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गांव की गलियों के जल्द बहुरेंगे दिन
Updated Mon, 17 Jul 2017 11:03 PM IST
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एटा। जिले के गांवों में अब गलियां कच्ची नहीं रहेंगीं। आंगनबाड़ी केंद्रों, परिषदीय विद्यालयों और पंचायत भवन में शौचालय बनाए जाएंगे। ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत जिले में सर्वे का काम शुरू हो चुका है। शासन ने ग्राम पंचायत सचिव और प्रधान को ग्राम पंचायत की वार्षिक कार्ययोजना में इन कामों को प्राथमिक रूप से सम्मलित करने के निर्देश दिए हैं।
जिले के 576 ग्राम पंचायतों में 807 गांव हैं। इनमें से अधिकांश गांवों की गलियां कच्ची हैं। गलियों का निर्माण नहीं होने के कारण जलभराव और अन्य समस्याओं से ग्रामीणों को जूझना पड़ता है। इसे लेकर पंचायती राज निदेशक विजय किरन आनंद ने निर्देश जारी किए हैं कि ग्राम पंचायत की वार्षिक कार्य योजना में गांव में पक्की गली निर्माण, परिषदीय विद्यालय, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र पर शौचालय निर्माण का प्रस्ताव शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में पक्की गली बन चुकी है या शौचालय बने हैं, उनके मरम्मत का प्रस्ताव भी शामिल करें। अब ग्राम पंचायत विकास योजना में इन कामों के प्रस्तावों को लेकर कवायद शुरू कर दी गई है। विभाग के पंचायत सचिव और प्रधान विकास को तरस रहे रास्तों और शौचालयों का सर्वे करने में जुटे हैं।
तीन सौ गांवों में नहीं पक्की गलियां
जिले के 807 गांवों मेें से 300 गांवों में पक्की गलियां नहीं हैं। कुछ गांवों में देखरेख और मरम्मत के अभाव में पक्की गलियों के नामोनिशान तक मिट गए हैं। जिले के गांव बघौली, नगला रामश्री, उदयपुरा, नगला बलदेव गांव की गलियों में पैदल चलना भी मुश्किल हैं।
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शौचालय विहीन पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र
जिले में 1800 आंगनबाड़ी केेंद्रों मेें से एक अथवा दो को छोड़कर अन्य में शौचालय नहीं है। वहीं 325 पंचायत भवन भी जर्जर अवस्था मेें हैं। 1200 परिषदीय स्कूलों में महज 300 में शौचालय हैं। इनके निर्माण और शौचालय को लेकर शासन को प्रस्ताव भेजकर दुरुस्त कराया जाएगा।
ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत गांव की गलियों, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, परिषदीय स्कूलों में शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिवों को प्रस्ताव को वार्षिक कार्ययोजना मेें शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
धनंजय जायसवाल, डीपीआरओ, एटा
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जिले के 576 ग्राम पंचायतों में 807 गांव हैं। इनमें से अधिकांश गांवों की गलियां कच्ची हैं। गलियों का निर्माण नहीं होने के कारण जलभराव और अन्य समस्याओं से ग्रामीणों को जूझना पड़ता है। इसे लेकर पंचायती राज निदेशक विजय किरन आनंद ने निर्देश जारी किए हैं कि ग्राम पंचायत की वार्षिक कार्य योजना में गांव में पक्की गली निर्माण, परिषदीय विद्यालय, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र पर शौचालय निर्माण का प्रस्ताव शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में पक्की गली बन चुकी है या शौचालय बने हैं, उनके मरम्मत का प्रस्ताव भी शामिल करें। अब ग्राम पंचायत विकास योजना में इन कामों के प्रस्तावों को लेकर कवायद शुरू कर दी गई है। विभाग के पंचायत सचिव और प्रधान विकास को तरस रहे रास्तों और शौचालयों का सर्वे करने में जुटे हैं।
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तीन सौ गांवों में नहीं पक्की गलियां
जिले के 807 गांवों मेें से 300 गांवों में पक्की गलियां नहीं हैं। कुछ गांवों में देखरेख और मरम्मत के अभाव में पक्की गलियों के नामोनिशान तक मिट गए हैं। जिले के गांव बघौली, नगला रामश्री, उदयपुरा, नगला बलदेव गांव की गलियों में पैदल चलना भी मुश्किल हैं।
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शौचालय विहीन पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र
जिले में 1800 आंगनबाड़ी केेंद्रों मेें से एक अथवा दो को छोड़कर अन्य में शौचालय नहीं है। वहीं 325 पंचायत भवन भी जर्जर अवस्था मेें हैं। 1200 परिषदीय स्कूलों में महज 300 में शौचालय हैं। इनके निर्माण और शौचालय को लेकर शासन को प्रस्ताव भेजकर दुरुस्त कराया जाएगा।
ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत गांव की गलियों, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, परिषदीय स्कूलों में शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिवों को प्रस्ताव को वार्षिक कार्ययोजना मेें शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
धनंजय जायसवाल, डीपीआरओ, एटा