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2010 और 2013 में हुई थी बड़ी तबाही
Updated Fri, 10 Aug 2018 11:10 PM IST
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2010 और 2013 में हुई थी बड़ी तबाही
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। गंगा की बाढ़ से जिले में वर्ष 2010 एवं 2013 में गंगा तटवर्ती गांव में बाढ़ का प्रकोप हुआ। यह बाढ़ सर्वाधिक डार्क जोन लेवल की बाढ़ थी। जिसमें 6 लाख क्यूसेक से अधिक पानी का डिस्चार्ज हुआ था। इस बाढ़ ने पूरे जिले में तबाही मचा दी थी। पूरे जिले के संपर्क मार्ग बाढ़ में कट गए। जगह जगह खाईयां बन गईं। काफी जान माल का नुकसान हुआ। जिले में 2013 में सर्वाधिक 610859 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हुआ था। बाढ़ में कासगंज-बरेली मार्ग भी क्षतिग्रस्त हुआ। जिसमें एक रेल का इंजन जमींदोज हो गया।
जिले का फ्लड लेबल-
लो फ्लड- एक लाख से डेढ़ लाख क्यूसेक।
मीडियम फ्लड- डेढ़ लाख से 2 लाख क्यूसेक।
डेंजर फ्लड- 2 लाख से ढाई लाख क्यूसेक।
हाई फ्लड- ढाई लाख से 3 लाख क्यूसेक।
डार्क फ्लड लेबल- 3 लाख से ऊपर।
स्वास्थ्य विभाग और पशु चिकित्सा विभाग निष्क्रिय
कासगंज। शुक्रवार को यह प्रभाव और अधिक बढ़ गया। बावजूद अभी तक स्वास्थ्य विभाग एवं पशु चिकित्सा विभाग की सक्रियता नजर नहीं आ रही। बाढ़ के प्रभाव के कारण पशुओं में तमाम रोग फैलते हैं। अभी तक पशु चिकित्सकों की टीम भी ग्रामीण इलाकों में नहीं हैं। वहीं जगह जगह जलभराव होने के कारण मच्छर पनप रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय नजर नहीं आ रहा।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने किया दौरा
कासगंज। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता कमलेश कुमार सिंह एवं सहायक अभियंता ने जूनियर इंजीनियर व अन्य कर्मियों के साथ बाढ़ प्रभावित नगला हंसी, कादरगंज, उढ़ेर, दतलाना सहित अन्य ग्रामीण इलाकों में भी दौरा किया।
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श्रद्धालुओं की बढ़ी मुश्किलें
कासगंज। लहरा और कछला गंगाघाट पर जलस्तर में वृद्धि होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी का सामना श्रद्धालुओं को करना पड़ रहा है। इन दिनों कांवड़ मेला चल रहा है। ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं को दिक्कतें होतीं हैं। गंगा घाटों पर कांवड़ियों की सुरक्षा के इंतजाम भी किए गए हैं।
पनसौती मार्ग पर पहुंचा पानी
कासगंज। गंगा की बाढ़ का पानी पनसौती मार्ग पर भी पहुंच गया है। सड़क पर बाढ़ का पानी होने के कारण सड़क क्षतिग्रस्त होने लगी है। बाढ़ के पानी के कारण नगला बक्सी, नगला डंबर, नगला खुद्र, जिनौल, हाफिजगंज सहित कई गांव संपर्क आपस में कट गया है।
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जिले का फ्लड लेबल-
लो फ्लड- एक लाख से डेढ़ लाख क्यूसेक।
मीडियम फ्लड- डेढ़ लाख से 2 लाख क्यूसेक।
डेंजर फ्लड- 2 लाख से ढाई लाख क्यूसेक।
हाई फ्लड- ढाई लाख से 3 लाख क्यूसेक।
डार्क फ्लड लेबल- 3 लाख से ऊपर।
स्वास्थ्य विभाग और पशु चिकित्सा विभाग निष्क्रिय
कासगंज। शुक्रवार को यह प्रभाव और अधिक बढ़ गया। बावजूद अभी तक स्वास्थ्य विभाग एवं पशु चिकित्सा विभाग की सक्रियता नजर नहीं आ रही। बाढ़ के प्रभाव के कारण पशुओं में तमाम रोग फैलते हैं। अभी तक पशु चिकित्सकों की टीम भी ग्रामीण इलाकों में नहीं हैं। वहीं जगह जगह जलभराव होने के कारण मच्छर पनप रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय नजर नहीं आ रहा।
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने किया दौरा
कासगंज। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता कमलेश कुमार सिंह एवं सहायक अभियंता ने जूनियर इंजीनियर व अन्य कर्मियों के साथ बाढ़ प्रभावित नगला हंसी, कादरगंज, उढ़ेर, दतलाना सहित अन्य ग्रामीण इलाकों में भी दौरा किया।
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श्रद्धालुओं की बढ़ी मुश्किलें
कासगंज। लहरा और कछला गंगाघाट पर जलस्तर में वृद्धि होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी का सामना श्रद्धालुओं को करना पड़ रहा है। इन दिनों कांवड़ मेला चल रहा है। ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं को दिक्कतें होतीं हैं। गंगा घाटों पर कांवड़ियों की सुरक्षा के इंतजाम भी किए गए हैं।
पनसौती मार्ग पर पहुंचा पानी
कासगंज। गंगा की बाढ़ का पानी पनसौती मार्ग पर भी पहुंच गया है। सड़क पर बाढ़ का पानी होने के कारण सड़क क्षतिग्रस्त होने लगी है। बाढ़ के पानी के कारण नगला बक्सी, नगला डंबर, नगला खुद्र, जिनौल, हाफिजगंज सहित कई गांव संपर्क आपस में कट गया है।