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एटा में तेजी से बढ़ रहा एड्स के मरीजों का ग्राफ
अनिल यादव, एटा
Updated Sun, 22 Apr 2018 11:21 PM IST
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एचआईवी एड्स
- फोटो : demo pic
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एटा। एचआईवी पॉजीटिव का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है, खास बात यह है कि पुरुषों की तुलना में महिला एड्स मरीजों की संख्या अधिक है। पैर पसार रहे एड्स ने स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
एचआईवी को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी तो लोग घरों से निकल सरकारी अस्पताल पहुंचे और अपना एचआईवी की जांच कराई। हालांकि, शुरुआती दिनों में लोग सहमे और डरे जरूर देखे गए। क्योंकि एड्स का मतलब चरित्र पर दाग लगना था।
ऐसे में लोग अपनी जांच कराने से भी डरते थे। मगर समय के साथ लोगों की सोच बदली तो जांच कराने वालों का आंकड़ा हजारों में पहुंच गया। जिले में वर्ष 2017 दिसंबर तक 38778 लोगों ने जांच कराई, जिसमें 577 महिला-पुरुष एचआईवी पॉजीटिव पाए गए। एचआईवी पॉजीटिव पाए जाने वालों के आंकड़े पर जब अलग-अलग नजर डाली गई तो पुरुषों की तुलना में महिलाएं 0.4 प्रतिशत अधिक एड्स से पीड़ित पाई गईं।
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थर्ड जेंडर भी हुए जांच में शामिल
एचआईवी की जांच में महिला-पुरुषों के साथ थर्डजेंडर (मंगलामुखी) भी पीछे नहीं रहे। हालांकि थर्डजेंडर ने वर्ष 2014 से जांच कराने का सिलसिला शुरू किया। अब तक 198 थर्डजेंडर जांच करा चुके हैं, जिनमें दो एचआईवी पॉजीटिव पाए गए है।
इन बातों का रखें ध्यान
1. यौन संबंध बनाते समय सतर्कता बरतें।
2. खून की जरूरत पड़ने पर पंजीकृत संस्थाओं से ही खून लेकर चढ़वाएं।
3. एचआईवी पॉजिटिव मां अपने बच्चे को दूध न पिलाएं।
4. शेव करते समय नए ब्लेड का ही इस्तेमाल करने को कहें।
5. एक-दूसरे को एचआईवी के लिए जागरूक करें।
जिस तरह के आंकड़े सामने आ रहे हैं। उससे तो साफ है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक एचआईवी पॉजीटिव पाई जा रही हैं। एड्स से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।
-डा. अजय अग्रवाल, सीएमओ
एचआईवी क्या है
एचआईवी (ह्यूमन इम्युनोडेफिशियंसी वायरस) एक प्रकार से संक्रमित विषाणु है। यह संक्रमित विषाणु व्यक्ति के शरीर में जाकर उसके खून में मौजूद श्वेत रक्त कोशिकाओं में मिल जाता है। धीरे-धीरे वायरस का आक्रमण शरीर से सभी श्वेत रक्त कोशिकाओं को खत्म कर देता है। श्वेत रक्त कोशिकाओं के कम होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। एचआईवी वायरस को शरीर से श्वेत रक्त कोशिकाओं को खत्म करने में कम से कम 8 से 10 साल लग जाते हैं। इस वायरस की सबसे बड़ी बात यह है कि शरीर में प्रवेश करने के बाद इसे खत्म नहीं किया जा सकता। इस बीमारी का कोई भी इलाज संभव नहीं हो पाया है। बचाव ही, एड्स का इलाज है। इसलिए एड्स की बीमारी से खुद को बचाए रखें।
......
आंकड़ों पर नजर
38778 महिला पुरुष करा चुके हैं जांच
577 महिला पुरुष पाए गए है एचआईवी पॉजीटिव
22167 पुरूष जांच में पॉजिटिव 323
15496 महिला जांच में पॉजिटिव 233
1.39 प्रतिशत पुरूष पॉजिटिव
1.43 प्रतिशत महिलाएं पॉजिटिव
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एचआईवी को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी तो लोग घरों से निकल सरकारी अस्पताल पहुंचे और अपना एचआईवी की जांच कराई। हालांकि, शुरुआती दिनों में लोग सहमे और डरे जरूर देखे गए। क्योंकि एड्स का मतलब चरित्र पर दाग लगना था।
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ऐसे में लोग अपनी जांच कराने से भी डरते थे। मगर समय के साथ लोगों की सोच बदली तो जांच कराने वालों का आंकड़ा हजारों में पहुंच गया। जिले में वर्ष 2017 दिसंबर तक 38778 लोगों ने जांच कराई, जिसमें 577 महिला-पुरुष एचआईवी पॉजीटिव पाए गए। एचआईवी पॉजीटिव पाए जाने वालों के आंकड़े पर जब अलग-अलग नजर डाली गई तो पुरुषों की तुलना में महिलाएं 0.4 प्रतिशत अधिक एड्स से पीड़ित पाई गईं।
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थर्ड जेंडर भी हुए जांच में शामिल
एचआईवी की जांच में महिला-पुरुषों के साथ थर्डजेंडर (मंगलामुखी) भी पीछे नहीं रहे। हालांकि थर्डजेंडर ने वर्ष 2014 से जांच कराने का सिलसिला शुरू किया। अब तक 198 थर्डजेंडर जांच करा चुके हैं, जिनमें दो एचआईवी पॉजीटिव पाए गए है।
इन बातों का रखें ध्यान
1. यौन संबंध बनाते समय सतर्कता बरतें।
2. खून की जरूरत पड़ने पर पंजीकृत संस्थाओं से ही खून लेकर चढ़वाएं।
3. एचआईवी पॉजिटिव मां अपने बच्चे को दूध न पिलाएं।
4. शेव करते समय नए ब्लेड का ही इस्तेमाल करने को कहें।
5. एक-दूसरे को एचआईवी के लिए जागरूक करें।
जिस तरह के आंकड़े सामने आ रहे हैं। उससे तो साफ है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक एचआईवी पॉजीटिव पाई जा रही हैं। एड्स से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।
-डा. अजय अग्रवाल, सीएमओ
एचआईवी क्या है
एचआईवी (ह्यूमन इम्युनोडेफिशियंसी वायरस) एक प्रकार से संक्रमित विषाणु है। यह संक्रमित विषाणु व्यक्ति के शरीर में जाकर उसके खून में मौजूद श्वेत रक्त कोशिकाओं में मिल जाता है। धीरे-धीरे वायरस का आक्रमण शरीर से सभी श्वेत रक्त कोशिकाओं को खत्म कर देता है। श्वेत रक्त कोशिकाओं के कम होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। एचआईवी वायरस को शरीर से श्वेत रक्त कोशिकाओं को खत्म करने में कम से कम 8 से 10 साल लग जाते हैं। इस वायरस की सबसे बड़ी बात यह है कि शरीर में प्रवेश करने के बाद इसे खत्म नहीं किया जा सकता। इस बीमारी का कोई भी इलाज संभव नहीं हो पाया है। बचाव ही, एड्स का इलाज है। इसलिए एड्स की बीमारी से खुद को बचाए रखें।
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आंकड़ों पर नजर
38778 महिला पुरुष करा चुके हैं जांच
577 महिला पुरुष पाए गए है एचआईवी पॉजीटिव
22167 पुरूष जांच में पॉजिटिव 323
15496 महिला जांच में पॉजिटिव 233
1.39 प्रतिशत पुरूष पॉजिटिव
1.43 प्रतिशत महिलाएं पॉजिटिव