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एक हजार बंदियों की सुरक्षा 27 सिपाहियों के सहारे
Updated Mon, 09 Jul 2018 10:55 PM IST
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एक हजार बंदियों की सुरक्षा 27 सिपाहियों के सहारे
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। जिला कारागार में निरुद्ध एक हजार बंदियों की सुरक्षा महज 27 जेल पुलिस सिपाहियों के चल रही है। मानक से आधी संख्या में भी जिला कारागार में पुलिस कर्मियों की तैनाती नहीं है। स्टाफ को बढ़ाने की मांग के बाद भी शासन स्तर से कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इसे लेकर जेल अधिकारियों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
आईएसओ प्रमाणित रही जिला जेल को मौजूद समय में संसाधन और स्टाफ का टोटा है। जिला कारागार में क्षमता से डेढ़ गुने बंदियों के निरुद्ध होने के बाद भी स्टाफ को मानक के अनुरूप तैनात नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर जेल में बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारी चिंता में पड़े हुए है। जेलर कुलदीप सिंह भदौरिया ने बताया कि जिला कारागार में सिपाहियों की मानक अनुरूप 108 संख्या तैनाती है। इसके सापेक्ष में केवल 27 सिपाही ही जिला जेल में तैनात है। जबकि महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती की संख्या आठ है। इसे लेकर केवल एक महिला सिपाही ही तैनात है। जबकि जिला कारागार में 27 महिला बंदी भी सजा काट रही है। इसके साथ ही जिला कारागार में कोई भी महिला हैड पुलिस कर्मी भी नहीं है। इस तरह से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला जेल में बंद कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए शासन स्तर से किस तरह के इंतजाम किए गए है। स्टाफ की कमी होने को लेकर जेल अधिकारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आंकड़ों पर नजर
650 बंदियों की एटा जेल की है क्षमता
979 बंदी वर्तमान में है जेल के अंदर
108 सिपाहियों के हैं पद
27 सिपाही है जेल में तैनात
156 जेल में बंद है सजायाफ्ता
27 महिला कैदी है एटा जेल में
01 महिला सिपाही की है तैनाती
पेशी पर लाते समय भी बरती जाती है लापरवाही
एटा। जिला कारागार से कोर्ट तक पेशी पर लाने ले जाने वाले बंदियों के साथ भी सुरक्षा को लेकर पुलिस गंभीर नहीं होती नजर आ रही है। देखा जाता है कि संगीन मामले में निरुद्ध बंदी को लाने और ले जाने के लिए एक सिपाही और होमगार्ड को तैनात किया जाता है। जबकि पिछले दिनों एक बंदी ने सिपाही की आंखों में मिर्ची पाउडर डालकर भागने का प्रयास किया था। इससे पहले भी बंदी पुलिस कर्मियों को चकमा देकर फरार भी हो चुके है। जेल से आने वाले बंदियों के वाहनों पर भी सुरक्षा व्यवस्था काफी कमजोर तरह की जाती है। वाहन पर भी दो या तीन पुलिस कर्मियों को दर्जनों बंदियों की पेशी कराने के लिए भेजा जाता है।
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कोर्ट परिसर में बढ़ी सुरक्षा
एटा। बागपत जिला कारागार में हुई बंदी की हत्या के बाद जारी हुए अलर्ट को लेकर जिला कारागार में जेलर कुलदीप सिंह भदौरियों ने स्टाफ के साथ मिलकर बंदियों और बैरक की चेकिंग कराई। वही दूसरी तरफ कोर्ट में आने जाने वाले लोगों की भी गेट पर सघन चेकिंग कराई गई। इस तरह से अलर्ट जारी होने के बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौकसी बरती।
खुलेआम बंदी ले जाते हैं खाने पीने का सामान
पेशी पर आने वाले बंदियों को परिजन खुलेआम खाने पीने का सामान दे जाते हैं। जिसे बंदी अपने साथ जेल में ले जाते हैं। यह सब पुलिसकर्मियों की आंखों के सामने होता है।
गाड़ी आते ही लग जाता है जमघट
जैसे ही बंदियों की गाड़ी जिला न्यायालय पर आकर रुकती है। वैसे ही बंदियों के परिजनों का जमघट लग जाता है। ऐसे में कौन किससे क्या बात कर रहा है। इसको लेकर भी पुलिसकर्मी गंभीर नहीं है। ऐसे में बहुत से बंदी अपने साथ परिजन दिया हुआ सामान लेकर सीधे जेल में प्रवेश कर जाते हैं।
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आईएसओ प्रमाणित रही जिला जेल को मौजूद समय में संसाधन और स्टाफ का टोटा है। जिला कारागार में क्षमता से डेढ़ गुने बंदियों के निरुद्ध होने के बाद भी स्टाफ को मानक के अनुरूप तैनात नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर जेल में बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारी चिंता में पड़े हुए है। जेलर कुलदीप सिंह भदौरिया ने बताया कि जिला कारागार में सिपाहियों की मानक अनुरूप 108 संख्या तैनाती है। इसके सापेक्ष में केवल 27 सिपाही ही जिला जेल में तैनात है। जबकि महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती की संख्या आठ है। इसे लेकर केवल एक महिला सिपाही ही तैनात है। जबकि जिला कारागार में 27 महिला बंदी भी सजा काट रही है। इसके साथ ही जिला कारागार में कोई भी महिला हैड पुलिस कर्मी भी नहीं है। इस तरह से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला जेल में बंद कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए शासन स्तर से किस तरह के इंतजाम किए गए है। स्टाफ की कमी होने को लेकर जेल अधिकारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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आंकड़ों पर नजर
650 बंदियों की एटा जेल की है क्षमता
979 बंदी वर्तमान में है जेल के अंदर
108 सिपाहियों के हैं पद
27 सिपाही है जेल में तैनात
156 जेल में बंद है सजायाफ्ता
27 महिला कैदी है एटा जेल में
01 महिला सिपाही की है तैनाती
पेशी पर लाते समय भी बरती जाती है लापरवाही
एटा। जिला कारागार से कोर्ट तक पेशी पर लाने ले जाने वाले बंदियों के साथ भी सुरक्षा को लेकर पुलिस गंभीर नहीं होती नजर आ रही है। देखा जाता है कि संगीन मामले में निरुद्ध बंदी को लाने और ले जाने के लिए एक सिपाही और होमगार्ड को तैनात किया जाता है। जबकि पिछले दिनों एक बंदी ने सिपाही की आंखों में मिर्ची पाउडर डालकर भागने का प्रयास किया था। इससे पहले भी बंदी पुलिस कर्मियों को चकमा देकर फरार भी हो चुके है। जेल से आने वाले बंदियों के वाहनों पर भी सुरक्षा व्यवस्था काफी कमजोर तरह की जाती है। वाहन पर भी दो या तीन पुलिस कर्मियों को दर्जनों बंदियों की पेशी कराने के लिए भेजा जाता है।
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कोर्ट परिसर में बढ़ी सुरक्षा
एटा। बागपत जिला कारागार में हुई बंदी की हत्या के बाद जारी हुए अलर्ट को लेकर जिला कारागार में जेलर कुलदीप सिंह भदौरियों ने स्टाफ के साथ मिलकर बंदियों और बैरक की चेकिंग कराई। वही दूसरी तरफ कोर्ट में आने जाने वाले लोगों की भी गेट पर सघन चेकिंग कराई गई। इस तरह से अलर्ट जारी होने के बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौकसी बरती।
खुलेआम बंदी ले जाते हैं खाने पीने का सामान
पेशी पर आने वाले बंदियों को परिजन खुलेआम खाने पीने का सामान दे जाते हैं। जिसे बंदी अपने साथ जेल में ले जाते हैं। यह सब पुलिसकर्मियों की आंखों के सामने होता है।
गाड़ी आते ही लग जाता है जमघट
जैसे ही बंदियों की गाड़ी जिला न्यायालय पर आकर रुकती है। वैसे ही बंदियों के परिजनों का जमघट लग जाता है। ऐसे में कौन किससे क्या बात कर रहा है। इसको लेकर भी पुलिसकर्मी गंभीर नहीं है। ऐसे में बहुत से बंदी अपने साथ परिजन दिया हुआ सामान लेकर सीधे जेल में प्रवेश कर जाते हैं।