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पांच साल तक नहीं मिलेगी स्कूलों को मान्यता
Updated Wed, 19 Jul 2017 11:21 PM IST
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School
मैनपुरी। हाईकोर्ट के निर्देश पर शासन ने कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों को पांच साल तक मान्यता न देने का निर्णय लिया है। इतना ही नहीं पांच साल तक नए सरकारी स्कूल भी नहीं खुलेंगे। इसका कारण वर्तमान में चल रहे सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों में ही पढ़ाई का स्तर सुधारना है।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले परिपूर्णानंद त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में उप्र सरकार के खिलाफ याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि वर्तमान में चल रहे सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलाें में शिक्षा का स्तर काफी खराब है। इसके चलते नए स्कूलों को मान्यता न दी जाए और न ही सरकारी नए स्कूल खोले जाएं। वर्तमान चल रहे स्कूलों पर ध्यान दिया जाए। इन्हीं स्कूलों का शिक्षण कार्य बेहतर कराया जाए। इस पर हाईकोर्ट ने निर्णय लिया कि पांच साल तक कक्षा एक से आठ तक नए स्कूलों को मान्यता नहीं दी जाएगी। इस संबंध में हाईकोर्ट ने शासन के अपर मुख्य सचिव राजप्रताप सिंह को निर्देश जारी किए। इसमें कहा कि पांच साल तक किसी भी नए स्कूल को मान्यता न दी जाए। साथ ही सरकारी नए स्कूल भी न खोले जाएं।
शासन ने अपर मुख्य सचिव ने उक्त निर्देश बीएसए कार्यालय में भेज कर इस संबंध में बीएसए को भी अवगत करा दिया है। बता दें कि जिले में वर्तमान में सरकारी स्कूल 2186 हैं। मान्यता प्राप्त जूनियर 523 और प्राइमरी के 863 स्कूल संचालित हैं।
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53 नए स्कूलों ने मान्यता के लिए किया आवेदन
बेसिक शिक्षा विभाग में अभी तक 53 नए स्कूल मान्यता के लिए आवेदन कर चुके हैं। इनमें 15 प्राइमरी और 43 जूनियर के स्कूल शामिल हैं। प्राइमरी स्कूल के लिए 2000 रुपये और जूनियर स्कूल के लिए 3000 रुपये का आवेदन शुल्क भी बैंक जमा कर चुके हैं। मान्यता पर रोक लगने के चलते यह आवेदन अब निरस्त हो जाएंगे।
बीएसए विजयप्रताप सिंह का कहना है कि शासन के अपर मुख्य सचिव का पत्र मिल चुका है। इस संबंध में उन्होंने सभी खंड शिक्षाधिकारियाें को भी अवगत करा दिया है। मान्यता के आवेदन लेना भी बंद कर दिए हैं।
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उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले परिपूर्णानंद त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में उप्र सरकार के खिलाफ याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि वर्तमान में चल रहे सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलाें में शिक्षा का स्तर काफी खराब है। इसके चलते नए स्कूलों को मान्यता न दी जाए और न ही सरकारी नए स्कूल खोले जाएं। वर्तमान चल रहे स्कूलों पर ध्यान दिया जाए। इन्हीं स्कूलों का शिक्षण कार्य बेहतर कराया जाए। इस पर हाईकोर्ट ने निर्णय लिया कि पांच साल तक कक्षा एक से आठ तक नए स्कूलों को मान्यता नहीं दी जाएगी। इस संबंध में हाईकोर्ट ने शासन के अपर मुख्य सचिव राजप्रताप सिंह को निर्देश जारी किए। इसमें कहा कि पांच साल तक किसी भी नए स्कूल को मान्यता न दी जाए। साथ ही सरकारी नए स्कूल भी न खोले जाएं।
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शासन ने अपर मुख्य सचिव ने उक्त निर्देश बीएसए कार्यालय में भेज कर इस संबंध में बीएसए को भी अवगत करा दिया है। बता दें कि जिले में वर्तमान में सरकारी स्कूल 2186 हैं। मान्यता प्राप्त जूनियर 523 और प्राइमरी के 863 स्कूल संचालित हैं।
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53 नए स्कूलों ने मान्यता के लिए किया आवेदन
बेसिक शिक्षा विभाग में अभी तक 53 नए स्कूल मान्यता के लिए आवेदन कर चुके हैं। इनमें 15 प्राइमरी और 43 जूनियर के स्कूल शामिल हैं। प्राइमरी स्कूल के लिए 2000 रुपये और जूनियर स्कूल के लिए 3000 रुपये का आवेदन शुल्क भी बैंक जमा कर चुके हैं। मान्यता पर रोक लगने के चलते यह आवेदन अब निरस्त हो जाएंगे।
बीएसए विजयप्रताप सिंह का कहना है कि शासन के अपर मुख्य सचिव का पत्र मिल चुका है। इस संबंध में उन्होंने सभी खंड शिक्षाधिकारियाें को भी अवगत करा दिया है। मान्यता के आवेदन लेना भी बंद कर दिए हैं।