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बादलों व बूंदाबांदी से लुढ़का तापमान
Updated Tue, 05 Dec 2017 09:53 PM IST
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कासगंज में बारिश के दौरान बाजार में छाता लगाकर जाती महिला
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कासगंज। मंगलवार को छाए घने बादलों व बूंदा बांदी के कारण तापमान धड़ाम से गिर गया। दिन में अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस रहा।
बढ़ती ठंड और बूंदाबांदी ने लोगों की दिक्कतें बढ़ा दीं तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में लोग चौपाल लगा अलाव जलाकर गप्पे मारते हुए भी नजर आए।
सोमवार से आसमान में छाए बाद मंगलवार को भी बने रहे। सुबह से ही बादलों के कारण सूर्यदेव के दर्शन नहीं हो सके। तापमान के लुढ़कने से ठंड बढ़ गई। बुजुर्गों एवं बच्चे अलाव के सहारे ठंड से बचाव करते रहे। वहीं जानवरों को भी ठंड से बचाने को अलाव जलाए गए।
ठंड का असर बाजारों में भी देखने को मिला। अन्य दिनों की अपेक्षा में कम भीड़ होने के कारण रौनक फीकी रही। कम ग्राहकों के पहुंचने से दुकानदार भी मायूस रहे। लोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए घर से बाहर निकले। वहीं बूंदाबांदी के बाद लोगों की दिक्कतें और अधिक बढ़ गई।
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इससे फड़ों व ठेलों पर सामान लगाकर बेच रहे दुकानदारों ने सामान को बूंदों से बचाने के लिए त्रिपाल आदि से ठक दिया। वहीं लोगों ने खुशनुमा मौसम का लुत्फ लेने के लिए घरों पर विभिन्न तरह के व्यंजनों को बनाया। साथ ही ठंड से बचने के लिए लोगों ने अंगीठी, हीटर आदि का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
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बढ़ती ठंड और बूंदाबांदी ने लोगों की दिक्कतें बढ़ा दीं तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में लोग चौपाल लगा अलाव जलाकर गप्पे मारते हुए भी नजर आए।
सोमवार से आसमान में छाए बाद मंगलवार को भी बने रहे। सुबह से ही बादलों के कारण सूर्यदेव के दर्शन नहीं हो सके। तापमान के लुढ़कने से ठंड बढ़ गई। बुजुर्गों एवं बच्चे अलाव के सहारे ठंड से बचाव करते रहे। वहीं जानवरों को भी ठंड से बचाने को अलाव जलाए गए।
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ठंड का असर बाजारों में भी देखने को मिला। अन्य दिनों की अपेक्षा में कम भीड़ होने के कारण रौनक फीकी रही। कम ग्राहकों के पहुंचने से दुकानदार भी मायूस रहे। लोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए घर से बाहर निकले। वहीं बूंदाबांदी के बाद लोगों की दिक्कतें और अधिक बढ़ गई।
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इससे फड़ों व ठेलों पर सामान लगाकर बेच रहे दुकानदारों ने सामान को बूंदों से बचाने के लिए त्रिपाल आदि से ठक दिया। वहीं लोगों ने खुशनुमा मौसम का लुत्फ लेने के लिए घरों पर विभिन्न तरह के व्यंजनों को बनाया। साथ ही ठंड से बचने के लिए लोगों ने अंगीठी, हीटर आदि का सहारा लेना शुरू कर दिया है।