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250 वर्ष पुराना है मां भागरीरथी मंदिर
Updated Sun, 03 Sep 2017 11:45 PM IST
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सोरों। सूकर क्षेत्र में हरिपदी के पवित्र जल कुंड के बीच में स्थित मां भागीरथी का मंदिर श्रद्धालुुओं की अगाध श्रद्धा का केंद्र है। ढाई सौ वर्ष पूर्व मां भागीरथी के भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। जल के बीच स्थित यह मंदिर भक्ति का अलग ही आनंद प्रदान करता है। मंदिर के चारों ओर बने घाटों पर श्रद्धालु स्नान करते हैं और पूजा पाठ करते हैं। इस मंदिर को तेलीय जाति वाला मंदिर भी बोला जाता है।
यह तीर्थ गंगा के अवतरण के समय से माना जाता है। माना जाता है कि भागीरथ ने सूकर क्षेत्र में ही गंगा के अवतरण के लिए तपस्या की थी। यही कारण है कि यहां आज भी हर घर में गंगा की पूजा होती है। पूरे दिन श्रद्धालु हरिपदी की परिक्रमा कर घाटों पर बने मंदिरों के दर्शन करते हैं और मनोकामना पूर्ण करने के लिए भागीरथी मंदिर की भी परिक्रमा करते हैं। ढाई सौ वर्ष पूर्व मंदिर का निर्माण कराया गया था।
वहीं इसका जीर्णोद्धार वर्ष 1989 में कासगंज के घमंडी लाल ने कराया। बताया जाता है घमंडी लाल के पूर्वजों ने ही इस मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर के चारों और घाट भी बनाए गए हैं। मंदिर में प्रतिदिन गंगा लहरी का पाठ कर भागीरथी मां गंगा का स्मरण किया जाता है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि पुत्र रत्न की कामना लेकर आने वाले दंपति को यहां दर्शन के बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। शाम के समय मां गंगा की आरती का दृश्य यहां दर्शनीय होता है। श्रद्धालु यहां दीपदान भी करते हैं। इस मंदिर के निर्माण के बाद सेवायत का कार्य पंडित प्यारे लाल करते थे।
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अब उनके धेवते पंडित कालीचरन माफीदार मंदिर की देखरेख और पूजा अर्चना का काम करते हैं। गंगा सप्तमी के दिन मंदिर पर विशेष पूजा अनुष्ठान के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। मेला मार्गशीर्ष का शुभारंभ भी मां गंगा की विशेष पूजा अर्चना के साथ इसी मंदिर से किया जाता है।
- प्राचीन समय से ही गंगा पूजन और भगवान वराह के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सूकर क्षेत्र के गंगा तीर्थ में आने का सिलसिला जारी है। लोग गंगा स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। सरकार को गंगा तीर्थ के विकास के लिए कार्य करना चाहिए। तीर्थ पर्यटन के मानचित्र में यह स्थान शामिल होना चाहिए। पंडित कालीचरन माफीदार, सेवायत भागीरथी मंदिर
- हमारे यहां परंपरा है कि मृतक परिवारीजनों की अस्थियां सूकर क्षेत्र में ही विसर्जित की जाती है। यह स्थान बहुत पवित्र है और यहां का विकास प्राथमिकता के साथ होना चाहिए। सरकारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
- प्रवीन पांचाल श्रद्धालु,बीजगढ़,दौसा,राजस्थान
- इस आदितीर्थ की अनदेखी से पौराणिक विरासतों का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। इससे उनका क्षरण हो रहा है। सरकार को यहां की पौराणिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। इसके साथ ही विकास के लिए सूकर क्षेत्र को तीर्थनगरी घोषित किया जाए। विक्की निर्भय, संयोजक युवा एकता संगठन
- सोरों तीर्थ कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। भगवान वराह के प्राकट्य के बाद इस भूमि पर अनगिनत संत महात्माओं का आगमन हुआ। राजा महाराजा भी यहां आए। ऐसे तीर्थ की उपेक्षा उचित नहीं। सरकार तत्काल इसके विकास पर ध्यान दे। दिलीप दीक्षित
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यह तीर्थ गंगा के अवतरण के समय से माना जाता है। माना जाता है कि भागीरथ ने सूकर क्षेत्र में ही गंगा के अवतरण के लिए तपस्या की थी। यही कारण है कि यहां आज भी हर घर में गंगा की पूजा होती है। पूरे दिन श्रद्धालु हरिपदी की परिक्रमा कर घाटों पर बने मंदिरों के दर्शन करते हैं और मनोकामना पूर्ण करने के लिए भागीरथी मंदिर की भी परिक्रमा करते हैं। ढाई सौ वर्ष पूर्व मंदिर का निर्माण कराया गया था।
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वहीं इसका जीर्णोद्धार वर्ष 1989 में कासगंज के घमंडी लाल ने कराया। बताया जाता है घमंडी लाल के पूर्वजों ने ही इस मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर के चारों और घाट भी बनाए गए हैं। मंदिर में प्रतिदिन गंगा लहरी का पाठ कर भागीरथी मां गंगा का स्मरण किया जाता है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि पुत्र रत्न की कामना लेकर आने वाले दंपति को यहां दर्शन के बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। शाम के समय मां गंगा की आरती का दृश्य यहां दर्शनीय होता है। श्रद्धालु यहां दीपदान भी करते हैं। इस मंदिर के निर्माण के बाद सेवायत का कार्य पंडित प्यारे लाल करते थे।
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अब उनके धेवते पंडित कालीचरन माफीदार मंदिर की देखरेख और पूजा अर्चना का काम करते हैं। गंगा सप्तमी के दिन मंदिर पर विशेष पूजा अनुष्ठान के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। मेला मार्गशीर्ष का शुभारंभ भी मां गंगा की विशेष पूजा अर्चना के साथ इसी मंदिर से किया जाता है।
- प्राचीन समय से ही गंगा पूजन और भगवान वराह के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सूकर क्षेत्र के गंगा तीर्थ में आने का सिलसिला जारी है। लोग गंगा स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। सरकार को गंगा तीर्थ के विकास के लिए कार्य करना चाहिए। तीर्थ पर्यटन के मानचित्र में यह स्थान शामिल होना चाहिए। पंडित कालीचरन माफीदार, सेवायत भागीरथी मंदिर
- हमारे यहां परंपरा है कि मृतक परिवारीजनों की अस्थियां सूकर क्षेत्र में ही विसर्जित की जाती है। यह स्थान बहुत पवित्र है और यहां का विकास प्राथमिकता के साथ होना चाहिए। सरकारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
- प्रवीन पांचाल श्रद्धालु,बीजगढ़,दौसा,राजस्थान
- इस आदितीर्थ की अनदेखी से पौराणिक विरासतों का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। इससे उनका क्षरण हो रहा है। सरकार को यहां की पौराणिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। इसके साथ ही विकास के लिए सूकर क्षेत्र को तीर्थनगरी घोषित किया जाए। विक्की निर्भय, संयोजक युवा एकता संगठन
- सोरों तीर्थ कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। भगवान वराह के प्राकट्य के बाद इस भूमि पर अनगिनत संत महात्माओं का आगमन हुआ। राजा महाराजा भी यहां आए। ऐसे तीर्थ की उपेक्षा उचित नहीं। सरकार तत्काल इसके विकास पर ध्यान दे। दिलीप दीक्षित