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दोषियों पर नहीं आई आंच, दफन हुई जांच
Updated Thu, 29 Nov 2018 10:15 PM IST
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हाल-ए-ओडीएफ: न सीट और न ही छत
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की जिले में धज्जियां उड़ती रहीं। जिले में बड़े पैमाने पर शौचालय निर्माण में गोलमाल किया गया। मामलों की पोल खुलने के बाद जांच की बात कही गई, लेकिन हर बार जांच को दफन कर दिया गया। इससे दोषी साफ बच निकले। इसके अलावा शौचालय निर्माण के नाम पर हुए खेल को रोकने में जिला प्रशासन भी नाकाम रहा।
प्रशासन ने 30 अक्तूबर को जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया और इस ओडीएफ की घोषणा के साथ शौचालय निर्माण में हुई लीपापोती को भी दबा दिया गया। जांच के नाम पर न तो लाभार्थियों को इंसाफ मिल सका और न दोषियों को सजा। दरअसल, जिले में शौचालय निर्माण अधिकतर कागजों पर हुआ है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत कागजों पर शौचालयों निर्माण कर दिया गया था। साथ ही डीएम ने सूचना के आधार पर विकास भवन के स्वच्छ भारत मिशन वार रूम में डाटा शिफ्टिंग का खेल पकड़ा था। जिसमें डीएम ने जांच एसडीएम और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर को सौंपते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। मामले में एक कंप्यूटर आपरेटर की सेवा समाप्ति कर दी गई थी, लेकिन अन्य दोषियों को प्रशासन ने बचा लिया। मामले में अधिकारियों की शह पर काम कराए जाने की पुष्टि भी हुई थी, लेकिन फिर भी कार्रवाई अधर में लटकी हुई है। इसके अलावा तमाम ग्राम पंचायतों में मंडलीय सत्यापन में खुली शौचालय निर्माण की पोल के बाद भी अब तक कार्रवाई ठंडे बस्ते में है।
प्रधान और सचिवों ने किया खेल
शौचालय निर्माण में बड़ा खेल प्रधान और सचिव ने किया है। जिले के अलीगंज ब्लॉक के गांव तुंगई में मंडलीय टीम ने 117 शौचालयों का निर्माण कागजों पर पाया था, लेकिन मामले में आज तक प्रधान और सचिव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।
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नोटिस देने तक सिमटी कार्रवाई
जिले में 576 ग्राम पंचायतों में से अधिकतर में शौचालय निर्माण के नाम पर हुए घोटालों में पोल खुलने के बाद महज नोटिस जारी कर कोरम पूरा कर दिया गया। मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
कहते हैं आंकड़े
576 ग्राम पंचायते हैं जिले में
853 राजस्व गांव हैं जिले में
782 गांव हो चुके हैं ओडीएफ
73 गांवों में अब भी चल रहा काम
वर्जन
शौचालय निर्माण मामलों की जांच तेजी से चल रही है। जल्द ही जिन गांव में शौचालय निर्माण में अनियमितता मिली है। उनकी सूची तैयार कर कार्रवाई की जाएगी।
आईपी पांडेय, जिलाधिकारी
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प्रशासन ने 30 अक्तूबर को जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया और इस ओडीएफ की घोषणा के साथ शौचालय निर्माण में हुई लीपापोती को भी दबा दिया गया। जांच के नाम पर न तो लाभार्थियों को इंसाफ मिल सका और न दोषियों को सजा। दरअसल, जिले में शौचालय निर्माण अधिकतर कागजों पर हुआ है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत कागजों पर शौचालयों निर्माण कर दिया गया था। साथ ही डीएम ने सूचना के आधार पर विकास भवन के स्वच्छ भारत मिशन वार रूम में डाटा शिफ्टिंग का खेल पकड़ा था। जिसमें डीएम ने जांच एसडीएम और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर को सौंपते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। मामले में एक कंप्यूटर आपरेटर की सेवा समाप्ति कर दी गई थी, लेकिन अन्य दोषियों को प्रशासन ने बचा लिया। मामले में अधिकारियों की शह पर काम कराए जाने की पुष्टि भी हुई थी, लेकिन फिर भी कार्रवाई अधर में लटकी हुई है। इसके अलावा तमाम ग्राम पंचायतों में मंडलीय सत्यापन में खुली शौचालय निर्माण की पोल के बाद भी अब तक कार्रवाई ठंडे बस्ते में है।
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प्रधान और सचिवों ने किया खेल
शौचालय निर्माण में बड़ा खेल प्रधान और सचिव ने किया है। जिले के अलीगंज ब्लॉक के गांव तुंगई में मंडलीय टीम ने 117 शौचालयों का निर्माण कागजों पर पाया था, लेकिन मामले में आज तक प्रधान और सचिव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।
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नोटिस देने तक सिमटी कार्रवाई
जिले में 576 ग्राम पंचायतों में से अधिकतर में शौचालय निर्माण के नाम पर हुए घोटालों में पोल खुलने के बाद महज नोटिस जारी कर कोरम पूरा कर दिया गया। मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
कहते हैं आंकड़े
576 ग्राम पंचायते हैं जिले में
853 राजस्व गांव हैं जिले में
782 गांव हो चुके हैं ओडीएफ
73 गांवों में अब भी चल रहा काम
वर्जन
शौचालय निर्माण मामलों की जांच तेजी से चल रही है। जल्द ही जिन गांव में शौचालय निर्माण में अनियमितता मिली है। उनकी सूची तैयार कर कार्रवाई की जाएगी।
आईपी पांडेय, जिलाधिकारी