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न डॉक्टर न दवाई, भगवान भरोसे बर्न वार्ड के मरीज
Updated Wed, 27 Jun 2018 11:45 PM IST
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मैनपुरी। जिला अस्पताल के बर्न वार्ड का हाल बुरा है। यहां मरीजों के उपचार के लिए न तो कोई डॉक्टर है और न ही उचित दवाएं। गंभीर मरीजों को देखते ही रेफर कर दिया जाता है। इसके अतिरिक्त वार्ड में मरीजों की देखभाल के लिए भी उचित साधन नहीं हैं।
जिला अस्पताल कैंपस में मुख्य भवन के बाहर बर्न वार्ड संचालित है। यहां आठ से 10 मरीज औसतन भर्ती रहते हैं। इन मरीजों को उपचार देने के लिए डॉ. गौरव पारिक सर्जन के रूप में तैनात हैं, लेकिन पिछले कई दिनों से वह अवकाश पर चल रहे हैं। यहां भर्ती मरीजों को फिजीशियन की सलाह पर उपरचार दिया जा रहा है।
स्टाफ नर्स ही अधिकतर मरीजों का उपचार करतीं हैं। जिला अस्पताल में इन मरीजों के लिए पर्याप्त दवाइयां भी नहीं हैं। मरीज की हालत जरा भी गंभीर होती है उसे मिनी पीजीआई सैफई के लिए रेफर कर दिया जाता है। जबकि उनका जनपद में भी उपचार किया जा सकता है। यहां डॉक्टर और दवाइयां न होने के कारण मरीजों को अपने तीमारदारों के साथ सैफई और आगरा में उपचार करना पड़ रहा है।
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बर्न वार्ड में मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों की भीड़ रहती है। अस्पताल प्रशासन ने यहां नोटिस बोर्ड लगा रखा है जिसमें जूते चप्पल पहनकर अंदर आना मना है लिखा है। यहां आने वाले तीमारदार न तो इस नोटिस बोर्ड पर ध्यान देते हैं और न ही स्टाफ नर्स द्वारा रोके जाने पर जूता-चप्पल बाहर उतारते हैैं। एक-एक बेड पर तीन-तीन चार-चार लोग 24 घंटे रहते हैं। इनसे किसी भी समय मरीजों को गंभीर बीमारी फैल सकती हैं।
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जिला अस्पताल कैंपस में मुख्य भवन के बाहर बर्न वार्ड संचालित है। यहां आठ से 10 मरीज औसतन भर्ती रहते हैं। इन मरीजों को उपचार देने के लिए डॉ. गौरव पारिक सर्जन के रूप में तैनात हैं, लेकिन पिछले कई दिनों से वह अवकाश पर चल रहे हैं। यहां भर्ती मरीजों को फिजीशियन की सलाह पर उपरचार दिया जा रहा है।
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स्टाफ नर्स ही अधिकतर मरीजों का उपचार करतीं हैं। जिला अस्पताल में इन मरीजों के लिए पर्याप्त दवाइयां भी नहीं हैं। मरीज की हालत जरा भी गंभीर होती है उसे मिनी पीजीआई सैफई के लिए रेफर कर दिया जाता है। जबकि उनका जनपद में भी उपचार किया जा सकता है। यहां डॉक्टर और दवाइयां न होने के कारण मरीजों को अपने तीमारदारों के साथ सैफई और आगरा में उपचार करना पड़ रहा है।
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बर्न वार्ड में मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों की भीड़ रहती है। अस्पताल प्रशासन ने यहां नोटिस बोर्ड लगा रखा है जिसमें जूते चप्पल पहनकर अंदर आना मना है लिखा है। यहां आने वाले तीमारदार न तो इस नोटिस बोर्ड पर ध्यान देते हैं और न ही स्टाफ नर्स द्वारा रोके जाने पर जूता-चप्पल बाहर उतारते हैैं। एक-एक बेड पर तीन-तीन चार-चार लोग 24 घंटे रहते हैं। इनसे किसी भी समय मरीजों को गंभीर बीमारी फैल सकती हैं।