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पांच दिन की हड़ताल में तैयार माल से फुल हुए स्टॉक
Updated Tue, 24 Jul 2018 11:35 PM IST
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फिरोजाबाद। ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल ने सुहागनगरी के कांच उद्यमियों की टेंशन बढ़ा दी है। हड़ताल के कारण कारखानों से न तो तैयार माल बाहर भेज पा रहे हैं और न ही बाहर से कच्चा माल और केमिकल आ पा रहा है। पांच दिनों की हड़ताल में कांच इकाइयों में माल से स्टॉक फुल हो गए हैं।
सुहागनगरी में 200 कांच और चूड़ी इकाइयों का संचालन होता है। इन कांच कारखानों में तैयार होने वाली बोतल, ग्लास, एक्सपोर्ट आइटम, कांच की चूड़ियों की रोज 500-600 ट्रक तैयार माल बाहर भेजा जाता है। 20 जुलाई से ट्रांसपोर्टरों ने देश में हड़ताल कर दी है। पांच दिनों की हड़ताल से कांच इकाइयों में तैयार माल से स्टॉक फुल हो गए हैं। स्टॉक में माल रखने को बिल्कुल जगह नहीं है। उद्यमी तैयार माल कहां रखें यह सोचकर टेंशन में है।
इधर हड़ताल से एक्सपोर्ट के आर्डर फंस गए हैं। एक्सपोर्ट हितेश उपाध्याय का कहना है कि हड़ताल से तमाम आर्डर फंस गए हैं। एक्सपोर्ट के आर्डर समय पर नहीं पहुंचने से निरस्त भी हो सकते हैं। इससे लाखों रुपये का नुकसान होगा। केंद्र सरकार को जल्द ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल खुलवाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
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ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से सब्जियों के दामों में उछाल आया है। पिछले पांच दिनों में सब्जियों के दामों में पांच से दस रुपये बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। हड़ताल में बंगलौर, इंदौर, हल्द्वानी से आना वाला टमाटर, शिमला मिर्च, गोभी, परमल, धनियां सहित कई सब्जियों की आवक कम हो गई है। सब्जी मंडी में पांच दिन पहले जो टमाटमर 20 से 25 रुपये किग्रा बिक रहा था, उसके दाम बढ़कर 40 रुपये पहुंच गए हैं। शिमला मिर्च 60 से 100 रुपये, गोभी 50 रुपये से 80 रुपये, परमल 40 से 60 रुपये, धनियां 100 से 120 तक मंडी में बिक रहा है।
ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर फलों के दामों पर देखने को मिल रहा है। बाहर से फलों की आवक न होने से रसूलपुर स्थित फल मंडी वीरान हो गई है। हड़ताल के कारण बाहर से फल नहीं आने से उनके दाम आसमान छू रहे हैं। फलों की आवक कम होने के कारण सेब, आम, केला, मौसमी सहित अन्य फलों के दामों में 10 से 50 रुपये तक बढ़ोत्तरी हुई है।
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सुहागनगरी में 200 कांच और चूड़ी इकाइयों का संचालन होता है। इन कांच कारखानों में तैयार होने वाली बोतल, ग्लास, एक्सपोर्ट आइटम, कांच की चूड़ियों की रोज 500-600 ट्रक तैयार माल बाहर भेजा जाता है। 20 जुलाई से ट्रांसपोर्टरों ने देश में हड़ताल कर दी है। पांच दिनों की हड़ताल से कांच इकाइयों में तैयार माल से स्टॉक फुल हो गए हैं। स्टॉक में माल रखने को बिल्कुल जगह नहीं है। उद्यमी तैयार माल कहां रखें यह सोचकर टेंशन में है।
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इधर हड़ताल से एक्सपोर्ट के आर्डर फंस गए हैं। एक्सपोर्ट हितेश उपाध्याय का कहना है कि हड़ताल से तमाम आर्डर फंस गए हैं। एक्सपोर्ट के आर्डर समय पर नहीं पहुंचने से निरस्त भी हो सकते हैं। इससे लाखों रुपये का नुकसान होगा। केंद्र सरकार को जल्द ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल खुलवाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
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ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से सब्जियों के दामों में उछाल आया है। पिछले पांच दिनों में सब्जियों के दामों में पांच से दस रुपये बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। हड़ताल में बंगलौर, इंदौर, हल्द्वानी से आना वाला टमाटर, शिमला मिर्च, गोभी, परमल, धनियां सहित कई सब्जियों की आवक कम हो गई है। सब्जी मंडी में पांच दिन पहले जो टमाटमर 20 से 25 रुपये किग्रा बिक रहा था, उसके दाम बढ़कर 40 रुपये पहुंच गए हैं। शिमला मिर्च 60 से 100 रुपये, गोभी 50 रुपये से 80 रुपये, परमल 40 से 60 रुपये, धनियां 100 से 120 तक मंडी में बिक रहा है।
ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर फलों के दामों पर देखने को मिल रहा है। बाहर से फलों की आवक न होने से रसूलपुर स्थित फल मंडी वीरान हो गई है। हड़ताल के कारण बाहर से फल नहीं आने से उनके दाम आसमान छू रहे हैं। फलों की आवक कम होने के कारण सेब, आम, केला, मौसमी सहित अन्य फलों के दामों में 10 से 50 रुपये तक बढ़ोत्तरी हुई है।