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रामलीला महोत्सव का आज से शुभारंभ
Updated Wed, 13 Sep 2017 01:06 AM IST
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फिरोजाबाद। सुहागनगरी का रामलीला मेला महोत्सव आज से शुरू हो रहा है। डेढ़ सौ साल पुराने महोत्सव ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं। बदलते वक्त के साथ रामलीला मंचन का स्वरूप बदलता रहा है।
पहले आसपास के गांवों से हजारों की भीड़ आती थी जो अब सिमटी जा रही है। बदलाव से साथ मेला महोत्सव से कुछ विकृतियां जुड़ने से विरोध शुरु हो गया है।
अतीत की बात है कि पूरे साल लोग रामलीला शुरु का इंतजार करते थे। शाम से ही ट्रैक्टर और बैलगाड़ी में भरकर ग्रामीण रामलीला मैदान में पूरे परिवार के साथ आते थे। प्रभु राम की लीला को देखने के लिए दरी और चादर बिछा कर स्थान घेरने की होड़ रहती थी।
कलाकार मैदान के बीचोबीच चारों ओर घूम कर किरदार निभाते तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। रामलीला में सजे राम, लक्षण, सीता हनुमान को लोग आस्था से जोड़कर देखते थे। दर्शन होते ही जयकारें गूंजते थे। मगर अब मनोरंजन के पर्याप्त साधनों और व्यस्तता के कारण साल दर साल भीड़ में कम होती जा रही है।
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रामलीला महोत्सव का आयोजन 1870-1880 के बीच लाला बद्रीप्रसाद अग्रवाल के गोदाम में होता था। 1880 के बाद मंचन रामलीला मैदान में शुरू हुआ। रामलीला का मंचन स्टेज पर नहीं होता। बनारस की तरह कलाकार मैदान में घूम कर किरदार निभाते हैं।
रामलीला मैदान परिसर में लगी कन्हैयालाल गोयंका की प्रतिमा इस आयोजन में उनकी भूमिका की कहानी बयां कर रही है। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने 1994 में अनावरण किया था।
रामलीला की ख्याति सुनकर 1961 और 1965 में डा. राम मनोहर लोहिया फिरोजाबाद आए थे। सुलोचना सती, ताड़का वध और राम वनवास का मंचन जब रामलीला स्थित तलैया में नौका डालकर होता तो रामायण काल जीवंत हो जाता था। 1984 तक रामलीला महोत्सव फिरोजाबाद जिले का ा मंचन करने आते थे तो लोगों में श्रद्धाभाव जाग उठते थे।
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पहले आसपास के गांवों से हजारों की भीड़ आती थी जो अब सिमटी जा रही है। बदलाव से साथ मेला महोत्सव से कुछ विकृतियां जुड़ने से विरोध शुरु हो गया है।
अतीत की बात है कि पूरे साल लोग रामलीला शुरु का इंतजार करते थे। शाम से ही ट्रैक्टर और बैलगाड़ी में भरकर ग्रामीण रामलीला मैदान में पूरे परिवार के साथ आते थे। प्रभु राम की लीला को देखने के लिए दरी और चादर बिछा कर स्थान घेरने की होड़ रहती थी।
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कलाकार मैदान के बीचोबीच चारों ओर घूम कर किरदार निभाते तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। रामलीला में सजे राम, लक्षण, सीता हनुमान को लोग आस्था से जोड़कर देखते थे। दर्शन होते ही जयकारें गूंजते थे। मगर अब मनोरंजन के पर्याप्त साधनों और व्यस्तता के कारण साल दर साल भीड़ में कम होती जा रही है।
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रामलीला महोत्सव का आयोजन 1870-1880 के बीच लाला बद्रीप्रसाद अग्रवाल के गोदाम में होता था। 1880 के बाद मंचन रामलीला मैदान में शुरू हुआ। रामलीला का मंचन स्टेज पर नहीं होता। बनारस की तरह कलाकार मैदान में घूम कर किरदार निभाते हैं।
रामलीला मैदान परिसर में लगी कन्हैयालाल गोयंका की प्रतिमा इस आयोजन में उनकी भूमिका की कहानी बयां कर रही है। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने 1994 में अनावरण किया था।
रामलीला की ख्याति सुनकर 1961 और 1965 में डा. राम मनोहर लोहिया फिरोजाबाद आए थे। सुलोचना सती, ताड़का वध और राम वनवास का मंचन जब रामलीला स्थित तलैया में नौका डालकर होता तो रामायण काल जीवंत हो जाता था। 1984 तक रामलीला महोत्सव फिरोजाबाद जिले का ा मंचन करने आते थे तो लोगों में श्रद्धाभाव जाग उठते थे।