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बाबू की सेवा समाप्त, आदेश के बाद भी एफआईआर से बच रही पालिका
Updated Sun, 26 Aug 2018 10:47 PM IST
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एटा। नगर पालिका में फर्जी मार्कशीट लगाकर नौकरी कर रहे बाबू निरंकार सिंह यादव की सेवा समाप्त कर पालिका ने कार्रवाई का कोरम पूरा कर दिया है। जबकि फर्जीबाड़ा करने वाले बाबू के खिलाफ अब तक रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई।
दरअसल चार अगस्त को प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने डीएम को पालिका में फर्जी मार्कशीट लगाकर नौकरी कर रहे बाबू निरंकार सिंह यादव की सेवा समाप्त करने, रिपोर्ट दर्ज कराने और वेतन वसूली करने के निर्देश दिए थे। मामले में प्रमुख सचिव ने जल्द से जल्द आख्या देने के लिए कहा था। इसके बाद चेयरमैन मीरा गांधी ने शुक्रवार को आदेश जारी करते हुए बाबू की सेवा समाप्त कर दी, लेकिन अब तक बाबू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई जा सकी है। साथ ही वेतन वसूली की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है। बताया जाता है कि अपनी रसूख के दम पर बाबू पूरे जिला प्रशासन पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन ने शासन के आदेशों को ताक पर रख दिया है।
ये है मामला
नगर पालिका में बाबू निरंकार सिंह यादव बीते 20 साल से नौकरी कर रहा है। पिछले साल माली से लिपिक बनाए गए निरंकार सिंह यादव के खिलाफ शिकायत की डीएम ने जांच कराई थी। मामले में एडीएम वित्त एवं राजस्व महेश चंद्र शर्मा ने जांच में पाया कि लिपिक का चयन माली और दफ्तरी पद पर किया गया था, लेकिन जांच में दोनों पत्रावली नहीं मिलीं। साथ ही लिपिक ने इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट लगाकर नियुक्ति पाई थी। मार्कशीट को सत्यापन के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेजा गया। इसमें इंटरमीडिएट की वर्ष 1987 की अनुक्रमांक 477784 की मार्कशीट कुमारी सक्सेना पुत्री हरीश चंद्र सक्सेना की पाई गई। इस पर प्रमुख सचिव ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे।
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दरअसल चार अगस्त को प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने डीएम को पालिका में फर्जी मार्कशीट लगाकर नौकरी कर रहे बाबू निरंकार सिंह यादव की सेवा समाप्त करने, रिपोर्ट दर्ज कराने और वेतन वसूली करने के निर्देश दिए थे। मामले में प्रमुख सचिव ने जल्द से जल्द आख्या देने के लिए कहा था। इसके बाद चेयरमैन मीरा गांधी ने शुक्रवार को आदेश जारी करते हुए बाबू की सेवा समाप्त कर दी, लेकिन अब तक बाबू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई जा सकी है। साथ ही वेतन वसूली की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है। बताया जाता है कि अपनी रसूख के दम पर बाबू पूरे जिला प्रशासन पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन ने शासन के आदेशों को ताक पर रख दिया है।
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ये है मामला
नगर पालिका में बाबू निरंकार सिंह यादव बीते 20 साल से नौकरी कर रहा है। पिछले साल माली से लिपिक बनाए गए निरंकार सिंह यादव के खिलाफ शिकायत की डीएम ने जांच कराई थी। मामले में एडीएम वित्त एवं राजस्व महेश चंद्र शर्मा ने जांच में पाया कि लिपिक का चयन माली और दफ्तरी पद पर किया गया था, लेकिन जांच में दोनों पत्रावली नहीं मिलीं। साथ ही लिपिक ने इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट लगाकर नियुक्ति पाई थी। मार्कशीट को सत्यापन के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेजा गया। इसमें इंटरमीडिएट की वर्ष 1987 की अनुक्रमांक 477784 की मार्कशीट कुमारी सक्सेना पुत्री हरीश चंद्र सक्सेना की पाई गई। इस पर प्रमुख सचिव ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे।
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