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पितृ ऋण से मुक्ति दिलाती है शनि अमावस्या
Updated Sat, 18 Nov 2017 11:30 PM IST
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आगरा रोड स्थित शनि देव मंदिर पर सजाया फूल बंगला वहीं पूजा करते दिखे श्रद्घालु
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एटा। जिले में शनिवार को शनि अमावस्या का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर जगह-जगह कार्यक्रमों का आयोजन और भंडारे हुए। पुराहितों ने श्रद्धालुओं को शनि अमावस का महत्व बताया।
ज्योतिषाचार्य और पंडित अरुण कुमार उपाध्याय ने कहा कि मार्ग शीर्ष माह का संबंध मृगशिरा नक्षत्र से होता है। जिस कारण से इस मास को मार्ग शीर्ष मास कहा जाता है। मार्गशीर्ष माह में शनि अमावस्या का शुभ संयोग बहुत कम बनता है। भविष्य पुराण के अनुसार शनि देव को शनि अमावस्या बहुत प्रिय है। शनि अमावस्या का दिन संकटों से समाधान के लिए बहुत शुभ माना गया है, साथ ही पितृ ऋण से मुक्ति के लिए भी यह दिन बेहद महत्व रखता है। उन्होनें कहा कि शनि दोष की शांति के लिए इस दिन किए पूजन और धार्मिक उपाय विशेष लाभकारी सिद्ध होते हैं। इस दिन भी देवी लक्ष्मी का पूजन करना शुभ है।
इस माह में भगवान श्रीकृष्ण भक्ति का विशेष महत्व है। विष्णुपुराण के अनुसार श्रद्धा भाव से अमावस्या का उपवास रखने से पितृगण ही तृप्त नहीं होते, अपितु ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, अश्विनी कुमार, सूर्य, अग्नि, पशु-पक्षी और समस्त भूत प्राणी भी तृप्त व प्रसन्न होते हैं। जिनकी कुंडली में पितृ दोष हो, संतानहीन योग हो या फिर नवम भाव में राहु नीच के होकर स्थित हो, उन व्यक्तियों को यह उपवास अवश्य रखना चाहिए।
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ज्योतिषाचार्य और पंडित अरुण कुमार उपाध्याय ने कहा कि मार्ग शीर्ष माह का संबंध मृगशिरा नक्षत्र से होता है। जिस कारण से इस मास को मार्ग शीर्ष मास कहा जाता है। मार्गशीर्ष माह में शनि अमावस्या का शुभ संयोग बहुत कम बनता है। भविष्य पुराण के अनुसार शनि देव को शनि अमावस्या बहुत प्रिय है। शनि अमावस्या का दिन संकटों से समाधान के लिए बहुत शुभ माना गया है, साथ ही पितृ ऋण से मुक्ति के लिए भी यह दिन बेहद महत्व रखता है। उन्होनें कहा कि शनि दोष की शांति के लिए इस दिन किए पूजन और धार्मिक उपाय विशेष लाभकारी सिद्ध होते हैं। इस दिन भी देवी लक्ष्मी का पूजन करना शुभ है।
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इस माह में भगवान श्रीकृष्ण भक्ति का विशेष महत्व है। विष्णुपुराण के अनुसार श्रद्धा भाव से अमावस्या का उपवास रखने से पितृगण ही तृप्त नहीं होते, अपितु ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, अश्विनी कुमार, सूर्य, अग्नि, पशु-पक्षी और समस्त भूत प्राणी भी तृप्त व प्रसन्न होते हैं। जिनकी कुंडली में पितृ दोष हो, संतानहीन योग हो या फिर नवम भाव में राहु नीच के होकर स्थित हो, उन व्यक्तियों को यह उपवास अवश्य रखना चाहिए।
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