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जीएसटी: कालीन और फर्श कारीगरों पर संकट
Updated Tue, 25 Jul 2017 09:58 PM IST
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आगरा। हस्तनिर्मित कालीनों और फर्श पर 12 से 18 फीसदी जीएसटी लगाने से इससे जुड़े 80 हजार से ज्यादा कारीगरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। कालीनों के जॉब वर्क पर 18 फीसदी जीएसटी के विरोध में बुनकर और कारीगर बुधवार सुबह कलक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा जाएगा।
ताजनगरी से हर साल 80 से 100 करोड़ रुपये का कालीन और दरियों का निर्यात होता है। आगरा फ्लोर कवरिंग एसोसिएशन के मुताबिक जीएसटी लागू होने के बाद कारोबार बुरी तरह प्रभावित है। नया आर्डर मिल नहीं रहा। पुराने आर्डर और पुराने स्टॉक भी टैक्स लागू करने के डर से पूरे नहीं किए जा रहे। लागत बढ़ रही है, जिससे प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है। एसोसिएशन अध्यक्ष आरडी शर्मा, संतोष माहेश्वरी, राजेश जैन, दिलीप शर्मा और सचिन गोयल के मुताबिक खादी की तरह कालीन बुनाई को जीएसटी मुक्त करना चाहिए। कालीन निर्यात ज्यादा होता है। इसलिए दरें 5 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
कालीन और दरी निर्यात में भारत प्रथम
दुनिया में कालीन और दरी के निर्यात में भारत पहले नंबर पर है। चीन, ईरान, तुर्की, पाकिस्तान और नेपाल कालीन में भारत को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। जीएसटी लागू होने के बाद कालीन की कीमतें बढ़ जाएंगी और इन देशों से प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा। इसका असर देश के 20 लाख से ज्यादा बुनकरों पर पड़ेगा।
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कालीन पर वैट नहीं लगाया गया था, लेकिन जीएसटी में खरीद पर 12 फीसदी टैक्स लगाया गया है। जॉब वर्क पर 18 फीसदी जीएसटी है। इससे तो कारीगरों का काम खत्म हो जाएगा। जीएसटी काउंसिल को जॉब वर्क से टैक्स हटाना चाहिए।
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ताजनगरी से हर साल 80 से 100 करोड़ रुपये का कालीन और दरियों का निर्यात होता है। आगरा फ्लोर कवरिंग एसोसिएशन के मुताबिक जीएसटी लागू होने के बाद कारोबार बुरी तरह प्रभावित है। नया आर्डर मिल नहीं रहा। पुराने आर्डर और पुराने स्टॉक भी टैक्स लागू करने के डर से पूरे नहीं किए जा रहे। लागत बढ़ रही है, जिससे प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है। एसोसिएशन अध्यक्ष आरडी शर्मा, संतोष माहेश्वरी, राजेश जैन, दिलीप शर्मा और सचिन गोयल के मुताबिक खादी की तरह कालीन बुनाई को जीएसटी मुक्त करना चाहिए। कालीन निर्यात ज्यादा होता है। इसलिए दरें 5 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
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कालीन और दरी निर्यात में भारत प्रथम
दुनिया में कालीन और दरी के निर्यात में भारत पहले नंबर पर है। चीन, ईरान, तुर्की, पाकिस्तान और नेपाल कालीन में भारत को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। जीएसटी लागू होने के बाद कालीन की कीमतें बढ़ जाएंगी और इन देशों से प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा। इसका असर देश के 20 लाख से ज्यादा बुनकरों पर पड़ेगा।
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कालीन पर वैट नहीं लगाया गया था, लेकिन जीएसटी में खरीद पर 12 फीसदी टैक्स लगाया गया है। जॉब वर्क पर 18 फीसदी जीएसटी है। इससे तो कारीगरों का काम खत्म हो जाएगा। जीएसटी काउंसिल को जॉब वर्क से टैक्स हटाना चाहिए।