फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   सूखी नहरें और रजबहा, टेल तक नहीं पहुंचता पानी

सूखी नहरें और रजबहा, टेल तक नहीं पहुंचता पानी

Sun, 25 Nov 2018 10:32 PM IST
Updated Sun, 25 Nov 2018 10:32 PM IST
विज्ञापन
सूखी नहरें और रजबहा, टेल तक नहीं पहुंचता पानी

विज्ञापन
कासगंज। जिले में चारों तरफ नहर और रजवाहों का जाल बिछा हुआ है फिर भी खेती प्यासी है। गोरहा नहर, हजारा नहर सहित अधिकांश रजवाहे सूखे पड़े हैं टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। निशुल्क सिंचाई के नाम पर किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। किसानों को निजी संसाधनों से महंगी सिंचाई करनी पड़ रही है।

किसानों के सामने आए दिन कोई न कोई समस्या खड़ी हो जाती है। कभी प्रकृति की मार से किसान परेशान रहते हैं तो कभी कृषि उत्थान के जिम्मेदार विभाग उनकी समस्या बढ़ा देते हैं। इन दिनों रबी की फसल की बुवाई चल रही है। किसानों को बुवाई से पहले खेतों की पलेवा करनी होती है। जिससे खेतों में नमी हो जाने के कारण जुताई आसान हो जाए और मिट्टी में जैविक तत्व बढ़ सकें।
विज्ञापन


जिले का अधिकांश कृषि योग्य क्षेत्रफल नहर और रजवाहों से सिंचाई पर आश्रित है। सिंचाई के लिए सबसे अधिक उपयोगी गोरहा नहर है। गोरहा से फर्रुखाबाद की सीमा तक लगभग 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसी नहर से किसान निशुल्क सिंचाई करते है। क्योंकि नहर और रजवाहों से सिंचाई लगान मुक्त है। इन दिनों गोरहा नहर सहित सभी रजवाहे सूखे पड़े हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



ऐसे में निशुल्क सिंचाई सिर्फ छलावा बनकर रह गई है। किसान निजी संसाधनों से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। यह सिंचाई काफी महंगी होती है। निजी नलकूप के अलावा पंपसेट से सिंचाई करने से काफी लागत बढ़ जाती है। फतेहपुर, पावलडेरा, नगला हीरा, गोरहा, ब्रह्मपुरी, पहाड़पुर सहित तमाम गांव के ग्रामीण सिंचाई विभाग की इस मनमानी पर आक्रोशित भी हैं।


पुलिया निर्माण में ठहरा पानी
कासगंज। गोरहा नहर में पानी ठहरा हुआ है। इसके पीछे किसान कारण बता रहे हैं कि गांव चाड़ी के पास पुलिया का निर्माण चल रहा है। पुलिया का निर्माण प्रभावित न हो इसलिए नहर में पानी नहीं छोड़ा जा रहा।


- 95 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल है कृषि भूमि।
- 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि सिंचाई के लिए गोरहा नहर पर निर्भर।
- 300 रुपये प्रति बीघा होता है निजी सिंचाई पर खर्च।
- 5 लाख 10 हजार बीघा सिंचाई हुई है प्रभावित।
- नहरों में पानी रोस्टर के अनुसार छोड़ा जाता है। फिलहाल बांध पर पानी रोकने का रोस्टर है। अगले माह के प्रारंभ में नहरों में पानी पहुंच जाएगा- कमलेश कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed