{"_id":"598208094f1c1b42078b45b8","slug":"51501693961-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रशिक्षण के नाम पर हुआ नौ लाख का घोटाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रशिक्षण के नाम पर हुआ नौ लाख का घोटाला
Updated Wed, 02 Aug 2017 11:11 PM IST
विज्ञापन
fraud
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। जिला पंचायत राज विभाग में प्रधानों के प्रशिक्षण के नाम पर नौ लाख रुपये का घोटाला सामने आया है। पिछले वर्ष ग्राम पंचायतों की वार्षिक कार्ययोजना के प्रशिक्षण के लिए शासन से प्राप्त नौ लाख रुपये का एडीओ पंचायत हिसाब नहीं दे रहे हैं। शासन ने हिसाब देने में हुई हीलाहवाली को लेकर नाराजगी जताई है। आलम यह है कि प्रशिक्षण कराने वाले दो एडीओ पंचायत सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जबकि कई एडीओ पंचायत का ट्रांसफर हो चुका है।
अब डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत से स्पष्टरीकरण मांगते हुए 5 अगस्त तक हिसाब देने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि ग्राम पंचायत विकास योजना को लेकर वर्ष 2016-17 में शासन ने प्रधानों के दो दिवसीय प्रशिक्षण के निर्देश दिए थे। 23 लाख रुपये में होने वाले प्रशिक्षण के सापेक्ष 40 फीसद धनराशि 940032 रुपये जिले को भेजे गए। जिसे ब्लॉक वार विभाजित करते हुए हर एडीओ पंचायत के खातों में भेजा गया था।
प्रशिक्षण होने के बाद शासन ने जिला पंचायत राज अधिकारी से खर्च हुए धन का उपभोग प्रमाण पत्र मांगा। इसके लिए डीपीआरओ स्तर से कई बार सहायक विकास अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई। इस बीच दो सहायक विकास अधिकारी बिना हिसाब दिए सेवानिवृत हो गए और कई सहायक विकास अधिकारियों के तबादले हो गए।
विज्ञापन
सरकार बदलने के बाद अब एक बार फिर से शासन ने डीपीआरओ से खर्च हुए धन का ब्यौरा मांगा है। मगर विभाग के पास इसका कोई हिसाब नहीं है। विभाग ने सभी सहायक विकास अधिकारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए पांच अगस्त तक खर्च हुए धन का हिसाब देने को कहा है। डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए आए धन का हिसाब मांगा गया है। खर्च का ब्यौरा नहीं देने वाले सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत के देयकों से वसूली की जाएगी। साथ ही अन्य स्थानांतरित एडीओ के वेतन से वसूली की जाएगी।
कागजों पर हो गया प्रशिक्षण
हिसाब देने से बच रहे एडीओ पंचायत के रवैये से साफ जाहिर है कि प्रशिक्षण महज कागजों पर हुए हैं। प्रशिक्षण के लिए आई धनराशि को मनमाने ढंग से खर्च कर लिया गया।
विज्ञापन
अब डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत से स्पष्टरीकरण मांगते हुए 5 अगस्त तक हिसाब देने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि ग्राम पंचायत विकास योजना को लेकर वर्ष 2016-17 में शासन ने प्रधानों के दो दिवसीय प्रशिक्षण के निर्देश दिए थे। 23 लाख रुपये में होने वाले प्रशिक्षण के सापेक्ष 40 फीसद धनराशि 940032 रुपये जिले को भेजे गए। जिसे ब्लॉक वार विभाजित करते हुए हर एडीओ पंचायत के खातों में भेजा गया था।
विज्ञापन
प्रशिक्षण होने के बाद शासन ने जिला पंचायत राज अधिकारी से खर्च हुए धन का उपभोग प्रमाण पत्र मांगा। इसके लिए डीपीआरओ स्तर से कई बार सहायक विकास अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई। इस बीच दो सहायक विकास अधिकारी बिना हिसाब दिए सेवानिवृत हो गए और कई सहायक विकास अधिकारियों के तबादले हो गए।
विज्ञापन
सरकार बदलने के बाद अब एक बार फिर से शासन ने डीपीआरओ से खर्च हुए धन का ब्यौरा मांगा है। मगर विभाग के पास इसका कोई हिसाब नहीं है। विभाग ने सभी सहायक विकास अधिकारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए पांच अगस्त तक खर्च हुए धन का हिसाब देने को कहा है। डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए आए धन का हिसाब मांगा गया है। खर्च का ब्यौरा नहीं देने वाले सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत के देयकों से वसूली की जाएगी। साथ ही अन्य स्थानांतरित एडीओ के वेतन से वसूली की जाएगी।
कागजों पर हो गया प्रशिक्षण
हिसाब देने से बच रहे एडीओ पंचायत के रवैये से साफ जाहिर है कि प्रशिक्षण महज कागजों पर हुए हैं। प्रशिक्षण के लिए आई धनराशि को मनमाने ढंग से खर्च कर लिया गया।