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फैसले को लेकर पुलिस-प्रशासन सतर्क, कड़ी सुरक्षा
Updated Mon, 28 Aug 2017 11:29 PM IST
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फैसले को लेकर पुलिस-प्रशासन सतर्क, कड़ी सुरक्षा
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। बाबा राम रहीम के खिलार्फ कोर्ट फैसला आने के बाद जगह-जगह पुलिस बल तैनात दिखा। हालांकि बाबा को मिली दस वर्ष की सजा से कलक्ट्रेट बार अधिवक्ता खुश नहीं दिखे। लोगों का कहना है बाबा को कठोर से कठोर सजा सुनाई जानी चाहिए थी। बाबा के अनुयाई सजा अधिक बता रहे थे।
सोमवार सुबह से ही लोग अपने अपने घरों के अलावा बाजारों में बाबा राम रहीम के खिलाफ आने वाले कोर्ट के फैसले को लेकर टीवी स्क्रीन के बैठे थे। हर कोई न्यायालय द्वारा रेप के दोषी बाबा राम रहीम को मिलने वाली सजा को उत्सुक दिखाई दे रहा था। हर कोई यह जानने को परेशान था कि यायालय बाबा को कितने साल की सजा सुनाता है। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे न्यायालय ने बाबा को दस हजार के अर्थदंड के साथ दस वर्ष कारावास की सजा सुनाई तो लोग मायूस हो गए। लोगों का कहना था कि बाबा को कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए थी।
-बाबा राम रहीम पर जिस तरह का अपराध सिद्व हुआ है। उस हिसाब से आजीवन कारावास की सजा होनी चाहिए थी। साथ ही बाबा की संपत्ति को सरकार अपने कब्जे में करने के लिए न्यायालय को आदेश देना चाहिए था।
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रामेश्वर प्रसाद पचौरी, अध्यक्ष - कलक्ट्रेट बार
- बाबा राम रहीम को कठोर से कठोर सजा सुनाई जानी चाहिए थी। हम न्यायालय का सम्मान करते हैं। मगर जो फैसला सुनाया गया है, उससे हम खुश नहीं है।
विनोद कुमार, अधिवक्ता
- देवता समान हमारे बाबा को गलत तरीके से फंसाया गया है। फैसले में बाबा को जो सजा सुनाई गई वो बहुत ज्यादा है। न्यायालय के फैसले से हम आहत हैं।
मुकेश कुमार, अनुयायी - बाबा राम रहीम
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सोमवार सुबह से ही लोग अपने अपने घरों के अलावा बाजारों में बाबा राम रहीम के खिलाफ आने वाले कोर्ट के फैसले को लेकर टीवी स्क्रीन के बैठे थे। हर कोई न्यायालय द्वारा रेप के दोषी बाबा राम रहीम को मिलने वाली सजा को उत्सुक दिखाई दे रहा था। हर कोई यह जानने को परेशान था कि यायालय बाबा को कितने साल की सजा सुनाता है। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे न्यायालय ने बाबा को दस हजार के अर्थदंड के साथ दस वर्ष कारावास की सजा सुनाई तो लोग मायूस हो गए। लोगों का कहना था कि बाबा को कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए थी।
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-बाबा राम रहीम पर जिस तरह का अपराध सिद्व हुआ है। उस हिसाब से आजीवन कारावास की सजा होनी चाहिए थी। साथ ही बाबा की संपत्ति को सरकार अपने कब्जे में करने के लिए न्यायालय को आदेश देना चाहिए था।
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रामेश्वर प्रसाद पचौरी, अध्यक्ष - कलक्ट्रेट बार
- बाबा राम रहीम को कठोर से कठोर सजा सुनाई जानी चाहिए थी। हम न्यायालय का सम्मान करते हैं। मगर जो फैसला सुनाया गया है, उससे हम खुश नहीं है।
विनोद कुमार, अधिवक्ता
- देवता समान हमारे बाबा को गलत तरीके से फंसाया गया है। फैसले में बाबा को जो सजा सुनाई गई वो बहुत ज्यादा है। न्यायालय के फैसले से हम आहत हैं।
मुकेश कुमार, अनुयायी - बाबा राम रहीम