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जय-जय शिवशंकर, रास्ते में हैं कांटे और कंकड़
Updated Sat, 08 Jul 2017 10:57 PM IST
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मार्ग काफी जर्जर हालत में हैं
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एटा। हाथ में कलश और पूजा की थाली, नंगे पांव और मन में श्रद्धा लिए भक्त भोले भंडारी के दर्शन को बढ़ते जाते हैं। नंगे पांव में कंकड़ और कांटे चुभते हैं, फिर भी आस्था डगमगाती नहीं है, लेकिन अव्यवस्थाएं मन को खिन्न जरूर कर देती हैं। घर से साफ मन लेकर भक्त मंदिर पहुंचते हैं, लेकिन जब भगवान के दरबार के आसपास ही कूड़े के ढेर और गंदगी से सामना होता है, तो भी मन विचलित होता है।
शहर के सबसे प्राचीन कैलाश मंदिर के आसपास कूड़ा, कचरा भरा है। सोमवार से शिव पूजा का सावन मास शुरू हो रहा है। पर, श्रद्धालुओं की समस्या को दूर करने के लिए प्रशासन बेफिक्र बना है। जबकि सावन के पूरे एक महीने शिव के इस प्राचीन मंदिर में जलाभिषेक को भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। पर, मंदिर से कुछ दूर नाली का जाल टूटने से पानी सड़क पर बह रहा है। कंकड़ और पत्थर श्रद्धालुओं को चुभेंगे।
मार्ग पर गड्ढों का आलम यह है कि दर्शनार्थियों के पास से निकलने वाले वाहन धूल उड़ाते हैं। बारिश में जल भराव होने से श्रद्धालुओं के कपड़े तक खराब हो जाते हैं। मंदिर के आसपास कूड़े के ढेर हैं। हालांकि यहां रोज झाड़ू लगती है, लेकिन कूड़ादान नहीं होने से सड़क पर गंदगी फेंक दी जाती है। मंदिर के पास अतिक्रमण से भी श्रद्धालु परेशान हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि पालिका और प्रशासन को मंदिर के आसपास व्यवस्थाओं को सुधार की पहल करनी चाहिए। वहीं परसोन स्थित शिव मंदिर के पास भी कुछ ऐसा ही आलम है। प्राचीन शिव मंदिर पर श्रावण मास के सोमवार और महाशिवरात्रि में मेला लगता है।
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मनोकामना पूर्ण करने वाला है कैलाश मंदिर
डेढ़ सौ साल पुराना कैलाश महादेव मंदिर जिले का सबसे ऊंचा शिवालय है। 190 फुट ऊंचे शिखर वाले मंदिर का गर्भगृह सौ फीट ऊंचा ही नहीं ठोस है। मान्यता है कि तत्कालीन राजा राय बहादुर दिलसुख राव ने राज्य की खुशहाली एवं प्रजा को कष्ट से दूर रखने के लिए 1924 में मंदिर का निर्माण कराया था। श्रेष्ठ पंडितों एवं ज्योतिषी सलाह पर भगवान शिव की चौमुखी प्रतिमा की परंपरागत तरीके से लंबे अनुष्ठानों के बाद प्राण प्रतिष्ठा कराई गई थी। किवंदती के अनुसार चौमुखी शिवलिंग कवच बनकर चारों दिशाओं से भक्तों की रक्षा करता है।
बूढ़े पांवों में भी आ जाती है ताकत
नीचे से मंदिर की ऊंचाई देख कर डरने वाले शिथिल बूढ़े पांव भी भगवान भोले की शरण में दस्तक देना नहीं भूलते। मंदिर के महंत धीरेंद्र झा कहते हैं कि सैकड़ों भक्त जहां प्रतिदिन पूजा अर्चना करने आते हैं, वहीं सोमवार को भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। श्रावण माह में यहां भारी संख्या में लोग जलाभिषेक कर मनौती मांगते हैं। श्रावण माह में रुद्राभिषेक, ग्रहों की शांति, काल सर्पयोग एवं महामृत्युंजय जाप करवाने वालों की लंबी लाइन रहती है।
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शहर के सबसे प्राचीन कैलाश मंदिर के आसपास कूड़ा, कचरा भरा है। सोमवार से शिव पूजा का सावन मास शुरू हो रहा है। पर, श्रद्धालुओं की समस्या को दूर करने के लिए प्रशासन बेफिक्र बना है। जबकि सावन के पूरे एक महीने शिव के इस प्राचीन मंदिर में जलाभिषेक को भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। पर, मंदिर से कुछ दूर नाली का जाल टूटने से पानी सड़क पर बह रहा है। कंकड़ और पत्थर श्रद्धालुओं को चुभेंगे।
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मार्ग पर गड्ढों का आलम यह है कि दर्शनार्थियों के पास से निकलने वाले वाहन धूल उड़ाते हैं। बारिश में जल भराव होने से श्रद्धालुओं के कपड़े तक खराब हो जाते हैं। मंदिर के आसपास कूड़े के ढेर हैं। हालांकि यहां रोज झाड़ू लगती है, लेकिन कूड़ादान नहीं होने से सड़क पर गंदगी फेंक दी जाती है। मंदिर के पास अतिक्रमण से भी श्रद्धालु परेशान हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि पालिका और प्रशासन को मंदिर के आसपास व्यवस्थाओं को सुधार की पहल करनी चाहिए। वहीं परसोन स्थित शिव मंदिर के पास भी कुछ ऐसा ही आलम है। प्राचीन शिव मंदिर पर श्रावण मास के सोमवार और महाशिवरात्रि में मेला लगता है।
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मनोकामना पूर्ण करने वाला है कैलाश मंदिर
डेढ़ सौ साल पुराना कैलाश महादेव मंदिर जिले का सबसे ऊंचा शिवालय है। 190 फुट ऊंचे शिखर वाले मंदिर का गर्भगृह सौ फीट ऊंचा ही नहीं ठोस है। मान्यता है कि तत्कालीन राजा राय बहादुर दिलसुख राव ने राज्य की खुशहाली एवं प्रजा को कष्ट से दूर रखने के लिए 1924 में मंदिर का निर्माण कराया था। श्रेष्ठ पंडितों एवं ज्योतिषी सलाह पर भगवान शिव की चौमुखी प्रतिमा की परंपरागत तरीके से लंबे अनुष्ठानों के बाद प्राण प्रतिष्ठा कराई गई थी। किवंदती के अनुसार चौमुखी शिवलिंग कवच बनकर चारों दिशाओं से भक्तों की रक्षा करता है।
बूढ़े पांवों में भी आ जाती है ताकत
नीचे से मंदिर की ऊंचाई देख कर डरने वाले शिथिल बूढ़े पांव भी भगवान भोले की शरण में दस्तक देना नहीं भूलते। मंदिर के महंत धीरेंद्र झा कहते हैं कि सैकड़ों भक्त जहां प्रतिदिन पूजा अर्चना करने आते हैं, वहीं सोमवार को भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। श्रावण माह में यहां भारी संख्या में लोग जलाभिषेक कर मनौती मांगते हैं। श्रावण माह में रुद्राभिषेक, ग्रहों की शांति, काल सर्पयोग एवं महामृत्युंजय जाप करवाने वालों की लंबी लाइन रहती है।