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मातारानी के जयकारे लगाते हुए मंगला दर्शन को पहुंच रहे भक्त
Updated Mon, 15 Oct 2018 11:43 PM IST
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फिरोजाबाद। नवरात्र में जिले के शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में हर तरफ देवी आराधना की धूम मची हुई है। सोमवार को नवरात्र की षष्ठम अधिष्ठात्री देवी कात्यायनी की आराधना हुई।
शक्ति स्वरूपा देवी को प्रसन्न करने के लिए उनके भक्त हर जतन कर रहे हैं। मंदिर प्रांगण पूजन सामग्री, नेजा एवं दंडौती लगाते हुुए पहुंच रहे भक्तों के जयकारों से गुंजायमान हैं। सोमवार तड़के मंगला दर्शन एवं देवी अनुष्ठान के लिए माता के भक्तों का सैलाब मंदिर प्रांगण में दिखा। वहीं कैला देवी मंदिर, उसायनी स्थित वैष्णो देवी धाम, शेखूपुर स्थित काली मंदिर एवं सिकेहरा स्थित बीहड वाली माता आदि मंदिरों में नेजा चढाने वालों की धूम मची हुई है।
मटसेना क्षेत्र में बीहड़ इलाके में स्थापित देवी बेहड़ वाली माता अपने भक्तों के प्रत्येक संकट को हरने एवं उनकी मनोकामना को पूरा करने वाली है। गांव सिकेहरा स्थित यमुना किनारे स्थित यह मंदिर कभी डकैतों की आस्था का केंद्र रहा था।
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दो सौ वर्ष पूर्व स्थापित देवी मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। कभी नामी-गिरामी डकैतों की शरण स्थली एवं माता की आराधना का केद्र रहे इस मंदिर में आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। यमुना नदी के बीचों बीच बना मंदिर का एक भाग आज भी मां की महिमा और शक्ति का गवाह है।
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शक्ति स्वरूपा देवी को प्रसन्न करने के लिए उनके भक्त हर जतन कर रहे हैं। मंदिर प्रांगण पूजन सामग्री, नेजा एवं दंडौती लगाते हुुए पहुंच रहे भक्तों के जयकारों से गुंजायमान हैं। सोमवार तड़के मंगला दर्शन एवं देवी अनुष्ठान के लिए माता के भक्तों का सैलाब मंदिर प्रांगण में दिखा। वहीं कैला देवी मंदिर, उसायनी स्थित वैष्णो देवी धाम, शेखूपुर स्थित काली मंदिर एवं सिकेहरा स्थित बीहड वाली माता आदि मंदिरों में नेजा चढाने वालों की धूम मची हुई है।
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मटसेना क्षेत्र में बीहड़ इलाके में स्थापित देवी बेहड़ वाली माता अपने भक्तों के प्रत्येक संकट को हरने एवं उनकी मनोकामना को पूरा करने वाली है। गांव सिकेहरा स्थित यमुना किनारे स्थित यह मंदिर कभी डकैतों की आस्था का केंद्र रहा था।
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दो सौ वर्ष पूर्व स्थापित देवी मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। कभी नामी-गिरामी डकैतों की शरण स्थली एवं माता की आराधना का केद्र रहे इस मंदिर में आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। यमुना नदी के बीचों बीच बना मंदिर का एक भाग आज भी मां की महिमा और शक्ति का गवाह है।