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नगर निगम के अनुदान में एक करोड़ी की कटौती
Updated Sat, 30 Sep 2017 11:51 PM IST
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फिरोजाबाद। शासन ने नगर निगम प्रशासन को तगड़ा झटका दिया है। राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली ग्रांट में हर महीने एक करोड़ की कटौती कर दी है, जिससे अफसरों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
शासन द्वारा नगर निगम सीमा में विकास कार्यों, पेयजल, सफाई, प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों का बजट मुहैया कराया जाता है। राज्य वित्त आयोग के तहत नगर निगम को अब तक प्रतिवर्ष करीब 60 करोड़ का बजट प्राप्त हो रहा था। एक महीने में करीब 7.21 करोड़ की धनराशि नगर निगम को मिल रही थी।
इसमें करीब पांच से छह करोड़ की धनराशि तो अफसरों और कर्मचारियों के वेतन पर ही खर्च हो जाती थी। शेष बचने वाली धनराशि से निगम द्वारा विकास कार्य कराए जाते थे। सितंबर माह से शासन ने राज्य वित्त के तहत मिलने वाली ग्रांट में एक करोड़ की कटौती कर दी। सितंबर महीने में नगर निगम को राज्य वित्त के तहत 6.31 करोड़ का ही बजट मिला है। राज्य वित्त की ग्रांट में सीधे तौर पर एक करोड़ कटौती होने से अफसरों की नींद उड़ गई है।
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इस संबंध में लेखाधिकारी अक्षय कुमार का कहना है कि नगर निगम बनने के बाद शासन ने ग्रांट में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, जबकि निगम के खर्चों में निरंतर इजाफा हो रहा है। राज्य वित्त के तहत मिलने वाली ग्रांट में भी शासन ने एक करोड़ की कटौती कर दी है। अब ग्रांट कटने के बाद राज्य वित्त से कोई कार्य कराना संभव नहीं होगा।
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शासन द्वारा नगर निगम सीमा में विकास कार्यों, पेयजल, सफाई, प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों का बजट मुहैया कराया जाता है। राज्य वित्त आयोग के तहत नगर निगम को अब तक प्रतिवर्ष करीब 60 करोड़ का बजट प्राप्त हो रहा था। एक महीने में करीब 7.21 करोड़ की धनराशि नगर निगम को मिल रही थी।
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इसमें करीब पांच से छह करोड़ की धनराशि तो अफसरों और कर्मचारियों के वेतन पर ही खर्च हो जाती थी। शेष बचने वाली धनराशि से निगम द्वारा विकास कार्य कराए जाते थे। सितंबर माह से शासन ने राज्य वित्त के तहत मिलने वाली ग्रांट में एक करोड़ की कटौती कर दी। सितंबर महीने में नगर निगम को राज्य वित्त के तहत 6.31 करोड़ का ही बजट मिला है। राज्य वित्त की ग्रांट में सीधे तौर पर एक करोड़ कटौती होने से अफसरों की नींद उड़ गई है।
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इस संबंध में लेखाधिकारी अक्षय कुमार का कहना है कि नगर निगम बनने के बाद शासन ने ग्रांट में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, जबकि निगम के खर्चों में निरंतर इजाफा हो रहा है। राज्य वित्त के तहत मिलने वाली ग्रांट में भी शासन ने एक करोड़ की कटौती कर दी है। अब ग्रांट कटने के बाद राज्य वित्त से कोई कार्य कराना संभव नहीं होगा।