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नियमों के फेर मेें फंस गया सराफा बाजार
Updated Mon, 02 Oct 2017 10:31 PM IST
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एटा। जिले का सराफा बाजार नियमों के फेर में फंस गया है। नवरात्र और त्योहारी सीजन में सराफा बाजार में सन्नाटा पसरा रहा है। 50 हजार से अधिक के सोने पर पैन कार्ड की अनिवार्यता ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। इसके चलते सराफा कारोबारी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं।
नवरात्र के साथ ही त्योहारी सीजन शुरू हो गया है। नई कर व्यवस्था जीएसटी के साथ कानूनी बंदिशें इतनी हैं कि निवेशक परेशान हैं। नवरात्र के समय 40 फीसदी ग्राहकों की कमी हुई है। करवा चौथ को लेकर भी ग्राहक कम आ रहे हैं। दरअसल, एक अगस्त से सोने को धन शोधन रोकथाम अधिनियम के दायरे में ले लिया गया है। इसमें 50,000 रुपये से अधिक के आभूषण खरीदने पर पहचान-पत्र देना जरूरी है। इसके चलते खरीदार परेशान हैं। वह पहचान बताने को तैयार नहीं। इसलिए बाजार में गिरावट है। तमाम औपचारिकताओं से घिर जाने के बाद गोल्ड, डायमंड पर कानून का पहरा लग गया है। वहीं सराफा कारोबारी दुकानों पर खाली बैठे हैं।
अपनाया जा रहा नया हथकंडा
सोना खरीदने में पहचान पत्र की अनिवार्यता से बचने के लिए व्यापारियों ने नया हथकंडा अपनाया है। बहीखातों में यह दिखाते हुए आभूषण बेचे जा रहे हैं कि सोना ग्राहकों ने मुहैया कराया था और उन्होंने उसके गहने बनाकर बेचे हैं। इस तरीके से खरीदार अपनी पहचान देने से बच रहे हैं। इस पर तीन फीसदी जीएसटी और मेकिंग चार्ज लगाकर ग्राहक को बिल दे दिया जाता है।
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आयकर विभाग के नोटिस का डर
यदि कोई ग्राहक एक बार में दो लाख रुपये से अधिक की ज्वेलरी खरीदता है, ऐसे ग्राहकों को आयकर विभाग नोटिस भी भेज सकता है। ग्राहक से उसकी कमाई का जरिया भी पूछ सकता है, जिससे निवेशक और ग्राहक डरे हुए हैं।
इनका कहना है
बाजार में 40 फीसदी तक की गिरावट है। ग्राहक के पास नकदी का संकट है। नवरात्र के बाद दीवाली से आस है।
वीरेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष सराफा एसोसिएशन
पिछले साल की तुलना में इस बार नवरात्र में 10 फीसदी भी बिक्री नहीं हुई। कानून के डर के साथ नकदी का संकट है।
पवन जैन, सराफा कारोबारी
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नवरात्र के साथ ही त्योहारी सीजन शुरू हो गया है। नई कर व्यवस्था जीएसटी के साथ कानूनी बंदिशें इतनी हैं कि निवेशक परेशान हैं। नवरात्र के समय 40 फीसदी ग्राहकों की कमी हुई है। करवा चौथ को लेकर भी ग्राहक कम आ रहे हैं। दरअसल, एक अगस्त से सोने को धन शोधन रोकथाम अधिनियम के दायरे में ले लिया गया है। इसमें 50,000 रुपये से अधिक के आभूषण खरीदने पर पहचान-पत्र देना जरूरी है। इसके चलते खरीदार परेशान हैं। वह पहचान बताने को तैयार नहीं। इसलिए बाजार में गिरावट है। तमाम औपचारिकताओं से घिर जाने के बाद गोल्ड, डायमंड पर कानून का पहरा लग गया है। वहीं सराफा कारोबारी दुकानों पर खाली बैठे हैं।
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अपनाया जा रहा नया हथकंडा
सोना खरीदने में पहचान पत्र की अनिवार्यता से बचने के लिए व्यापारियों ने नया हथकंडा अपनाया है। बहीखातों में यह दिखाते हुए आभूषण बेचे जा रहे हैं कि सोना ग्राहकों ने मुहैया कराया था और उन्होंने उसके गहने बनाकर बेचे हैं। इस तरीके से खरीदार अपनी पहचान देने से बच रहे हैं। इस पर तीन फीसदी जीएसटी और मेकिंग चार्ज लगाकर ग्राहक को बिल दे दिया जाता है।
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आयकर विभाग के नोटिस का डर
यदि कोई ग्राहक एक बार में दो लाख रुपये से अधिक की ज्वेलरी खरीदता है, ऐसे ग्राहकों को आयकर विभाग नोटिस भी भेज सकता है। ग्राहक से उसकी कमाई का जरिया भी पूछ सकता है, जिससे निवेशक और ग्राहक डरे हुए हैं।
इनका कहना है
बाजार में 40 फीसदी तक की गिरावट है। ग्राहक के पास नकदी का संकट है। नवरात्र के बाद दीवाली से आस है।
वीरेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष सराफा एसोसिएशन
पिछले साल की तुलना में इस बार नवरात्र में 10 फीसदी भी बिक्री नहीं हुई। कानून के डर के साथ नकदी का संकट है।
पवन जैन, सराफा कारोबारी