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बेसहारा गो वंशों का नहीं है कोई ठिकाना
Updated Fri, 16 Nov 2018 10:27 PM IST
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कासगंज। गोकशी पर सरकार सख्त है , लेकिन गोवंशों के रहने का ठिकाना नहीं बनाया जो आम जनमानस को मुसीबत बने हुए हैं। सड़कों पर आपस में लड़ते और दौड़ते गोवंश सड़क हादसों के अलावा खेती को भी यह नुकसान पहुंचा रहे हैं।
शुक्रवार को गोपाष्टमी थी। सुबह से ही गो माता की पूजा अर्चना की, लेकिन बेसहारा गोवंशों की ओर किसी का कोई ध्यान नहीं गया। सरकार ने गोकशी पर सख्त है लेकिन उसके बाद गोशालाओं की संख्या नहीं बढ़ाई। दिन प्रतिदिन गोवंशों की संख्या बढ़ रही है और सबसे अधिक संख्या है बेसहारा गोवंशो की। बाजारों में भटकते गोवंश आम जनमानस के साथ साथ व्यापारियों के लिए भी समस्या बने हुए हैं। सड़कों की ओर ध्यान करें तो भटकते और आपस में लड़ते गौवंश हादसों को बढ़ावा देते हैं। कई हादसे गो वंशों की देन हैं। इन गोवंशों को सहारे की जरूरत है।
जिले में हैं मात्र दो गोशालाएं
कासगंज। जिले में मात्र दो गोशालाएं हैं जिनमें एक कासगंज और एक गंजडुंडवारा में है। कासगंज की गोशाला में 200 गाय हैं। जबकि गंजडुंडवारा की गोशाला में 125 गोवंश हैं। सड़कों पर घूमते गोवंशों का कोई आंकड़ा नहीं है।
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कटीले तारों में फंसते गोवंश
कासगंज। बेसहारा गोवंश भूख मिटाने को तमाम किसानों की फसलों में नुकसान करते हैं। कई किसानों ने खेतों के चारों तरफ कटीली तारकशी कर दी है। पिछले साल पटियाली क्षेत्र में तारों में फंसकर काल कवलित हो गए थे। उसके बाद डीएम आरपी सिंह ने तारकशी पर रोक लगा दी, लेकिन तमाम किसान अभी भी तारकशी कर रहे हैं।
इनकी भी सुनिए
- कईबार गोवंश लड़ते हुए आते हैं और सब्जी का नुकसान कर देते हैं। एक व्यक्ति सिर्फ सब्जी की निगरानी के लिए तैनात रहता है। गोवंशों का कोई ठिकाना होना चाहिए। राजेश, सब्जी विक्रेता।
- गोवंशों के संरक्षण के लिए सरकार को विशेष इंतजाम करने चाहिए। गोमाता की हम पूजा अर्चना करते
हैं। उन्हें बेसहारा बनाकर नहीं छोड़ना चाहिए। बेसहारा गोवंश मुसीबत भी बने हुए हैं। राहुल अग्रवाल, अधिवक्ता।
- जिलेभर में बेसहारा गायों के लिए गौशालाओं का निर्माण न हो सके तो कम से कम ऐसे बाड़े तैयार किए जाएं जिससे गोवंश को सुरक्षित स्थान मिल सके और वे खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान न करें। साथ ही सड़कों पर भी दुर्घटनाएं न हों- निशिथ गर्ग, गोसेवक
- जिले में मात्र दो गोशालाएं पंजीकृत हैं। बेसहारा गोवंशों को सहारा देने का प्रयास किया जा रहा है। पशु चिकित्सा विभाग गोशालाओं में समय समय पर निरीक्षण करता है। एके सगर, डिप्टी सीवीओ
गौ संरक्षण केंद्र बनाने की राह हुई आसान
टा। गौ संरक्षण केंद्र के निर्माण की राह आसान हो गई है। राजस्व विभाग द्वारा विकास खंड सकीट में जमीन मुहैया करा दी गई है।
जिले में गोवंश को संरक्षित और सुरक्षित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं होने पर शासन द्वारा गौ संरक्षण केंद्र बनाने की अनुमति दी गई थी। गौ संरक्षण केंद्र के निर्माण कार्य में एक करोड़ से अधिक की लागत का प्रस्ताव पास हुआ। सरकार ने 50 हजार रुपये प्रशासन को पांच माह पूर्व ही मुहैया भी करा दिए। इसके लिए मलावन के पास चारागाह की जमीन राजस्व विभाग द्वारा दी गई लेकिन प्रमुख सचिव ने आपत्ति लगाते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया। चार माह बाद राजस्व विभाग ने एक बार फिर विकास खंड सकीट के गांव वाहिदपुर बीबी में गौ संरक्षण केंद्र निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करा दी है।
गौ संरक्षण केंद्र निर्माण के लिए विकास खंड सकीट के गांव वाहिदपुर बीबी में राजस्व विभाग द्वारा जमीन मुुहैया कराई गई है। अब प्रक्रियाएं पूर्ण कर जल्द कार्य शुरू कराने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
डा. केपी सिंह, सीवीओ
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शुक्रवार को गोपाष्टमी थी। सुबह से ही गो माता की पूजा अर्चना की, लेकिन बेसहारा गोवंशों की ओर किसी का कोई ध्यान नहीं गया। सरकार ने गोकशी पर सख्त है लेकिन उसके बाद गोशालाओं की संख्या नहीं बढ़ाई। दिन प्रतिदिन गोवंशों की संख्या बढ़ रही है और सबसे अधिक संख्या है बेसहारा गोवंशो की। बाजारों में भटकते गोवंश आम जनमानस के साथ साथ व्यापारियों के लिए भी समस्या बने हुए हैं। सड़कों की ओर ध्यान करें तो भटकते और आपस में लड़ते गौवंश हादसों को बढ़ावा देते हैं। कई हादसे गो वंशों की देन हैं। इन गोवंशों को सहारे की जरूरत है।
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जिले में हैं मात्र दो गोशालाएं
कासगंज। जिले में मात्र दो गोशालाएं हैं जिनमें एक कासगंज और एक गंजडुंडवारा में है। कासगंज की गोशाला में 200 गाय हैं। जबकि गंजडुंडवारा की गोशाला में 125 गोवंश हैं। सड़कों पर घूमते गोवंशों का कोई आंकड़ा नहीं है।
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कटीले तारों में फंसते गोवंश
कासगंज। बेसहारा गोवंश भूख मिटाने को तमाम किसानों की फसलों में नुकसान करते हैं। कई किसानों ने खेतों के चारों तरफ कटीली तारकशी कर दी है। पिछले साल पटियाली क्षेत्र में तारों में फंसकर काल कवलित हो गए थे। उसके बाद डीएम आरपी सिंह ने तारकशी पर रोक लगा दी, लेकिन तमाम किसान अभी भी तारकशी कर रहे हैं।
इनकी भी सुनिए
- कईबार गोवंश लड़ते हुए आते हैं और सब्जी का नुकसान कर देते हैं। एक व्यक्ति सिर्फ सब्जी की निगरानी के लिए तैनात रहता है। गोवंशों का कोई ठिकाना होना चाहिए। राजेश, सब्जी विक्रेता।
- गोवंशों के संरक्षण के लिए सरकार को विशेष इंतजाम करने चाहिए। गोमाता की हम पूजा अर्चना करते
हैं। उन्हें बेसहारा बनाकर नहीं छोड़ना चाहिए। बेसहारा गोवंश मुसीबत भी बने हुए हैं। राहुल अग्रवाल, अधिवक्ता।
- जिलेभर में बेसहारा गायों के लिए गौशालाओं का निर्माण न हो सके तो कम से कम ऐसे बाड़े तैयार किए जाएं जिससे गोवंश को सुरक्षित स्थान मिल सके और वे खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान न करें। साथ ही सड़कों पर भी दुर्घटनाएं न हों- निशिथ गर्ग, गोसेवक
- जिले में मात्र दो गोशालाएं पंजीकृत हैं। बेसहारा गोवंशों को सहारा देने का प्रयास किया जा रहा है। पशु चिकित्सा विभाग गोशालाओं में समय समय पर निरीक्षण करता है। एके सगर, डिप्टी सीवीओ
गौ संरक्षण केंद्र बनाने की राह हुई आसान
टा। गौ संरक्षण केंद्र के निर्माण की राह आसान हो गई है। राजस्व विभाग द्वारा विकास खंड सकीट में जमीन मुहैया करा दी गई है।
जिले में गोवंश को संरक्षित और सुरक्षित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं होने पर शासन द्वारा गौ संरक्षण केंद्र बनाने की अनुमति दी गई थी। गौ संरक्षण केंद्र के निर्माण कार्य में एक करोड़ से अधिक की लागत का प्रस्ताव पास हुआ। सरकार ने 50 हजार रुपये प्रशासन को पांच माह पूर्व ही मुहैया भी करा दिए। इसके लिए मलावन के पास चारागाह की जमीन राजस्व विभाग द्वारा दी गई लेकिन प्रमुख सचिव ने आपत्ति लगाते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया। चार माह बाद राजस्व विभाग ने एक बार फिर विकास खंड सकीट के गांव वाहिदपुर बीबी में गौ संरक्षण केंद्र निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करा दी है।
गौ संरक्षण केंद्र निर्माण के लिए विकास खंड सकीट के गांव वाहिदपुर बीबी में राजस्व विभाग द्वारा जमीन मुुहैया कराई गई है। अब प्रक्रियाएं पूर्ण कर जल्द कार्य शुरू कराने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
डा. केपी सिंह, सीवीओ