमें एक व्यापारी से उन्होंने कहा था कि तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले वह अपने भाई प्रवीन पर कोई कारोबार का बोझ नहीं आने देंगे। हालांकि उन्हें क्या पता था कि भाई के कंधे का बोझ वह हमेशा के लिए खत्म करके चले जाएंगे। इन यादों को साझा करके भूतेश्वर पर व्यापारी नम आंखों से सोच में पडे़ थे।
शहर के मोहल्ला पटियाली गेट निवासी दवा व्यवसायी नवीन वार्ष्णेय पुत्र इंद्रपाल अपनी पत्नी प्रियंका वार्ष्णेय, बेटे संकल्प वार्ष्णेय एवं बेटी वंशिका वार्ष्णेय के साथ शिरडी स्थित साईं बाबा के दर्शन करने विगत सात जून को गए थे। 11 जून को आगरा से टैक्सी में सवार होकर वह घर लौट रहे थे।
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फिरोजाबाद जिले के रजावली के समीप सामने से आ रहे ट्रक ने कार को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में नवीन, प्रियंका और उनकी बेटी वंशिका और चालक चंदा पुत्र पेंटर निवासी सिकंदराराऊ हाथरस की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उनके बेटे संकल्प की आगरा स्थित अस्पताल में उपचार के दौरान मंगलवार तड़के मौत हो गई। हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत की सूचना के बाद शहर और परिचितों में हड़कंप मच गया। हादसे में मरने वालों की याद करके परिजन बिलख रहे है। इधर, पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार शाम चारों शव पटियाली गेट स्थित आवास पर पहुंच गए। एक साथ चार शवों को देखकर लोगों के दिल दहल गए। हर आंख नम नजर आ रही थी।
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अंत्येष्टि में उमड़ा जनसैलाब
एटा। दवा के थोक व्यापारी नवीन वार्ष्णेय, उनकी पत्नी एवं बेटा, बेटी की हादसे में मौत के बाद मिली जानकारी पर अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसी मौके पर सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड, मारहरा विधायक वीरेंद्र सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष डा. दिनेश वशिष्ठ के साथ व्यापारी, मेडिकल विभाग के लोग भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
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सबसे अच्छा था मेरा भाइया
एटा। भाई, भाभी एवं भतीजे, भतीजी को अर्थी उठती देखकर बच्चो की बुआ का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था। वह बार-बार भाई को याद करती कह रही थी कि नवीन उनका सबसे अच्छा भाई था। भतीजे और भतीजी की याद कर बुआ काफी व्याकुल हो रही थी।
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भाई पर नहीं छोड़ूूगा बोझ
एटा। साईं शिरडी जाने से पहले नवीन वार्ष्णेय की कई व्यापारियों के साथ व्यापार को लेकर लेनदेन की बात हुई थी। इसमें एक व्यापारी से उन्होंने कहा था कि तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले वह अपने भाई प्रवीन पर कोई कारोबार का बोझ नहीं आने देंगे। हालांकि उन्हें क्या पता था कि भाई के कंधे का बोझ वह हमेशा के लिए खत्म करके चले जाएंगे। इन यादों को साझा करके भूतेश्वर पर व्यापारी नम आंखों से सोच में पडे़ थे।