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कंस मारने से पूर्व श्रीकृष्ण-बलराम ने किए थे मां बंगलामुखी के दर्शन
Updated Wed, 17 Oct 2018 12:02 AM IST
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डैमो
मथुरा। शहर के पुराने बस स्टैंड के सामने स्थित है मां बंगलामुखी मंदिर। इसे अंबाखार के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं कि जब मथुरा में कंस की रंगभूमि सजी तब गोकुल से अक्रूर जी श्रीकृष्ण-बलराम को मथुरा लाए तो कंस को मारकर विजय हासिल करने के लिए दोनों भाइयों ने मां बंगलामुखी (अंबाखार) की आराधना की थी।
उधर, यह स्थान आगरा जेल तोड़कर आए शिवाजी की भी शरण स्थली रही है। मंदिर में मां की स्वयंभू प्रतिमा है। भक्त यहां भगवान विष्णु, श्रीगणपति, भैंरो बाबा, शनिदेव और महादेव परिवार आदि के भी दर्शन करते हैं। नवरात्र व प्रमुख पर्वों पर यहां दूर-दराज से आने वाले भक्तों का जमावड़ा देखा जा सकता है।
नवरात्र के दिनों में शाम को होने वाली महाआरती प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहती है। महंत वीरू पंडा ने कहा कि धर्मग्रंथों में मां की महिमा का वर्णन उल्लेखित है। भगवान श्रीकृष्ण व बलराम दोनों भाइयों ने मां की भक्ति की और यहां फल पाया।
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उधर, यह स्थान आगरा जेल तोड़कर आए शिवाजी की भी शरण स्थली रही है। मंदिर में मां की स्वयंभू प्रतिमा है। भक्त यहां भगवान विष्णु, श्रीगणपति, भैंरो बाबा, शनिदेव और महादेव परिवार आदि के भी दर्शन करते हैं। नवरात्र व प्रमुख पर्वों पर यहां दूर-दराज से आने वाले भक्तों का जमावड़ा देखा जा सकता है।
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नवरात्र के दिनों में शाम को होने वाली महाआरती प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहती है। महंत वीरू पंडा ने कहा कि धर्मग्रंथों में मां की महिमा का वर्णन उल्लेखित है। भगवान श्रीकृष्ण व बलराम दोनों भाइयों ने मां की भक्ति की और यहां फल पाया।
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