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फाइलों में ही कैद होकर रह गई दूध की रिसाइकलिंग
Updated Wed, 12 Jul 2017 11:42 PM IST
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demo
- फोटो : demo
मथुरा। गोवर्धन में गिरिराज शिला पर चढ़ने वाला दूध नालियों में बह कर बर्बाद न हो इसके लिए इस दूध की रिसाइकलिंग का प्लॉन तैयार किया गया था। लेकिन, ये योजना फाइलों में ही कैद होकर रह गई है। उधर, सावन में शिला पर चढ़ने वाला दूध नालियाें में बहकर दुर्गंध पैदा कर रहा है।
खाद्य विभाग की टीम ने गोवर्धन में दानघाटी, मानसी गंगा व मुखारबिंद में चढ़ने वाले दूध को टैंकों में इकठ्ठा कर उसको शोधित करने की योजना तैयार की थी। करीब एक साल पहले नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट करनाल (एनडीआरआई) के विशेषज्ञों की टीम निरीक्षण कर प्रशासनिक अफसरों से बैठक भी कर चुकी है।
इस प्रोजेक्ट का खाका तैयार कर विकास प्राधिकरण को सौंपा गया था। लेकिन एक साल गुजरने के बाद भी फाइल से धूल नहीं उठ सकी है। खाद्य विभाग के जिला अभिहीत अधिकारी चंदन पांडेय ने बताया कि हमने योजना का बेसिक प्रारूप तैयार कर विकास प्राधिकरण को सौंप दिया था।
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फैक्ट फाइल...
-सावन में हजारों लीटर दूध शिवलिंग पर चढ़ने के बाद नालियों में जा रहा।
-एनडीआरआई करनाल की टीम कर चुकी है तीनों स्थानों का निरीक्षण।
-इस शोधित दूध को पुन: पशुओं के उपयोग में लाने के लिये की जा रही है मशक्कत
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खाद्य विभाग की टीम ने गोवर्धन में दानघाटी, मानसी गंगा व मुखारबिंद में चढ़ने वाले दूध को टैंकों में इकठ्ठा कर उसको शोधित करने की योजना तैयार की थी। करीब एक साल पहले नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट करनाल (एनडीआरआई) के विशेषज्ञों की टीम निरीक्षण कर प्रशासनिक अफसरों से बैठक भी कर चुकी है।
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इस प्रोजेक्ट का खाका तैयार कर विकास प्राधिकरण को सौंपा गया था। लेकिन एक साल गुजरने के बाद भी फाइल से धूल नहीं उठ सकी है। खाद्य विभाग के जिला अभिहीत अधिकारी चंदन पांडेय ने बताया कि हमने योजना का बेसिक प्रारूप तैयार कर विकास प्राधिकरण को सौंप दिया था।
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फैक्ट फाइल...
-सावन में हजारों लीटर दूध शिवलिंग पर चढ़ने के बाद नालियों में जा रहा।
-एनडीआरआई करनाल की टीम कर चुकी है तीनों स्थानों का निरीक्षण।
-इस शोधित दूध को पुन: पशुओं के उपयोग में लाने के लिये की जा रही है मशक्कत