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छटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज
Updated Fri, 27 Jul 2018 11:06 PM IST
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गोवर्धन (मथुरा)। मुख पर राधे-राधे के स्वर और सिर पर थैला, बरसात से तर-बतर बदन और भीगे कपड़े, न बरसात की परवाह और न भीगने का डर, बस लालसा थी तो अपने आराध्य श्री गिरिराज जी की एक झलक पाने की। शुक्रवार को मुड़िया पूर्णिमा मेले में भक्तों की आस्था बरसात पर हावी दिखी। यही कारण रहा कि मात्र सात दिनों में भक्तोें का यह रैला 70 लाख परिक्रमार्थियों के यहां आने के आंकड़े को छू गया।
शुक्रवार को मुड़िया पूर्णिमा मेले में आस्था का ज्वार अभी भी थमा नहीं है। भले ही शोभायात्रा के साथ मेले का समापन हो गया हो, लेकिन अभी भी परिक्रमा करने की ओर बढ़ते कदम थम नहीं रहे हैं। बिना किसी परवाह के भक्तों का गोवर्धन आना जारी है। मेले की शुरूआत 21 जुलाई से ही हो गई। समापन 27 जुलाई को मुड़िया शोभायात्रा के साथ हुआ।
गिरिराज महाराज की तलहटी में लगातार 30 घंटे हुई बारिश भी श्रद्धालुओं के कदम रोक नहीं सकी। गिरिराज महाराज की तलहटी में आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। एक अनुमान के मुताबिक सात दिन तक चली इस परिक्रमा में करीब 70 लाख श्रद्धालु परिक्रमा कर चुके हैं। प्रसिद्ध गिरिराज दानघाटी मंदिर, मानसी गंगा मुकुट मुखारविंद मंदिर, जतीपुरा मुखारविंद मंदिर, हरिगोकुल मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर आदि पर श्रद्धालुओं ने दुग्धाभिषेक कर मनौती मांगी।
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भक्तों ने आन्यौर, पूंछरी, जतीपुरा, राधाकुंड, मानसी गंगा में जलभराव से होकर परिक्रमा लगाई। मानसी गंगा पर लगे फव्वारों में स्नान कर भक्त स्वयं को आनंदित महसूस कर रहे थे। बरसात से मौसम सुहावना होने के कारण अभी भी परिक्रमार्थियों का रैला इस ओर उमड़ रहा है।
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शुक्रवार को मुड़िया पूर्णिमा मेले में आस्था का ज्वार अभी भी थमा नहीं है। भले ही शोभायात्रा के साथ मेले का समापन हो गया हो, लेकिन अभी भी परिक्रमा करने की ओर बढ़ते कदम थम नहीं रहे हैं। बिना किसी परवाह के भक्तों का गोवर्धन आना जारी है। मेले की शुरूआत 21 जुलाई से ही हो गई। समापन 27 जुलाई को मुड़िया शोभायात्रा के साथ हुआ।
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गिरिराज महाराज की तलहटी में लगातार 30 घंटे हुई बारिश भी श्रद्धालुओं के कदम रोक नहीं सकी। गिरिराज महाराज की तलहटी में आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। एक अनुमान के मुताबिक सात दिन तक चली इस परिक्रमा में करीब 70 लाख श्रद्धालु परिक्रमा कर चुके हैं। प्रसिद्ध गिरिराज दानघाटी मंदिर, मानसी गंगा मुकुट मुखारविंद मंदिर, जतीपुरा मुखारविंद मंदिर, हरिगोकुल मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर आदि पर श्रद्धालुओं ने दुग्धाभिषेक कर मनौती मांगी।
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भक्तों ने आन्यौर, पूंछरी, जतीपुरा, राधाकुंड, मानसी गंगा में जलभराव से होकर परिक्रमा लगाई। मानसी गंगा पर लगे फव्वारों में स्नान कर भक्त स्वयं को आनंदित महसूस कर रहे थे। बरसात से मौसम सुहावना होने के कारण अभी भी परिक्रमार्थियों का रैला इस ओर उमड़ रहा है।