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पशुओं पर नजर रखने को बनाई मचान ही बन गई मौत का कारण
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पशुओं पर नजर रखने को बनाई मचान ही बन गई मौत का कारण
- फोटो : अमर उजाला
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पटियाली। सिकंदरपुर वैश्य के नरदोली के नगला अलोखर में पशुओं पर नजर रखने के लिए बनाई गई मचान ही बालक की मौत का कारण बन गई। बालक की आग से मौत व उसकी बहन की गंभीर रूप से जल जाने की घटना ने लोगों को झंकझोर कर रख दिया। ग्रामीण इस घटना से काफी दुखी नजर आए।
ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा जानवरों से फसल को बचाने के लिए खेतों पर मचान ग्रामीण मचान बना लेते हैं। इस मचान पर बैठकर पशुओं पर नजर रखी जाती है। यही मचान अतर पाल के एक बेटे की मौत का कारण बन गई। जबकि उसकी बेटी 80 प्रतिशत तक जल चुकी है। जिससे वह जिंदगी मौत से जूझ रही है। इस मचान पर ठंड के मौसम को देखते हुए मचान पर चारपाई, रजाई अन्य कपड़े भी रखे हुए थे। जिससे मचान पर जब आग लगी तो आग ने कपड़ों व घास फूस आदि की वजह से विकराल रूप ले लिया और दोनों बच्चे उस आग में घिर गए। ऊंची मचान होने के कारण उनको नीचे उतरने का भी मौका नहीं मिला।
बालक ने ओढ़ ली रजाई
पटियाली। जब मचान पर आग लगी तो बालक ने मचान पर रखी रजाई को पने बचाव के लिए ओढ़ लिया। जब रजाई ने भी आग पकड़ जी तो वह पूरी तरह से जलकर मौत के आगोश में समा गया। परिवारीजनों ने जली हुई अवस्था में उसके शव को बाहर निकाला।
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आठ भाई बहनों में सबसे छोटे हैं बच्चे
पटियाली। अलोखर निवासी अतर पाल के चार बेटों में कन्हई लाल सबसे छोटा बेटा था। जबकि चार बेटियों में नंदनी सबसे छोटी है। इस घटना के बाद से परिवारीजन भी काफी सदमे में हैं।
जिद न करते तो बच जाता हादसा
पटियाली। जब अतर पाल व उनकी पत्नी खेतों पर जा रहे थे दोनों भाई बहनों ने खेत पर चलने की जिद की। उनकी जिद के चलते ही परिवारीजन उनको खेत पर ले गए। खेत पर पहुंचने के बाद माता पिता ने दोनों बच्चोों को खेत में ही खेलने को कहा, लेकिन बच्चों ने मचान पर बैठने की जिद की। जिससे उनको मचान पर बैठा दिया गया और हादसे का शिकार हो गए। इस हादसे में भाई की मौत हो गई जबकि बहन जिंदगी मौत से जूझ रही है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा जानवरों से फसल को बचाने के लिए खेतों पर मचान ग्रामीण मचान बना लेते हैं। इस मचान पर बैठकर पशुओं पर नजर रखी जाती है। यही मचान अतर पाल के एक बेटे की मौत का कारण बन गई। जबकि उसकी बेटी 80 प्रतिशत तक जल चुकी है। जिससे वह जिंदगी मौत से जूझ रही है। इस मचान पर ठंड के मौसम को देखते हुए मचान पर चारपाई, रजाई अन्य कपड़े भी रखे हुए थे। जिससे मचान पर जब आग लगी तो आग ने कपड़ों व घास फूस आदि की वजह से विकराल रूप ले लिया और दोनों बच्चे उस आग में घिर गए। ऊंची मचान होने के कारण उनको नीचे उतरने का भी मौका नहीं मिला।
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बालक ने ओढ़ ली रजाई
पटियाली। जब मचान पर आग लगी तो बालक ने मचान पर रखी रजाई को पने बचाव के लिए ओढ़ लिया। जब रजाई ने भी आग पकड़ जी तो वह पूरी तरह से जलकर मौत के आगोश में समा गया। परिवारीजनों ने जली हुई अवस्था में उसके शव को बाहर निकाला।
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आठ भाई बहनों में सबसे छोटे हैं बच्चे
पटियाली। अलोखर निवासी अतर पाल के चार बेटों में कन्हई लाल सबसे छोटा बेटा था। जबकि चार बेटियों में नंदनी सबसे छोटी है। इस घटना के बाद से परिवारीजन भी काफी सदमे में हैं।
जिद न करते तो बच जाता हादसा
पटियाली। जब अतर पाल व उनकी पत्नी खेतों पर जा रहे थे दोनों भाई बहनों ने खेत पर चलने की जिद की। उनकी जिद के चलते ही परिवारीजन उनको खेत पर ले गए। खेत पर पहुंचने के बाद माता पिता ने दोनों बच्चोों को खेत में ही खेलने को कहा, लेकिन बच्चों ने मचान पर बैठने की जिद की। जिससे उनको मचान पर बैठा दिया गया और हादसे का शिकार हो गए। इस हादसे में भाई की मौत हो गई जबकि बहन जिंदगी मौत से जूझ रही है।