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कल आना, परसों आना, अफसर बना देते रोज बहाना
Updated Wed, 04 Apr 2018 08:16 PM IST
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- फोटो : डेमो
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मथुरा। कल आना-परसों आना। आज बहुत काम है 10 दिन बाद आना। तुम्हारी फाइल को दिखवा रहे हैं, जल्द निराकरण करा देंगे। अफसरों से ये शब्द सुनते-सुनते अब सावित्री देवी भी थक गई हैं। बेटा का एडमीशन इसलिए नहीं हो पा रहा है कि पैसा नहीं है। पति की मौत के बाद न तो एक धैला मिला अब नौकरी के लिए अफसर टहला रहे हैं।
बुधवार को एक बार फिर कलक्ट्रेट पहुंचीं इंदुपुरम निवासी सावित्री देवी ने बताया कि पिछले साल 11 अप्रैल को उनके पति प्रेम सिंह संग्रह सेवक की मौत हो गई थी। उनका विनियमितीकरण भी सीजनल संग्रह सेवक के पद से एक साल पहले ही हुआ था। इसके कारण कोई धनराशि मौत के बाद विभाग से नहीं मिली। निर्धारित प्रक्रिया के तहत सावित्री देवी ने मृतक आश्रित में नौकरी के लिए आवेदन कर दिया।
स्नातक होने के कारण सावित्री को उम्मीद थी कि जल्द ही नौकरी मिल जाएगी। लेकिन अब उम्मीद दम तोड़ रही है। भले ही सदर तहसील और कलक्ट्रेट प्रांगण में चंद कदमों की दूरी हो, लेकिन मृतक आश्रित में नौकरी के लिए तहसील से चली फाइल को कलक्ट्रेट तक पहुंचने में ही महीनों लग गए। अब यह फाइल कलक्ट्रेट में उलझी हुई है।
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मृतक आश्रित में नौकरी के लिए सावित्री देवी ने भाई के साथ मुलाकात की है। नियुक्ति प्रकरण की फाइल को संबंधित पटल से मांगा गया है। जल्द ही अब इस मामले पर फैसला लिया जाएगा।
- रवींद्र कुमार, एडीएम वित्त
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बुधवार को एक बार फिर कलक्ट्रेट पहुंचीं इंदुपुरम निवासी सावित्री देवी ने बताया कि पिछले साल 11 अप्रैल को उनके पति प्रेम सिंह संग्रह सेवक की मौत हो गई थी। उनका विनियमितीकरण भी सीजनल संग्रह सेवक के पद से एक साल पहले ही हुआ था। इसके कारण कोई धनराशि मौत के बाद विभाग से नहीं मिली। निर्धारित प्रक्रिया के तहत सावित्री देवी ने मृतक आश्रित में नौकरी के लिए आवेदन कर दिया।
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स्नातक होने के कारण सावित्री को उम्मीद थी कि जल्द ही नौकरी मिल जाएगी। लेकिन अब उम्मीद दम तोड़ रही है। भले ही सदर तहसील और कलक्ट्रेट प्रांगण में चंद कदमों की दूरी हो, लेकिन मृतक आश्रित में नौकरी के लिए तहसील से चली फाइल को कलक्ट्रेट तक पहुंचने में ही महीनों लग गए। अब यह फाइल कलक्ट्रेट में उलझी हुई है।
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मृतक आश्रित में नौकरी के लिए सावित्री देवी ने भाई के साथ मुलाकात की है। नियुक्ति प्रकरण की फाइल को संबंधित पटल से मांगा गया है। जल्द ही अब इस मामले पर फैसला लिया जाएगा।
- रवींद्र कुमार, एडीएम वित्त