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कैंसर पीड़ितों को नहीं मिला इलाज, 54 लाख की जल गई बिजली
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कैंसर यूनिट
- फोटो : DEMO
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मैनपुरी। जिले में कैंसर पीड़ितों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए 13 साल पहले कैंसर यूनिट की स्थापना की गई थी। इस यूनिट में आज तक किसी भी मरीज को इलाज नहीं मिला। करोड़ों रुपये से खरीदी गईं मशीनें कबाड़ हो रही हैं। बिना यूनिट संचालन के ही स्वास्थ्य विभाग को 54 लाख रुपये बिजली बिल का भी भुगतान करना पड़ा है।
वर्ष 2005 में कैंसर यूनिट के लिए सात करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। 2010 में कार्यदायी संस्था सीमेंस ने निर्माण कार्य पूरा कर लिया। दो करोड़ की लागत से 2010 में यहां कैंसर के उपचार के लिए मशीनों की स्थापना कराई गई। डॉक्टरों की तैनाती न होने के कारण जिले के लोगों को एक दिन क्या एक घंटे का भी उपचार नहीं मिल सका। कैंसर यूनिट के नाम पर विभाग लाखों रुपये पानी की तरह से बहा रहा है। कैंसर यूनिट के नाम से बिजली विभाग का जो कनेक्शन है, उसमें स्वास्थ्य विभाग लाखों रुपये खर्च कर रहा है।
वर्ष 2016 से पहले का 14 लाख का विद्युत बिल सीएमएस ने भुगतान किया। अब 2016 से अब तक एकबार फिर 40 लाख के बकाया बिल भुगतान के लिए शनिवार को सीएमएस ने ट्रेजरी को चेक भेज दिया। जिले के लोगों के लिए ये सबसे बड़ी परेशानी की बात है कि जिस कैंसर यूनिट ने रत्ती भर भी उपचार नहीं दिया, उससे 54 लाख रुपया बिजली के बिल के रूप में अदा किया जा रहा है।
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दो लाख रुपये मशीनों की मरम्मत पर हुए थे खर्च
पिछली सपा सरकार में कैंसर यूनिट को संचालित कराने का प्रयास किया गया था। तब वर्ष 2015 में मशीनों की मरम्मत के लिए दो लाख रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद भी यूनिट को शुरू नहीं किया जा सका। यूनिट से जिले के लोगों को कोई उपचार तो नहीं मिल रहा है, लेकिन यूनिट के लिए हर वर्ष लाखों खर्च हो रहे हैं।
जिले में बड़ी संख्या में हैं कैंसर रोगी
जिले में कैंसर के मरीजों की अधिकता को देखते हुए ही शासन ने यहां कैंसर यूनिट स्थापित कराया था। डॉक्टरों की तैनाती न होने के कारण जिले के कैंसर पीड़ितों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। जिस कार्य के लिए कैंसर यूनिट की स्थापना कराई गई थी उसमें सफलता नहीं मिल पा रही है।
शासन को कैंसर यूनिट संचालन के लिए पत्र लिखा गया था। अब शासन के निर्देश पर कार्यदायी संस्था को पत्र लिखा गया है कि वे यूनिट को उनके हैंडओवर करें और अपने इंजीनियर बुलाकर जांच कराएं कि यूनिट में स्थापित की गई मशीनें किस हालत में हैं। बिजली विभाग के मानक के अनुसार जो बिल आ रहा है उसका भुगतान करने के लिए चेक ट्रेजरी भेज दिया गया है।
डॉ. आरके सागर, सीएमएस
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वर्ष 2005 में कैंसर यूनिट के लिए सात करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। 2010 में कार्यदायी संस्था सीमेंस ने निर्माण कार्य पूरा कर लिया। दो करोड़ की लागत से 2010 में यहां कैंसर के उपचार के लिए मशीनों की स्थापना कराई गई। डॉक्टरों की तैनाती न होने के कारण जिले के लोगों को एक दिन क्या एक घंटे का भी उपचार नहीं मिल सका। कैंसर यूनिट के नाम पर विभाग लाखों रुपये पानी की तरह से बहा रहा है। कैंसर यूनिट के नाम से बिजली विभाग का जो कनेक्शन है, उसमें स्वास्थ्य विभाग लाखों रुपये खर्च कर रहा है।
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वर्ष 2016 से पहले का 14 लाख का विद्युत बिल सीएमएस ने भुगतान किया। अब 2016 से अब तक एकबार फिर 40 लाख के बकाया बिल भुगतान के लिए शनिवार को सीएमएस ने ट्रेजरी को चेक भेज दिया। जिले के लोगों के लिए ये सबसे बड़ी परेशानी की बात है कि जिस कैंसर यूनिट ने रत्ती भर भी उपचार नहीं दिया, उससे 54 लाख रुपया बिजली के बिल के रूप में अदा किया जा रहा है।
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दो लाख रुपये मशीनों की मरम्मत पर हुए थे खर्च
पिछली सपा सरकार में कैंसर यूनिट को संचालित कराने का प्रयास किया गया था। तब वर्ष 2015 में मशीनों की मरम्मत के लिए दो लाख रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद भी यूनिट को शुरू नहीं किया जा सका। यूनिट से जिले के लोगों को कोई उपचार तो नहीं मिल रहा है, लेकिन यूनिट के लिए हर वर्ष लाखों खर्च हो रहे हैं।
जिले में बड़ी संख्या में हैं कैंसर रोगी
जिले में कैंसर के मरीजों की अधिकता को देखते हुए ही शासन ने यहां कैंसर यूनिट स्थापित कराया था। डॉक्टरों की तैनाती न होने के कारण जिले के कैंसर पीड़ितों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। जिस कार्य के लिए कैंसर यूनिट की स्थापना कराई गई थी उसमें सफलता नहीं मिल पा रही है।
शासन को कैंसर यूनिट संचालन के लिए पत्र लिखा गया था। अब शासन के निर्देश पर कार्यदायी संस्था को पत्र लिखा गया है कि वे यूनिट को उनके हैंडओवर करें और अपने इंजीनियर बुलाकर जांच कराएं कि यूनिट में स्थापित की गई मशीनें किस हालत में हैं। बिजली विभाग के मानक के अनुसार जो बिल आ रहा है उसका भुगतान करने के लिए चेक ट्रेजरी भेज दिया गया है।
डॉ. आरके सागर, सीएमएस