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अब निगम उठाएगा बंदरों को पकड़ने का ठेका
Updated Wed, 20 Jun 2018 08:24 PM IST
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डमी
- फोटो : self
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मथुरा। नगर निगम जल्द ही बंदरों के उत्पात से मुक्ति दिलाने जा रहा है। उसने बंदर पकड़ने के लिए ठेका उठाने का निर्णय लिया है। इसके माध्यम से निगम बंदरों को शहर से दूर भिजवा सकेगा। निगम ने इसके लिए वन विभाग से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलते ही उसके द्वारा ठेका उठाकर बंदर पकड़वाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
विगत कैबिनेट बैठक में पार्षदों ने बंदरों के उत्पात के मुद्दे को जोर शोर से उठाया था। निगम के अधिकारियों ने वायदा किया था कि वह जल्द ही बंदरों के उत्पात के लिए उनसे निपटने की योजना तैयार करेगी। कयास लगाया जा रहा है कि 27 जून को निगम की बोर्ड बैठक होगी। बोर्ड बैठक में जवाब देने से पहले निगम के अधिकारियों ने बंदर पकड़ने का ठेका उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उसने बंदर पकड़ने के लिए दरें मांगी हैं। इन दरों के आधार पर वह बंदर पकड़वाने का ठेका देगा।
जानकारी रहे विगत वर्ष नगर पालिका के कार्यकाल में वृंदावन में 250 रुपये प्रति बंदर का ठेका लिया गया था तथा बंदरों को खिलाने पिलाने के लिए 100 रुपये अलग से लिए गए थे। उधर, निगम ने वन विभाग से बंदरों को पकड़ने की अनुमति मांगी है। निगम ने पूछा है कि वन विभाग बताए कि वह बंदरों को कहां छुड़वाए। जानकारी रहे एक बार बंदर पकड़ने वालों ने बंदरों को छाता के आसपास छोड़ दिया था बंदर लौटकर वृंदावन आ गए थे।
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विगत कैबिनेट बैठक में पार्षदों ने बंदरों के उत्पात के मुद्दे को जोर शोर से उठाया था। निगम के अधिकारियों ने वायदा किया था कि वह जल्द ही बंदरों के उत्पात के लिए उनसे निपटने की योजना तैयार करेगी। कयास लगाया जा रहा है कि 27 जून को निगम की बोर्ड बैठक होगी। बोर्ड बैठक में जवाब देने से पहले निगम के अधिकारियों ने बंदर पकड़ने का ठेका उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उसने बंदर पकड़ने के लिए दरें मांगी हैं। इन दरों के आधार पर वह बंदर पकड़वाने का ठेका देगा।
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जानकारी रहे विगत वर्ष नगर पालिका के कार्यकाल में वृंदावन में 250 रुपये प्रति बंदर का ठेका लिया गया था तथा बंदरों को खिलाने पिलाने के लिए 100 रुपये अलग से लिए गए थे। उधर, निगम ने वन विभाग से बंदरों को पकड़ने की अनुमति मांगी है। निगम ने पूछा है कि वन विभाग बताए कि वह बंदरों को कहां छुड़वाए। जानकारी रहे एक बार बंदर पकड़ने वालों ने बंदरों को छाता के आसपास छोड़ दिया था बंदर लौटकर वृंदावन आ गए थे।
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