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शौचालय पर जोर, भुगतान में पड़े कमजोर
Updated Mon, 28 May 2018 10:42 PM IST
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ख्ाराब श्ााौचालय
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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एटा। एक ओर सरकार जिले को खुले में शौच मुक्त करने के लिए शौचालय निर्माण का डंका पीट रही है, वहीं दूसरी ओर अनुदान नहीं मिलने से शौचालयों का निर्माण ठप पड़ गया है। आलम यह है कि धनराशि अटक जाने से स्वच्छ भारत मिशन की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। ऐसे में 31 मई तक जिले को ओडीएफ करने का दावा ठप नजर आ रहा है। उधर, लाभार्थियों ने खाते में धनराशि नहीं पहुंचने से काम बंद कर दिया और लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत तेजी से काम हुआ है। साल 2017-18 में 112798 घरों में शौचालयों का निर्माण हुआ है, लेकिन नए वित्तीय वर्ष मेें स्थिति गिरती जा रही है। सर्वे के बाद चयनित किए गए परिवारों ने शौचालयों का निर्माण शुरू कर दिया, लेकिन अनुदान नहीं मिलने से लाभार्थियों ने काम रोक दिया है। इनमें तमाम परिवार ऐसे हैं, जिनको पहली किस्त नहीं मिली है। जबकि दूसरी किस्त की आस में 70 हजार लाभार्थियों ने काम बंद कर दिया है। जबकि जिले को बजट मिल चुका है। पांच करोड़ रुपये के अनुदान को विभाग कई बार मिशन के अधिकारियों से मांग चुका है। वहीं जिले को 31 मई तक ओडीएफ घोषित करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अब तक 70 फीसदी प्रगति हो सकी है। ऐसे में शौचालय निर्माण के बजट जारी करने में हो रही हीलाहवाली सवाल खड़े करती नजर आ रही है।
701 गांव अब तक नहीं ओडीएफ
जिले के 853 गांवों में से 701 गांव अब तक ओडीएफ नहीं हो सके हैं। बताया जाता है कि इनमें कुछ गांव ऐसे हैं, जहां निर्माण कार्य का अनुदान नहीं मिलने से आक्रोशित ग्रामीणों ने निर्माण बंद कर दिया है। अगर भुगतान हो गया होता, तो संख्या कुछ कम हो सकती थ्री।
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डीपीआरओ गए छुट्टी पर
शौचालय निर्माण का काम इधर सुस्त हुआ और उधर डीपीआरओ धनंजय जायसवाल मेडिकल लीव लेकर चले गए हैं। ऐसे में विभाग और मिशन में सब कुछ अस्त व्यस्त हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि डीपीआरओ बजट के लिए शासन-प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। डीपीआरओ ने फोन भी उठाना बंद कर दिया है।
218143 शौचालय बनने हैं जिले में
176084 शौचालय बन सके हैं
70 हजार परिवारों को नहीं मिला अनुदान
84 गांव हो सके हैं खुले में शौचमुक्त
05 करोड़ रुपये का होना है भुगतान
जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत तेजी से काम हुआ है। साल 2017-18 में 112798 घरों में शौचालयों का निर्माण हुआ है, लेकिन नए वित्तीय वर्ष मेें स्थिति गिरती जा रही है। सर्वे के बाद चयनित किए गए परिवारों ने शौचालयों का निर्माण शुरू कर दिया, लेकिन अनुदान नहीं मिलने से लाभार्थियों ने काम रोक दिया है। इनमें तमाम परिवार ऐसे हैं, जिनको पहली किस्त नहीं मिली है। जबकि दूसरी किस्त की आस में 70 हजार लाभार्थियों ने काम बंद कर दिया है। जबकि जिले को बजट मिल चुका है। पांच करोड़ रुपये के अनुदान को विभाग कई बार मिशन के अधिकारियों से मांग चुका है। वहीं जिले को 31 मई तक ओडीएफ घोषित करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अब तक 70 फीसदी प्रगति हो सकी है। ऐसे में शौचालय निर्माण के बजट जारी करने में हो रही हीलाहवाली सवाल खड़े करती नजर आ रही है।
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701 गांव अब तक नहीं ओडीएफ
जिले के 853 गांवों में से 701 गांव अब तक ओडीएफ नहीं हो सके हैं। बताया जाता है कि इनमें कुछ गांव ऐसे हैं, जहां निर्माण कार्य का अनुदान नहीं मिलने से आक्रोशित ग्रामीणों ने निर्माण बंद कर दिया है। अगर भुगतान हो गया होता, तो संख्या कुछ कम हो सकती थ्री।
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डीपीआरओ गए छुट्टी पर
शौचालय निर्माण का काम इधर सुस्त हुआ और उधर डीपीआरओ धनंजय जायसवाल मेडिकल लीव लेकर चले गए हैं। ऐसे में विभाग और मिशन में सब कुछ अस्त व्यस्त हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि डीपीआरओ बजट के लिए शासन-प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। डीपीआरओ ने फोन भी उठाना बंद कर दिया है।
218143 शौचालय बनने हैं जिले में
176084 शौचालय बन सके हैं
70 हजार परिवारों को नहीं मिला अनुदान
84 गांव हो सके हैं खुले में शौचमुक्त
05 करोड़ रुपये का होना है भुगतान