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चुनाव केकारण पिछड़ी धान की खरीद
Updated Thu, 21 Dec 2017 11:16 PM IST
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धान
- फोटो : amar ujala
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मैनपुरी। सरकारी धान खरीद केंद्रों पर लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक महज 37.28 प्रतिशत ही खरीद हो सकी है। सरकारी खरीद केंद्रों पर जाने की बजाए किसान मंडी में धान बेचने पहुंच रहे हैं। अधिकांश खरीद केंद्रों पर किसानों के नहीं पहुंचने से सन्नाटा बना हुआ है।
जिले में धान खरीद के लिए 15 सरकारी खरीद केंद्रों पर धान खरीद का 4640 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी तक सिर्फ 37.28 फीसदी ही धान की खरीद सरकारी केंद्रों पर हो सकी है। किसानों की पहली पसंद मंडी है।
मंडी में धान बेचने में किसान को आढ़तिया से तत्काल रुपया मिल जाता है। सरकारी केंद्र पर धान बेचने के बाद उसके खाते में आरटीजीएस के माध्यम से रुपये भेजे जाते हैं।
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सरकारी धान खरीद केंद्र की बजाए मंडी में धान बेचना किसान की मजबूरी है। किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद केंद्रों पर धान बेचने में परेशानी होती है। केंद्रों पर कभी वारदाना का अभाव तो कभी खरीद के नियमों को पूरा नहीं कर पाने से उन्हें परेशान किया जाता है।
मंडी में धान बेचने पर आढ़तिया नगद भुगतान करते हैं। जबकि सरकारी केंद्रों से रुपये खाते में आने में करीब एक महीने का समय लग जाता है। आढ़तिया किसानों को फसल बेचने से पहले भी रुपये दे देते हैं।
रठेरा निवासी फकीरेलाल कहते हैं सरकारी केंद्रों पर धान को छंटनी करके खरीदा जाता है। अच्छा धान सरकारी केंद्र पर बेचने के बाद मंडी में बचा हुआ धान बेचने पर अच्छी कीमत नहीं मिलती है। सरकारी केंद्र पर धान बेचने में तत्काल रुपया नहीं मिलता है।
आरटीजीएस के माध्यम से एक महीने तक खाते में रुपया आता है। नगला हिम्मत निवासी रामरतन कहते हैं मंडी में आढ़तिया नगद रुपये दे देते हैं। एडवांस भी दे देते हैं। एडवांस पर ब्याज भी नहीं लेते हैं। सरकारी खरीद केंद्रों पर कभी वारदाना नहीं होता तो कभी कर्मचारी नहीं मिलते हैं। छंटनी करके धान खरीदा जाता है। मंडी में धान बेचना हमारी मजबूरी बन चुकी है।
एडीएम अरुण कुमार सिंह ने बताया कि धान खरीद केंद्र प्रभारियों को 31 जनवरी तक लक्ष्य पूरा करने को कहा गया है। लक्ष्य पूरा नहीं करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। एसडीएम संबंधित तहसील के धान खरीद केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देंगे। खरीद का लक्ष्य हर हाल में पूरा करना होगा।
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जिले में धान खरीद के लिए 15 सरकारी खरीद केंद्रों पर धान खरीद का 4640 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी तक सिर्फ 37.28 फीसदी ही धान की खरीद सरकारी केंद्रों पर हो सकी है। किसानों की पहली पसंद मंडी है।
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मंडी में धान बेचने में किसान को आढ़तिया से तत्काल रुपया मिल जाता है। सरकारी केंद्र पर धान बेचने के बाद उसके खाते में आरटीजीएस के माध्यम से रुपये भेजे जाते हैं।
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सरकारी धान खरीद केंद्र की बजाए मंडी में धान बेचना किसान की मजबूरी है। किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद केंद्रों पर धान बेचने में परेशानी होती है। केंद्रों पर कभी वारदाना का अभाव तो कभी खरीद के नियमों को पूरा नहीं कर पाने से उन्हें परेशान किया जाता है।
मंडी में धान बेचने पर आढ़तिया नगद भुगतान करते हैं। जबकि सरकारी केंद्रों से रुपये खाते में आने में करीब एक महीने का समय लग जाता है। आढ़तिया किसानों को फसल बेचने से पहले भी रुपये दे देते हैं।
रठेरा निवासी फकीरेलाल कहते हैं सरकारी केंद्रों पर धान को छंटनी करके खरीदा जाता है। अच्छा धान सरकारी केंद्र पर बेचने के बाद मंडी में बचा हुआ धान बेचने पर अच्छी कीमत नहीं मिलती है। सरकारी केंद्र पर धान बेचने में तत्काल रुपया नहीं मिलता है।
आरटीजीएस के माध्यम से एक महीने तक खाते में रुपया आता है। नगला हिम्मत निवासी रामरतन कहते हैं मंडी में आढ़तिया नगद रुपये दे देते हैं। एडवांस भी दे देते हैं। एडवांस पर ब्याज भी नहीं लेते हैं। सरकारी खरीद केंद्रों पर कभी वारदाना नहीं होता तो कभी कर्मचारी नहीं मिलते हैं। छंटनी करके धान खरीदा जाता है। मंडी में धान बेचना हमारी मजबूरी बन चुकी है।
एडीएम अरुण कुमार सिंह ने बताया कि धान खरीद केंद्र प्रभारियों को 31 जनवरी तक लक्ष्य पूरा करने को कहा गया है। लक्ष्य पूरा नहीं करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। एसडीएम संबंधित तहसील के धान खरीद केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देंगे। खरीद का लक्ष्य हर हाल में पूरा करना होगा।