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भतीजे का शव गोद में लिए स्ट्रेचर का इंतजार करता रहा चाचा
Updated Mon, 19 Mar 2018 11:17 PM IST
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फिरोजाबाद। सरकारी ट्रामा सेंटर की व्यवस्थाएं दुरुस्त होने के लाख दावे हों, लेकिन सोमवार को थाना नारखी में ट्रैक्टर-ट्राली पलटने से बालक की मौत के बाद शव ले जाने जाने के लिए उसे स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ। 20 मिनट इंतजार के बाद चाचा बालक का शव को गोद में उठाकर पुलिस के वाहन तक ले जाने को विवश हुआ।
थाना नारखी के बाबरी गांव के पास ट्रैक्टर-ट्राली पलटने से ग्यारह वर्षीय बालक सुनील की मौत हो गई थी। बालक का शव लेकर पिता चंद्रपाल एवं चाचा हाकिम सिंह पुलिस के साथ जिला अस्पताल आए। पुलिस के वाहन से उतरने के बाद ट्रामा सेंटर का स्ट्रेचर उपलब्ध होना चाहिए, लेकिन कोई स्ट्रेचर लेकर नहीं पहुंचा। उसका चाचा खुद बिलखते हुए शव गोद में उठाकर इमरजेंसी तक पहुंचा। चिकित्सक ने जैसे ही बालक को मृत घोषित किया तो दोनो भाई बिलख पड़े।
इमरजेंसी में दोनों काफी देर तक बिलखते रहे। अस्पताल के स्टाफ ने बालक का शव उठाने की जहमत नहीं उठाई। काफी देर तक इंतजार करने के बाद स्ट्रेचर नहीं आया तो चाचा हाकिम सिंह ने मासूम भतीजे का शव गोद में उठा कर पुलिस के वाहन तक पहुंचा। चाचा जिस वक्त शव लेकर जा रहा था उस वक्त ट्रामा सेंटर के बाहर दो एंबुलेंस खड़ी थीं और अस्पताल के स्ट्रेचर भी खाली थे। पुलिस के वाहन में शव रखते वक्त ेकई बार बिलखते हाकिम सिंह के पैर डगमगाए। इस दौरान उसे सहारा बाहर खड़े लोगों ने दिया। यह नजारा वहां जिस व्यक्ति ने भी देखा, हर कोई अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था को कोसता दिखा।
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थाना नारखी के बाबरी गांव के पास ट्रैक्टर-ट्राली पलटने से ग्यारह वर्षीय बालक सुनील की मौत हो गई थी। बालक का शव लेकर पिता चंद्रपाल एवं चाचा हाकिम सिंह पुलिस के साथ जिला अस्पताल आए। पुलिस के वाहन से उतरने के बाद ट्रामा सेंटर का स्ट्रेचर उपलब्ध होना चाहिए, लेकिन कोई स्ट्रेचर लेकर नहीं पहुंचा। उसका चाचा खुद बिलखते हुए शव गोद में उठाकर इमरजेंसी तक पहुंचा। चिकित्सक ने जैसे ही बालक को मृत घोषित किया तो दोनो भाई बिलख पड़े।
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इमरजेंसी में दोनों काफी देर तक बिलखते रहे। अस्पताल के स्टाफ ने बालक का शव उठाने की जहमत नहीं उठाई। काफी देर तक इंतजार करने के बाद स्ट्रेचर नहीं आया तो चाचा हाकिम सिंह ने मासूम भतीजे का शव गोद में उठा कर पुलिस के वाहन तक पहुंचा। चाचा जिस वक्त शव लेकर जा रहा था उस वक्त ट्रामा सेंटर के बाहर दो एंबुलेंस खड़ी थीं और अस्पताल के स्ट्रेचर भी खाली थे। पुलिस के वाहन में शव रखते वक्त ेकई बार बिलखते हाकिम सिंह के पैर डगमगाए। इस दौरान उसे सहारा बाहर खड़े लोगों ने दिया। यह नजारा वहां जिस व्यक्ति ने भी देखा, हर कोई अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था को कोसता दिखा।
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