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ताज: दीमक से बचने के लिए अब लकड़ी नहीं, लाल पत्थर की बनाई जाएंगी रैंप

Thu, 14 Dec 2017 11:01 PM IST
Updated Thu, 14 Dec 2017 11:01 PM IST
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ताज: दीमक से बचने के लिए अब लकड़ी नहीं, लाल पत्थर की बनाई जाएंगी रैंप
आगरा। दिव्यांग सैलानियों की सुविधा के लिए ताजमहल में बनाई गई लकड़ी की रैंप की जगह अब रेड सैंड स्टोन (लाल बलुआ पत्थर) की रैंप बनाई जाएंगी। बार-बार दीमक लगने और बारिश में लकड़ी खराब हो जाने के कारण एएसआई ने स्मारकों में रैंप बनाने की नीति में बदलाव किया है। लकड़ी की रैंप के मुकाबले पत्थर की रैंप न केवल लागत में कम होंगी, बल्कि लंबे समय तक प्रयोग की जा सकेंगी।
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ताजमहल, आगरा किला, सिकंदरा, एत्माद्दौला और फतेहपुर सीकरी स्मारक में दिव्यांग सैलानियों की सुविधा के लिए लकड़ी की जगह पत्थर के रैंप होंगे। एएसआई इन रैंप के लिए अस्थाई निर्माण करेगा। लोहे के फ्रेम पर लकड़ी की जगह लाल पत्थर के स्लैब रखे जाएंगे।
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लकड़ी की रैंप में लगी दीमक के कारण ताज के बागीचों में भी दीमक फैलने लगी थी। एएसआई महानिदेशक ऊषा शर्मा ने आगरा दौरे में लकड़ी की रैंप हटाकर विकल्प खोजने को कहा था, जिसके बाद एएसआई अधिकारियों ने नया प्रस्ताव दिल्ली भेजा।
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नई डिजाइन को एएसआई महानिदेशक ने मंजूर कर ताज और किले में प्रयोग के लिए कहा है। एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम ने बताया कि लकड़ी की रैंप में दीमक की समस्या तो थी ही, हर साल दीमक ट्रीटमेंट के अलावा मेंटीनेंस भी महंगा पड़ता है। इसलिए रेड सैंड स्टोन को चुना गया है।

कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान बनाई गई थी रैंप

साल 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले ताजमहल सहित अन्य स्मारकों में संस्कृति मंत्रालय ने दिव्यांग पर्यटकों के लिए रैंप बनवाए थे। ताजमहल के रॉयल गेट, रेड सैंड स्टोन प्लेटफार्म पर दोनों ओर तथा लेबर गेट और लैब के पास रैंप बनवाए गए ताकि दिव्यांग सैलानी ताज के उद्यान तक भ्रमण कर सकें।


इसके बाद चमेली फर्श पर जाने के लिए दोनों ओर रैंप बनवाए गए। विदेशी सैलानी तो मुख्य गुंबद तक रैंप या लिफ्ट की मांग कर चुके हैं, लेकिन ताज में कड़े नियम होने के कारण इन मांगों को खारिज किया जा चुका है।
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