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अरारोट, और रसायनिक रंगों से बनाया जा रहा था सॉस
Updated Sat, 23 Jun 2018 11:52 PM IST
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फिरोजाबाद। न्यू रामगढ़ क्षेत्र में नकली सॉस बनाने के अड्डे पर छापे की कार्रवाई की गई। टमाटर सॉस के नाम से बेचा जाने वाला नकली सॉस अरारोट और रसायन पदार्थों से बनाया जा रहा था। चाऊमीन बनाने की फैक्ट्री पर भी छापा मारा। खाद्य विभाग सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने नष्ट कराया। पांच नमूने संकलित किए गए।
खाद्य विभाग की टीम ने न्यू रामगढ़ क्षेत्र में संचालित सॉस और चाऊमीन निर्माण इकाई पर छापा मारा। इसे मनोज राठौर संचालित कर रहा था। टीम ने चाऊमीन की फैक्ट्री देखी। यहां गंदगी के बीच चाऊमीन का निर्माण किया जा रहा था। टीम ने मैदा और चाऊमीन का नमूना लिया। कुछ चाऊमीन नष्ट भी कराए। इधर पास में ही मनोज राठौर के अलग मकान में बन रही सॉस की फैक्ट्री को देख कर अधिकारी भी चौंक गए। सॉस निर्माण में साइट्रिक एसिड, अरारोट, रसायनिक रंग एवं मसाले मिलाकर कई दिनों तक रखा जाता था।
इसके बाद उस सामग्री को मशीन में मिक्स करके पैकेट में भर दिया जाता है। टीम ने चाऊमीन, मैदा, ग्रीन सॉस में प्रयोग किए जाने वाले सामान सहित पांच नमूने जांच को भेजे। टीम में खाद्य निरीक्षक अरुण कुमार, संतोष कुमार, आलोक कुमार, मालती, गजराज सिंह आदि मौजूद रहे।
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जांच करने गए खाद्य निरीक्षक आलोक कुमार ने नकली सॉस के ड्रम में हाथ डाला। लाल नकली सॉस का रंग इतना गहरा था कि साबुन से हाथ धोने के बाद ही छूट सका। ये कारोबार का तीन बार भंडाफोड़ हो चुका है। दो बार न्यू रामगढ़ क्षेत्र में नकली सॉस का कारोबार पकड़ा जा चुका है। वहीं, एक बार महादेव नगर में यह इकाई संचालित थी। वहां भी यह कारोबार होता था।
निर्माण इकाई से नकली सॉस का पैकेट 10 रुपये में आठ सौ ग्राम बेचा जाता है। इसे पैटीज, अंडा विक्रेता के यहां बेचा जाता है। करीब छह ड्रमों में अधूरा पका हुआ नकली सॉस रखा हुआ था। जबकि पांच सौ से अधिक पके हुए पैकेट थे। देहात क्षेत्रों के साथ पास के जिलों से सटे गांवों में भी सप्लाई होती है।
नकली सॉस स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। उसमें एसिड मिलाया जाता है और रसायनिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। जो लीवर और किडनी को पूरी तरह खराब कर देता है। कैंसर जैसे रोग भी इनका प्रयोग करने से हो जाते हैं।
- डा. निमित गुप्ता, न्यूरोसर्जन
खाद्य विभाग की टीम ने सूचना मिलने पर न्यू रामगढ़ क्षेत्र में मनोज राठौर की इकाई पर छापा मार नकली सॉस और चाऊमीन बनते पकड़ी। पांच नमूने लिए गए। 15 क्विंटल पैक्ड सॉस सीज किया है। अन्य जगहों पर भी टीम ने छापा मारा।
- अजीत कुमार, जिला अभिहित अधिकारी
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खाद्य विभाग की टीम ने न्यू रामगढ़ क्षेत्र में संचालित सॉस और चाऊमीन निर्माण इकाई पर छापा मारा। इसे मनोज राठौर संचालित कर रहा था। टीम ने चाऊमीन की फैक्ट्री देखी। यहां गंदगी के बीच चाऊमीन का निर्माण किया जा रहा था। टीम ने मैदा और चाऊमीन का नमूना लिया। कुछ चाऊमीन नष्ट भी कराए। इधर पास में ही मनोज राठौर के अलग मकान में बन रही सॉस की फैक्ट्री को देख कर अधिकारी भी चौंक गए। सॉस निर्माण में साइट्रिक एसिड, अरारोट, रसायनिक रंग एवं मसाले मिलाकर कई दिनों तक रखा जाता था।
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इसके बाद उस सामग्री को मशीन में मिक्स करके पैकेट में भर दिया जाता है। टीम ने चाऊमीन, मैदा, ग्रीन सॉस में प्रयोग किए जाने वाले सामान सहित पांच नमूने जांच को भेजे। टीम में खाद्य निरीक्षक अरुण कुमार, संतोष कुमार, आलोक कुमार, मालती, गजराज सिंह आदि मौजूद रहे।
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जांच करने गए खाद्य निरीक्षक आलोक कुमार ने नकली सॉस के ड्रम में हाथ डाला। लाल नकली सॉस का रंग इतना गहरा था कि साबुन से हाथ धोने के बाद ही छूट सका। ये कारोबार का तीन बार भंडाफोड़ हो चुका है। दो बार न्यू रामगढ़ क्षेत्र में नकली सॉस का कारोबार पकड़ा जा चुका है। वहीं, एक बार महादेव नगर में यह इकाई संचालित थी। वहां भी यह कारोबार होता था।
निर्माण इकाई से नकली सॉस का पैकेट 10 रुपये में आठ सौ ग्राम बेचा जाता है। इसे पैटीज, अंडा विक्रेता के यहां बेचा जाता है। करीब छह ड्रमों में अधूरा पका हुआ नकली सॉस रखा हुआ था। जबकि पांच सौ से अधिक पके हुए पैकेट थे। देहात क्षेत्रों के साथ पास के जिलों से सटे गांवों में भी सप्लाई होती है।
नकली सॉस स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। उसमें एसिड मिलाया जाता है और रसायनिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। जो लीवर और किडनी को पूरी तरह खराब कर देता है। कैंसर जैसे रोग भी इनका प्रयोग करने से हो जाते हैं।
- डा. निमित गुप्ता, न्यूरोसर्जन
खाद्य विभाग की टीम ने सूचना मिलने पर न्यू रामगढ़ क्षेत्र में मनोज राठौर की इकाई पर छापा मार नकली सॉस और चाऊमीन बनते पकड़ी। पांच नमूने लिए गए। 15 क्विंटल पैक्ड सॉस सीज किया है। अन्य जगहों पर भी टीम ने छापा मारा।
- अजीत कुमार, जिला अभिहित अधिकारी