{"_id":"5959304e4f1c1b8c1a8b4823","slug":"71499017294-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिलेभर के अंडर पास बने तालाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिलेभर के अंडर पास बने तालाब
Updated Sun, 02 Jul 2017 11:25 PM IST
विज्ञापन
अंडर पास में भरा पानी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। शिकोहाबाद फर्रुखाबाद तथा इटावा रेलवे लाइन पर बने अंडर ब्रिज पहली बारिश में ही तालाब बन गए हैं। ग्रामीणों को अंडर ब्रिज से होकर गुजरने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण रेलवे की अंडर ब्रिज योजना पर सवालिया निशान उठाने लगे हैं।
शिकोहाबाद फर्रुखाबाद रेलवे लाइन पर जिले की सीमा में छह तथा इटावा रेलवे लाइन पर रेलवे ने सात अंडर ब्रिज बनाए हैं। समतल जमीन से लगभग 20 फुट की गहराई पर बनाए गए अंडर ब्रिज पहली ही बारिश में तालाब बन गए हैं। इनमें आदमी की कमर से ऊपर तक पानी भरा हुआ है। जिसकेे चलते ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण घरों से खेत और बाजार तक जाने के लिए पांच से सात किलोमीटर तक का चक्कर लगाकर गुजर रहे हैं। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे भी खेतों और पगडंडियों से होकर स्कूल तक पहुंच रहे हैं।
ग्रामीण अनोखेलाल, चंद्रपाल शाक्य, सर्वेश यादव, राजेंद्र वर्मा, नरेंद्र सिंह पाल, सुदामा सिंह लोधी का कहना है रेलवे ने अंडर ब्रिज बनाते समय मानकों की अनदेखी की है। मानकों का पालन नहीं किए जाने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने डीएम यशवंत राव से अंडर ब्रिजों में हुए जलभराव से निजात दिलाने की मांग की है।
विज्ञापन
निर्माण के दौरान हुआ था विरोध
इस समस्या को देखते हुए अंडर ब्रिज के निर्माण के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने काफी विरोध किया था। लेकिन रेल प्रशासन ने उनकी एक न सुनी और बिना भविष्य को ध्यान में रखते हुए इनका निर्माण करते चले गए। इसकी परिणाम अब अंडर ब्रिज के आसपास स्थित गांवों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन
शिकोहाबाद फर्रुखाबाद रेलवे लाइन पर जिले की सीमा में छह तथा इटावा रेलवे लाइन पर रेलवे ने सात अंडर ब्रिज बनाए हैं। समतल जमीन से लगभग 20 फुट की गहराई पर बनाए गए अंडर ब्रिज पहली ही बारिश में तालाब बन गए हैं। इनमें आदमी की कमर से ऊपर तक पानी भरा हुआ है। जिसकेे चलते ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण घरों से खेत और बाजार तक जाने के लिए पांच से सात किलोमीटर तक का चक्कर लगाकर गुजर रहे हैं। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे भी खेतों और पगडंडियों से होकर स्कूल तक पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
ग्रामीण अनोखेलाल, चंद्रपाल शाक्य, सर्वेश यादव, राजेंद्र वर्मा, नरेंद्र सिंह पाल, सुदामा सिंह लोधी का कहना है रेलवे ने अंडर ब्रिज बनाते समय मानकों की अनदेखी की है। मानकों का पालन नहीं किए जाने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने डीएम यशवंत राव से अंडर ब्रिजों में हुए जलभराव से निजात दिलाने की मांग की है।
विज्ञापन
निर्माण के दौरान हुआ था विरोध
इस समस्या को देखते हुए अंडर ब्रिज के निर्माण के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने काफी विरोध किया था। लेकिन रेल प्रशासन ने उनकी एक न सुनी और बिना भविष्य को ध्यान में रखते हुए इनका निर्माण करते चले गए। इसकी परिणाम अब अंडर ब्रिज के आसपास स्थित गांवों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।