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धान की नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे मुफीद समय
Updated Sun, 03 Jun 2018 10:01 PM IST
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धान की फसल
- फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी। धान नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे अच्छा मौसम चल रहा है। इस समय नर्सरी तैयार करने से सही समय पर धान की रोपाई की जा सकेगी। इससे फसल में कम रोग लगने के साथ अच्छी पैदावार होगी।
जून के तीसरे सप्ताह में धान की रोपाई हो जाने से पैदावार भी ज्यादा होगी। किसान को अभी से ही धान की नर्सरी तैयार करनी होगी। इसके लिए अभी का समय मुफीद है। नर्सरी 20 से 25 दिन में तैयार हो जाएगी।
धान की पौध डालने से पहले खेत की मिट्टी का शोधन करें। इसके लिए ब्यूवेरिया बेसियाना एक किग्रा के साथ 30 किग्रा गोबर मिलाकर एक सप्ताह के लिए रख दें। एक सप्ताह के बाद इस मिश्रण को एक हेक्टेयर के हिसाब से पूरे खेत में फैला दें।
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धान की रोपाई के समय नाइट्रोजन 120 किग्रा, फास्फोरस 60 किग्रा और पोटाश 40 किग्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डालें। इसमें नाइट्रोजन को तीन चरण में प्रयोग करें। इस वक्त सरकारी बीज भंडारों पर सात से आठ प्रकार के बीज मौजूद हैं। इनमें बासमती से लेकर हाइब्रिड बीज तक उपलब्ध हैं।
मालवी सुगंधा बीज बनारस का बीज है, इसके चावल में सुगंध आने के साथ दाना भी पतला होता है। एक हेक्टेयर में 30 किग्रा के हिसाब से बोया जाता है। पैदावार चार कुंतल प्रति बीघा के हिसाब से होती है। पंत बासमती, पंतनगर का बीज है, यह बीज भी मालवी सुगंधा की तरह का बीज है। पूषा बासमती (509), यह भी बासमती चावल की प्रजाति है।
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जून के तीसरे सप्ताह में धान की रोपाई हो जाने से पैदावार भी ज्यादा होगी। किसान को अभी से ही धान की नर्सरी तैयार करनी होगी। इसके लिए अभी का समय मुफीद है। नर्सरी 20 से 25 दिन में तैयार हो जाएगी।
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धान की पौध डालने से पहले खेत की मिट्टी का शोधन करें। इसके लिए ब्यूवेरिया बेसियाना एक किग्रा के साथ 30 किग्रा गोबर मिलाकर एक सप्ताह के लिए रख दें। एक सप्ताह के बाद इस मिश्रण को एक हेक्टेयर के हिसाब से पूरे खेत में फैला दें।
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धान की रोपाई के समय नाइट्रोजन 120 किग्रा, फास्फोरस 60 किग्रा और पोटाश 40 किग्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डालें। इसमें नाइट्रोजन को तीन चरण में प्रयोग करें। इस वक्त सरकारी बीज भंडारों पर सात से आठ प्रकार के बीज मौजूद हैं। इनमें बासमती से लेकर हाइब्रिड बीज तक उपलब्ध हैं।
मालवी सुगंधा बीज बनारस का बीज है, इसके चावल में सुगंध आने के साथ दाना भी पतला होता है। एक हेक्टेयर में 30 किग्रा के हिसाब से बोया जाता है। पैदावार चार कुंतल प्रति बीघा के हिसाब से होती है। पंत बासमती, पंतनगर का बीज है, यह बीज भी मालवी सुगंधा की तरह का बीज है। पूषा बासमती (509), यह भी बासमती चावल की प्रजाति है।