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अब बुखार ने ली बालिका की जान
Updated Mon, 20 Aug 2018 10:31 PM IST
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मैनपुरी। जिले में संक्रामक बीमारियां लगातार फैल रहीं हैं। अस्पताल में लगभग हर दूसरे दिन संक्रामक बीमारी से मरीज की मौत हो रही है। इसके बाद भी विभाग संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं कर रहा है। जिला अस्पताल पहुंची एक और बालिका ने बुखार से पीड़ित होने पर दम तोड़ दिया।
जिला अस्पताल में सोमवार को सुबह से ही मरीजों की भीड़ रही। अस्पताल में संक्रामक बीमारियों से पीड़ित होने पर 336 मरीजों को प्राथमिक उपचार दिलाया गया, जबकि 21 मरीजों को गंभीर हालत के चलते बुखार, डायरिया और पेटदर्द से पीड़ित होने पर भर्ती कराया गया। कस्बा कुरावली निवासी पुष्पेंद्र सिंह की नौ माह की बच्ची अरचू को पिछले कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। परिजन उसका एक निजी डॉक्टर के यहां उपचार करा रहे थे। सोमवार को हालत बिगड़ी तो परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉ. अनुज कुमार ने बताया कि बच्ची की हालत चिंताजनक थी। परिजन उसका कहीं दूसरी जगह उपचार कराते रहे। जब बच्ची की मौत हो गई तब अस्पताल लेकर पहुंचे।
जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड पर यदि नजर डाली जाए तो संक्रामक बीमारियों से अकेले जिला अस्पताल में ही एक महीने में 17 मरीजों की मौत हो चुकी है, जो एक चिंता का विषय है। इसके बाद भी जनपद का स्वास्थ्य विभाग कुछ ध्यान नहीं दे रहा है। एक तरफ जहां संक्रामक बीमारियां फैल रहीं हैं वहीं दूसरी ओर बीमारियों के लिए आवश्यक दवाइयां जिला अस्पताल में नहीं हैं। अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों के संबंध में जब जानकारी ली गई तो पता चला कि यहां सिप्लाक्स, सिप्रोफ्लोक्सासिन, मेट्रोजिल, सेप्ट्रान, सीपीएम आदि दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। यहां तक कि दुर्घटना में घायल होकर आने वालों के लिए बीटाडीन लोशन, बीटाडीन ऑल्टमेट भी नहीं है। सबसे बड़ी हैरत की बात तो यह है कि बीगो लगाने के लिए टैप की जरूरत पड़ती है वह भी जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं है।
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जिला अस्पताल में सोमवार को सुबह से ही मरीजों की भीड़ रही। अस्पताल में संक्रामक बीमारियों से पीड़ित होने पर 336 मरीजों को प्राथमिक उपचार दिलाया गया, जबकि 21 मरीजों को गंभीर हालत के चलते बुखार, डायरिया और पेटदर्द से पीड़ित होने पर भर्ती कराया गया। कस्बा कुरावली निवासी पुष्पेंद्र सिंह की नौ माह की बच्ची अरचू को पिछले कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। परिजन उसका एक निजी डॉक्टर के यहां उपचार करा रहे थे। सोमवार को हालत बिगड़ी तो परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉ. अनुज कुमार ने बताया कि बच्ची की हालत चिंताजनक थी। परिजन उसका कहीं दूसरी जगह उपचार कराते रहे। जब बच्ची की मौत हो गई तब अस्पताल लेकर पहुंचे।
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जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड पर यदि नजर डाली जाए तो संक्रामक बीमारियों से अकेले जिला अस्पताल में ही एक महीने में 17 मरीजों की मौत हो चुकी है, जो एक चिंता का विषय है। इसके बाद भी जनपद का स्वास्थ्य विभाग कुछ ध्यान नहीं दे रहा है। एक तरफ जहां संक्रामक बीमारियां फैल रहीं हैं वहीं दूसरी ओर बीमारियों के लिए आवश्यक दवाइयां जिला अस्पताल में नहीं हैं। अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों के संबंध में जब जानकारी ली गई तो पता चला कि यहां सिप्लाक्स, सिप्रोफ्लोक्सासिन, मेट्रोजिल, सेप्ट्रान, सीपीएम आदि दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। यहां तक कि दुर्घटना में घायल होकर आने वालों के लिए बीटाडीन लोशन, बीटाडीन ऑल्टमेट भी नहीं है। सबसे बड़ी हैरत की बात तो यह है कि बीगो लगाने के लिए टैप की जरूरत पड़ती है वह भी जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं है।
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