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बजट को तरसती रही जिला योजना
Updated Mon, 26 Mar 2018 11:06 PM IST
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प्रदेश सरकार ने विकास को लेकर तमाम योजनाएं लागू की, लेकिन बजट के अभाव में जिले में विकास कार्य अटके रहे। जिला योजना बजट के लिए पूरी साल तरसती रह गई, तो तमाम नई सरकारी योजनाओं को भी नियमों के अनुरूप बजट नहीं मिल सका। इसके चलते विकास कार्यों के प्रस्ताव अधूरे रह गए।
जिले में वर्ष 2017-18 में 206 करोड़ रुपये की जिला योजना आवंटित की गई थी। इसे लेकर तमाम विभागों के प्रस्तावों के साथ बजट भी आवंटित किया था लेकिन शासन की ओर से साल भर में जिला योजना को महज 121 करोड़ रुपये ही मिल सके। इसके बाद विभागों ने योजना के तहत साल भर में 120 करोड़ रुपये खर्च किए। जबकि 181 लाख रुपये अवशेष हैं।
नई सरकारी योजना पर प्रदेश सरकार की मेहरबानी भी कुछ खास नहीं रही। इसके लिए आवंटित 405 करोड़ रुपये में से 186 करोड़ का बजट मिल सका। जबकि 141 करोड़ रुपये ही खर्च किए। बजट नहीं मिलने से जिले में तमाम सरकारी योजनाएं परवान नहीं चढ़ सकीं। जबकि पहले से संचालित योजनाओं पर सरकार ने खूब धनवर्षा की। इस दौरान 658 करोड़ में से 622 करोड़ रुपये आवंटित हुए और 554 करोड़ रुपये खर्च भी हो गए। अब वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है। ऐसे में जिला योजना के तहत कोई विकास कार्य शुरू होने की गुंजाइश भी नहीं है। मगर एक बात तय है कागजों पर तैयार की गईं योजनाओं के तहत अगर बजट मिलता तो जिले की तस्वीर बदल सकती थी।
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कुछ यूं तय हुआ था बजट
जिला योजना वर्ष 2017-18 में रोजगार कार्यक्रम के लिए 48.28 करोड़, ग्रामीण आवास को 36.90 करोड़, सड़क.पुल को 24.84 करोड़, ग्रामीण जलापूर्ति.स्वच्छता के लिए 21.63 करोड़, पंचायती राज. 13.80 करोड़, प्राथमिक शिक्षा. 8.40 करोड़, माध्यमिक शिक्षा. 5.36 करोड,़ ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम. 5,79 करोड़, कृषक सहायता. पांच करोड़, पशुपालन. 5.53 करोड़, दुग्ध विकास 2.78 करोड़, वन विभाग 1.08 करोड़, ग्राम्य विकास 3.14 ीकरोड़, भूमि एवं जल संसाधन 50 लाख, कृषि 30 लाख, निजी लघु सिंचाई 3.56 करोड़, राजकीय लघु सिंचाई 66.45 लाख, अतिरिक्त ऊर्जा स्त्रोत 1.09 करोड़, पर्यटन एक करोड़, उच्च शिक्षा 20 लाख, ऐलोपैथी. 30 लाख, पिछड़ी जाति कल्याण 1.45 करोड़ और समाज कल्याण को 3.95 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था, लेकिन बजट नहीं मिलने से योजनाएं अधर में लटकी रहीं।
वर्ष 2017-18 की जिला योजना तो बजट के अभाव में झूलती रही, लेकिन नई जिला योजना से जिले को काफी उम्मीदें हैं। इस बार शासन ने 217 करोड़ रुपये की जिला योजना के प्रस्ताव मांगे हैं। जिनको तैयार किया जा रहा है।
ये हैं आंकड़े
206 करोड़ रुपये की थी जिला योजना
121 करोड़ आवंटित
120 करोड़ हुए खर्च
59.05 फीसदी मिला जिला योजना को बजट
आवंटित बजट के सापेक्ष आए अवमुक्त बजट को संपूर्ण जिले के विकास पर खर्च किया गया है। अब नई जिला योजना को तैयारी हो रही है।
- रमेश चंद्र, डीएसटीओ
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प्रदेश सरकार ने विकास को लेकर तमाम योजनाएं लागू की, लेकिन बजट के अभाव में जिले में विकास कार्य अटके रहे। जिला योजना बजट के लिए पूरी साल तरसती रह गई, तो तमाम नई सरकारी योजनाओं को भी नियमों के अनुरूप बजट नहीं मिल सका। इसके चलते विकास कार्यों के प्रस्ताव अधूरे रह गए।
जिले में वर्ष 2017-18 में 206 करोड़ रुपये की जिला योजना आवंटित की गई थी। इसे लेकर तमाम विभागों के प्रस्तावों के साथ बजट भी आवंटित किया था लेकिन शासन की ओर से साल भर में जिला योजना को महज 121 करोड़ रुपये ही मिल सके। इसके बाद विभागों ने योजना के तहत साल भर में 120 करोड़ रुपये खर्च किए। जबकि 181 लाख रुपये अवशेष हैं।
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नई सरकारी योजना पर प्रदेश सरकार की मेहरबानी भी कुछ खास नहीं रही। इसके लिए आवंटित 405 करोड़ रुपये में से 186 करोड़ का बजट मिल सका। जबकि 141 करोड़ रुपये ही खर्च किए। बजट नहीं मिलने से जिले में तमाम सरकारी योजनाएं परवान नहीं चढ़ सकीं। जबकि पहले से संचालित योजनाओं पर सरकार ने खूब धनवर्षा की। इस दौरान 658 करोड़ में से 622 करोड़ रुपये आवंटित हुए और 554 करोड़ रुपये खर्च भी हो गए। अब वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है। ऐसे में जिला योजना के तहत कोई विकास कार्य शुरू होने की गुंजाइश भी नहीं है। मगर एक बात तय है कागजों पर तैयार की गईं योजनाओं के तहत अगर बजट मिलता तो जिले की तस्वीर बदल सकती थी।
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कुछ यूं तय हुआ था बजट
जिला योजना वर्ष 2017-18 में रोजगार कार्यक्रम के लिए 48.28 करोड़, ग्रामीण आवास को 36.90 करोड़, सड़क.पुल को 24.84 करोड़, ग्रामीण जलापूर्ति.स्वच्छता के लिए 21.63 करोड़, पंचायती राज. 13.80 करोड़, प्राथमिक शिक्षा. 8.40 करोड़, माध्यमिक शिक्षा. 5.36 करोड,़ ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम. 5,79 करोड़, कृषक सहायता. पांच करोड़, पशुपालन. 5.53 करोड़, दुग्ध विकास 2.78 करोड़, वन विभाग 1.08 करोड़, ग्राम्य विकास 3.14 ीकरोड़, भूमि एवं जल संसाधन 50 लाख, कृषि 30 लाख, निजी लघु सिंचाई 3.56 करोड़, राजकीय लघु सिंचाई 66.45 लाख, अतिरिक्त ऊर्जा स्त्रोत 1.09 करोड़, पर्यटन एक करोड़, उच्च शिक्षा 20 लाख, ऐलोपैथी. 30 लाख, पिछड़ी जाति कल्याण 1.45 करोड़ और समाज कल्याण को 3.95 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था, लेकिन बजट नहीं मिलने से योजनाएं अधर में लटकी रहीं।
वर्ष 2017-18 की जिला योजना तो बजट के अभाव में झूलती रही, लेकिन नई जिला योजना से जिले को काफी उम्मीदें हैं। इस बार शासन ने 217 करोड़ रुपये की जिला योजना के प्रस्ताव मांगे हैं। जिनको तैयार किया जा रहा है।
ये हैं आंकड़े
206 करोड़ रुपये की थी जिला योजना
121 करोड़ आवंटित
120 करोड़ हुए खर्च
59.05 फीसदी मिला जिला योजना को बजट
आवंटित बजट के सापेक्ष आए अवमुक्त बजट को संपूर्ण जिले के विकास पर खर्च किया गया है। अब नई जिला योजना को तैयारी हो रही है।
- रमेश चंद्र, डीएसटीओ