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चारों ओर लग रही आग, बुझाने के नहीं इंतजाम
Updated Thu, 19 Apr 2018 11:08 PM IST
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गोवर्धन
- फोटो : self
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जैसे-जैसे गर्मी की तपिश बढ़ रही है। वैसे-वैसे आग की लपटे कोहराम मचा रही है। ऐसा शायद ही कोई दिन निकल रहा होगा, जब आग से हजारों और लाखों का नुकसान न हो रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदार जागरूक नहीं हो रहे हैं। बीस लाख की आबादी पर सिर्फ दो फायरब्रिगेड की गाड़ी हैं। सरकारी दफ्तरों के हालात तो और भी बदतर हैं। कार्यालयों में लगे अग्निशमन यत्र वर्षों पुराने हैं जिनकी समयसीमा पूरी हो चुकी है। अगर कोई हादसा होता है तो चंद मिनट में ही कार्यालय राख के ढेर में तब्दील हो जाएंगे। इसे लेकर अग्नि शमन विभाग की ओर से नोटिस भी जारी किए हैं लेकिन कोई अधिकारी इस पर गौर नहीं करता।
बताते चले कि नगर के जिला अस्पताल में हर रोज डेढ़ हजार से अधिक मरीज दवा लेने पहुंचते हैं। बावजूद इसके यहां पर अग्नि शमन यंत्रों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल की ओपीडी, इमरजेंसी, औषधि भंडारण, सीएमओ आफिस, टीबी अस्पताल, महिला चिकित्सालय, जनरल वार्ड आदि स्थानों पर एक-एक अग्निशमन यंत्र लगा है। इनमें से अधिकांश यंत्रों की समय अवधि निकल चुकी है।
अगर ऐसे में सरकारी अस्पताल में चिंगारी उठी तो नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल होगा। अग्नि शमन विभाग अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नोटिस भेज कर चेता चुका है। बावजूद इसके कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। जबकि आग से बचाव के लिए हर 15 मीटर पर एक अग्निशमन यंत्र लगा होना अनिवार्य है। मगर सरकारी अस्पताल में मानक तो दूर उसके आसपास भी संसाधन नहीं है। बता दें तीन साल पहले कानपुर के जिला अस्पताल में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी सरकारी अस्पतालों में आग से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए थे।
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अग्निशमन विभाग ने चेताया फिर भी मैन पाइंट पर नहीं लगे यंत्र
इस संबंध में अग्निशमन विभाग भी अस्पताल प्रबंधन को कई बार पत्र लिखकर संसाधन लगाने की बात कर चुका है। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर अस्पताल के बिजली सप्लाई के मेन पैनल जहां पर शॉर्ट सर्किट से आग लगने की सबसे ज्यादा संभावनाएं होती हैं वहां पर अग्निशमन यंत्र ही नहीं लगाए गए हैं। यहीं नहीं जेनरेटर कक्ष के बाहर बिजली सप्लाई के मेन पैनल बनाए गए हैं, लेकिन किसी भी पैनल के पास अग्निशमन यंत्र नहीं लगाए गए हैं। यदि शॉर्ट सर्किट से आग लगी तो बड़ा हादसे होने से नहीं रोका जा सकता है, जबकि आए दिन अस्पताल में शॉर्ट सर्किट की शिकायतें आती रहती हैं।
इस तरह होनी चाहिए व्यवस्था
सीएफओ शिव दयाल शर्मा ने बताया कि नियम के अनुसार हर 15 मीटर पर एक अग्निशमन यंत्र, फायर फाइटिंग सिस्टम, अलार्म सिस्टम, हाइट्रेंड के साथ रेत से भरी बाल्टी की व्यवस्था होनी चाहिए। इसको लेकर जिला और महिला अस्पताल को नोटिस भी भेजा जा चुका है।
अस्पताल में आग से बचाव के लिए जो संसाधन चाहिए उसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। बजट स्वीकृत होने के बाद कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
डा. एसके मजूमदार, सीएमएस, जिला अस्पताल
आंकड़ों पर नजर
1500 मरीज हर रोज आते हैं सरकारी अस्पताल
15 मीटर की दूरी पर होना चाहिए एक अग्निशमन यंत्र
02 दमकल के सहारे है जिला
03 वर्ष पहले कानपुर के सरकारी अस्पताल में लग चुकी है आग
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जैसे-जैसे गर्मी की तपिश बढ़ रही है। वैसे-वैसे आग की लपटे कोहराम मचा रही है। ऐसा शायद ही कोई दिन निकल रहा होगा, जब आग से हजारों और लाखों का नुकसान न हो रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदार जागरूक नहीं हो रहे हैं। बीस लाख की आबादी पर सिर्फ दो फायरब्रिगेड की गाड़ी हैं। सरकारी दफ्तरों के हालात तो और भी बदतर हैं। कार्यालयों में लगे अग्निशमन यत्र वर्षों पुराने हैं जिनकी समयसीमा पूरी हो चुकी है। अगर कोई हादसा होता है तो चंद मिनट में ही कार्यालय राख के ढेर में तब्दील हो जाएंगे। इसे लेकर अग्नि शमन विभाग की ओर से नोटिस भी जारी किए हैं लेकिन कोई अधिकारी इस पर गौर नहीं करता।
बताते चले कि नगर के जिला अस्पताल में हर रोज डेढ़ हजार से अधिक मरीज दवा लेने पहुंचते हैं। बावजूद इसके यहां पर अग्नि शमन यंत्रों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल की ओपीडी, इमरजेंसी, औषधि भंडारण, सीएमओ आफिस, टीबी अस्पताल, महिला चिकित्सालय, जनरल वार्ड आदि स्थानों पर एक-एक अग्निशमन यंत्र लगा है। इनमें से अधिकांश यंत्रों की समय अवधि निकल चुकी है।
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अगर ऐसे में सरकारी अस्पताल में चिंगारी उठी तो नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल होगा। अग्नि शमन विभाग अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नोटिस भेज कर चेता चुका है। बावजूद इसके कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। जबकि आग से बचाव के लिए हर 15 मीटर पर एक अग्निशमन यंत्र लगा होना अनिवार्य है। मगर सरकारी अस्पताल में मानक तो दूर उसके आसपास भी संसाधन नहीं है। बता दें तीन साल पहले कानपुर के जिला अस्पताल में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी सरकारी अस्पतालों में आग से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए थे।
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अग्निशमन विभाग ने चेताया फिर भी मैन पाइंट पर नहीं लगे यंत्र
इस संबंध में अग्निशमन विभाग भी अस्पताल प्रबंधन को कई बार पत्र लिखकर संसाधन लगाने की बात कर चुका है। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर अस्पताल के बिजली सप्लाई के मेन पैनल जहां पर शॉर्ट सर्किट से आग लगने की सबसे ज्यादा संभावनाएं होती हैं वहां पर अग्निशमन यंत्र ही नहीं लगाए गए हैं। यहीं नहीं जेनरेटर कक्ष के बाहर बिजली सप्लाई के मेन पैनल बनाए गए हैं, लेकिन किसी भी पैनल के पास अग्निशमन यंत्र नहीं लगाए गए हैं। यदि शॉर्ट सर्किट से आग लगी तो बड़ा हादसे होने से नहीं रोका जा सकता है, जबकि आए दिन अस्पताल में शॉर्ट सर्किट की शिकायतें आती रहती हैं।
इस तरह होनी चाहिए व्यवस्था
सीएफओ शिव दयाल शर्मा ने बताया कि नियम के अनुसार हर 15 मीटर पर एक अग्निशमन यंत्र, फायर फाइटिंग सिस्टम, अलार्म सिस्टम, हाइट्रेंड के साथ रेत से भरी बाल्टी की व्यवस्था होनी चाहिए। इसको लेकर जिला और महिला अस्पताल को नोटिस भी भेजा जा चुका है।
अस्पताल में आग से बचाव के लिए जो संसाधन चाहिए उसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। बजट स्वीकृत होने के बाद कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
डा. एसके मजूमदार, सीएमएस, जिला अस्पताल
आंकड़ों पर नजर
1500 मरीज हर रोज आते हैं सरकारी अस्पताल
15 मीटर की दूरी पर होना चाहिए एक अग्निशमन यंत्र
02 दमकल के सहारे है जिला
03 वर्ष पहले कानपुर के सरकारी अस्पताल में लग चुकी है आग