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दशहरा: अबके बरस इन बुराइयों से मिले निजात
Updated Fri, 29 Sep 2017 10:51 PM IST
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एटा। आज दशहरा है। बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकरण, मेघनाथ समेत दशानन के पुतले धू-धू कर जलेंगे। पूरा देश विजय पर्व मनाएगा। जरा हकीकत से भी रूबरू होकर देखने की जरूरत है। शहर में तमाम बुराइयों के दशाननों ने जीना मुहाल कर दिया है। उम्मीद है कि इस बार रावण दहन के साथ इन बुराइयों से निजात मिलेगी।
बुराई -एक
हाईवे जाम से शहर में निकला मुश्किल
हाईवे-91 पर रोडवेज बस अड्डे से शिकोहाबाद मोड़ तक जाम ने लोगों का निकलना दूभर कर दिया है। हाईवे के किनारेे अतिक्रमण हटाने की योजना बनी, लेकिन परवान नहीं चढ़ी। काश दशहरे के बाद जाम दशानन से प्राथमिकता से मुक्ति मिले।
बुराई-दो
जहरीली होती शहर की आव-ओ-हवा
वाहनों और खुले में रखे जनरेटर से निकलता धुआं से आव-ओ-हवा दूषित हो चुकी है। ये ऐसा रावण जो हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर समाज को बीमार कर रहा है। अबके बरस लोगों को सांस, अस्थमा और फेफड़ों की बीमारी से निजात की उम्मीद है।
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बुराई-तीन
जर्जर तार, सड़कें दे रहीं जख्म
जिले में जर्जर हाईटेंशन लाइनों के तार जानलेवा बन चुके हैं। छह महीने में 25 लोग तार टूटने और करंट लगने से जान गवां चुके हैं। जिले की सड़कों में गहरे गड्ढे जख्म दे रहे हैं। रावण के साथ इस बुराई से निजात मिलना जरूरी है।
बुराई-चार
गंदगी और जलभराव
कूड़े के ढेर और बारिश के पानी के जलभराव से फैल रहीं बीमारियां जानलेवा साबित हो रहीं हैं। ऐसे में पालिका प्रशासन को लोगाें को गंदगी, कूड़े के ढेर और जलभराव के दशानन से दशहरे पर हमेशा के लिए निजात दिलाने की जरूरत है।
बुराई-पांच
बेलगाम अपराध पर नहीं लगाम
जिलें में हत्या, लूट, डकैती, चेन स्नेचिंग जैसी घटनाओं को अंजाम देने वाले रावणों की संख्या बढ़ी है। उपरोक्त बुराईयों के प्रति समाज को जागरूक कर पुलिस, प्रशासन को ऐसे दशाननों पर कार्रवाई कर बुराई पर अच्छाई मुहर लगाना जरूरी है।
बुराई-पांच
महिला अपराधों में अंकुश की जरूरत
जिले में रेप, दहेज उत्पीड़न, दहेज हत्या, चेन स्नेचिंग, छेड़छाड़, जैसी घटनाओं के बढ़ते ग्राफ पर इस दशहरे को रावण के साथ पुलिस और प्रशासन को हमेशा के लिए जलाने की जरूरत है। समाज में महिलाओं को सिर उठाकर जीने का अधिकार मिले।
बुराई-छह
स्वास्थ्य विभाग को ऑक्सीजन की जरूरत
जिला चिकित्सालय, सीएचसी, पीएचसी में चिकित्सकों और उपकरणों कमी का फायदा मरीजों का नहीं मिल रहा। संक्रामक रोगों का इलाज लोग मोटी फीस का भुगतान कराने को मजबूर हैं। जिले के लोग स्वास्थय विभाग में परिवर्तन का सपना संजोए बैठे हैं।
बुराई-सात
बाल मजदूरी बन रही अभिशाप
विकास के दावे के बाद 8 से 14 साल के बच्चे स्कूल जाने के बजाय होटलों और ढाबों मजदूरी करते दिखाई दे रहे हैं। श्रम प्रवर्तन विभाग के अफसर मूकदर्शक हैं। कार्रवाई के नाम पर भट्ठों पर बाल मजदूर दिखाई देते हैं। अभिशाप के खात्मे की जरूरत है।
बुराई-आठ
गिरते भूजल स्तर से पेयजल समस्या
पिछले वर्षों में हुई कम बारिश से जिले में गिर रहे भूजल स्तर से निजात दिलाने की जरूरत है। इस बार गर्मी में जिले में हैंडपंप नलकूप के हलक से पानी नहीं निकला। ऐसे में जिले में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और तालाबों में बारिश जमा करने की जरूरत है।
बुराई-नौ
सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम की जरुरत
हल्की से बारिश में पूरा शहर तालाब में तब्दील हो रहा है। रोजमर्रा के दिनों में घरों से निकलने वाला पानी और उसकी निकासी की व्यवस्था की दरकार है। शासन से 218 करोड़ के प्रस्ताव पर मुहर लगी, लेकिन सिस्टम का निर्माण अभीतक शुरु नहीं हुआ है।
बुराई-दस
भ्रूण हत्या के प्रति जागरूकता की जरूरत
गर्भ में बेटी की हत्या जैसे सामाजिक अपराध के प्रति समाज में जागरूकता की जरुरत है। इस सामाजिक बुराई को दशानन के साथ धू-धू कर जलाने पर बल देने के साथ बेटी के महत्व को समझाना जरूरी है।
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बुराई -एक
हाईवे जाम से शहर में निकला मुश्किल
हाईवे-91 पर रोडवेज बस अड्डे से शिकोहाबाद मोड़ तक जाम ने लोगों का निकलना दूभर कर दिया है। हाईवे के किनारेे अतिक्रमण हटाने की योजना बनी, लेकिन परवान नहीं चढ़ी। काश दशहरे के बाद जाम दशानन से प्राथमिकता से मुक्ति मिले।
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बुराई-दो
जहरीली होती शहर की आव-ओ-हवा
वाहनों और खुले में रखे जनरेटर से निकलता धुआं से आव-ओ-हवा दूषित हो चुकी है। ये ऐसा रावण जो हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर समाज को बीमार कर रहा है। अबके बरस लोगों को सांस, अस्थमा और फेफड़ों की बीमारी से निजात की उम्मीद है।
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बुराई-तीन
जर्जर तार, सड़कें दे रहीं जख्म
जिले में जर्जर हाईटेंशन लाइनों के तार जानलेवा बन चुके हैं। छह महीने में 25 लोग तार टूटने और करंट लगने से जान गवां चुके हैं। जिले की सड़कों में गहरे गड्ढे जख्म दे रहे हैं। रावण के साथ इस बुराई से निजात मिलना जरूरी है।
बुराई-चार
गंदगी और जलभराव
कूड़े के ढेर और बारिश के पानी के जलभराव से फैल रहीं बीमारियां जानलेवा साबित हो रहीं हैं। ऐसे में पालिका प्रशासन को लोगाें को गंदगी, कूड़े के ढेर और जलभराव के दशानन से दशहरे पर हमेशा के लिए निजात दिलाने की जरूरत है।
बुराई-पांच
बेलगाम अपराध पर नहीं लगाम
जिलें में हत्या, लूट, डकैती, चेन स्नेचिंग जैसी घटनाओं को अंजाम देने वाले रावणों की संख्या बढ़ी है। उपरोक्त बुराईयों के प्रति समाज को जागरूक कर पुलिस, प्रशासन को ऐसे दशाननों पर कार्रवाई कर बुराई पर अच्छाई मुहर लगाना जरूरी है।
बुराई-पांच
महिला अपराधों में अंकुश की जरूरत
जिले में रेप, दहेज उत्पीड़न, दहेज हत्या, चेन स्नेचिंग, छेड़छाड़, जैसी घटनाओं के बढ़ते ग्राफ पर इस दशहरे को रावण के साथ पुलिस और प्रशासन को हमेशा के लिए जलाने की जरूरत है। समाज में महिलाओं को सिर उठाकर जीने का अधिकार मिले।
बुराई-छह
स्वास्थ्य विभाग को ऑक्सीजन की जरूरत
जिला चिकित्सालय, सीएचसी, पीएचसी में चिकित्सकों और उपकरणों कमी का फायदा मरीजों का नहीं मिल रहा। संक्रामक रोगों का इलाज लोग मोटी फीस का भुगतान कराने को मजबूर हैं। जिले के लोग स्वास्थय विभाग में परिवर्तन का सपना संजोए बैठे हैं।
बुराई-सात
बाल मजदूरी बन रही अभिशाप
विकास के दावे के बाद 8 से 14 साल के बच्चे स्कूल जाने के बजाय होटलों और ढाबों मजदूरी करते दिखाई दे रहे हैं। श्रम प्रवर्तन विभाग के अफसर मूकदर्शक हैं। कार्रवाई के नाम पर भट्ठों पर बाल मजदूर दिखाई देते हैं। अभिशाप के खात्मे की जरूरत है।
बुराई-आठ
गिरते भूजल स्तर से पेयजल समस्या
पिछले वर्षों में हुई कम बारिश से जिले में गिर रहे भूजल स्तर से निजात दिलाने की जरूरत है। इस बार गर्मी में जिले में हैंडपंप नलकूप के हलक से पानी नहीं निकला। ऐसे में जिले में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और तालाबों में बारिश जमा करने की जरूरत है।
बुराई-नौ
सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम की जरुरत
हल्की से बारिश में पूरा शहर तालाब में तब्दील हो रहा है। रोजमर्रा के दिनों में घरों से निकलने वाला पानी और उसकी निकासी की व्यवस्था की दरकार है। शासन से 218 करोड़ के प्रस्ताव पर मुहर लगी, लेकिन सिस्टम का निर्माण अभीतक शुरु नहीं हुआ है।
बुराई-दस
भ्रूण हत्या के प्रति जागरूकता की जरूरत
गर्भ में बेटी की हत्या जैसे सामाजिक अपराध के प्रति समाज में जागरूकता की जरुरत है। इस सामाजिक बुराई को दशानन के साथ धू-धू कर जलाने पर बल देने के साथ बेटी के महत्व को समझाना जरूरी है।